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बबलू हत्याकांड में दोषी मुन्नम को उम्रकैद
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पांच वर्ष पूर्व आशनाई में हुई बबलू उर्फ सुभाष मौर्य की हत्या के मामले में सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार यादव की अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई। उस पर 56 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दो साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। वहीं अर्थदंड में से 30 हजार रुपये मृतक के पिता को मिलेगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाने में 19 अप्रैल 2017 को दी तहरीर में कुरहुल गांव निवासी महिला ने आरोप लगाया था कि उसके घर पर 16 अप्रैल 2017 को परिचित बबलू उर्फ सुभाष मौर्य निवासी बंधवा बाजार जिला प्रतापगढ़ आया था। 18 अप्रैल की रात्रि साढ़े 12 बजे गांव के मुन्नम तिवारी अचानक उसके घर में घुस आए और जमीन पर सो रहे बबलू के गर्दन पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। चिल्लाने की आवाज सुनकर जब मौके पर आई तो ढिबरी की रोशनी में मुन्नम तिवारी को देखा। इसके बाद सास, ससुर व बच्चे भी जग गए। इसके पूर्व में भी मुन्नम तिवारी यह धमकी देता था कि अगर घर पर दूसरे को बुलाओगी तो जान से मार देंगे। इस तहरीर पर आरोपी मुन्नम तिवारी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी मुन्नम तिवारी को उम्रकैद और 56 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दो वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं अर्थदंड जमा किए जाने के उपरांत उसमें से 30 हजार रुपये मृतक के पिता को बतौर प्रतिकर मिलेगा। जिला शासकीय अधिवक्ता ज्ञानेंद्र शरण राय सरकार की ओर से अपने तर्क रखें।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाने में 19 अप्रैल 2017 को दी तहरीर में कुरहुल गांव निवासी महिला ने आरोप लगाया था कि उसके घर पर 16 अप्रैल 2017 को परिचित बबलू उर्फ सुभाष मौर्य निवासी बंधवा बाजार जिला प्रतापगढ़ आया था। 18 अप्रैल की रात्रि साढ़े 12 बजे गांव के मुन्नम तिवारी अचानक उसके घर में घुस आए और जमीन पर सो रहे बबलू के गर्दन पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। चिल्लाने की आवाज सुनकर जब मौके पर आई तो ढिबरी की रोशनी में मुन्नम तिवारी को देखा। इसके बाद सास, ससुर व बच्चे भी जग गए। इसके पूर्व में भी मुन्नम तिवारी यह धमकी देता था कि अगर घर पर दूसरे को बुलाओगी तो जान से मार देंगे। इस तहरीर पर आरोपी मुन्नम तिवारी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी मुन्नम तिवारी को उम्रकैद और 56 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दो वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं अर्थदंड जमा किए जाने के उपरांत उसमें से 30 हजार रुपये मृतक के पिता को बतौर प्रतिकर मिलेगा। जिला शासकीय अधिवक्ता ज्ञानेंद्र शरण राय सरकार की ओर से अपने तर्क रखें।
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