{"_id":"5efb70ff8ebc3e42f31ae8dd","slug":"land-sold-without-permission-of-dm-registered-in-gram-sabha-sonbhadra-news-vns5331801176","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएम के अनुमति बिना बेची जमीन ग्राम सभा में दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीएम के अनुमति बिना बेची जमीन ग्राम सभा में दर्ज
विज्ञापन
सोनभद्र। कलेक्टर के बिना अनुमति के अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की जमीन क्रय करने वालों को चिह्नित कर उनकी भूमि ग्राम सभा में दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सदर एसडीएम यमुना धर चौहान ने बरकरा गांव के एक अनुसूचित व्यक्ति की करीब दस बिस्वा जमीन ग्राम सभा में दर्ज कर दिया। उसने डीएम से बिना अनुमति लिए तीन व्यक्तियों को भूमि विक्रय किया था। एसडीएम ने तहसहलीदर की जांच आख्या पर कार्रवाई की।
जानकारी के अनुसार, 25 मार्च 2017 को तहसीलदार ने एसडीएम को जांच आख्या सौंपा था। आख्या में उल्लेख किया गया है कि बरकरा निवासी बसंतू ने तीन लोगों को लगभग दस बिस्वा जमीन विक्रय कर दिया है। विक्रेता अनुसूचित जाति का है और क्रेता गैर अनुसूचित जाति के है। विक्रय पत्र में विक्रेता की जाति का उल्लेख नहीं किया गया है तथा वास्तविकता को छिपाया गया है। वाद दर्ज कर नोटिस जारी की गई। विक्रेता बसंतू ने कोर्ट में हाजिर होकर प्रार्थना पत्र व वकालतनामा प्रस्तुत किया। जबकि क्रेता ने कभी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। उपजिलाधिकारी यमुनाधर चौहान ने बताया कि उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 157-क में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि धारा 153 से 157 में निहित प्रतिबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना अनुसूचित जाति के किसी भूमिधर, आसामी को कलेक्टर केपूर्व अनुमोदन के बिना कोई भूमि किसी ऐसे व्यक्ति को जो अनुसूचित जाति का न हो, विक्रय, दान, बंधक या पट्टे द्वारा अंतरित करने का अधिकार नहीं होगा।
तहाीलदार के आख्या से स्पष्ट है कि बसंतू अनुसूचित जाति का है और उसने सामान्य जाति के तीन व्यक्तियों को जमीन विक्रय कर दिया है। उन्होंने बताया कि बसंतू का खतौनी से नाम निरस्त करके राज्य सरकार/गांव सभा केखाते में अंकित कर दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार, 25 मार्च 2017 को तहसीलदार ने एसडीएम को जांच आख्या सौंपा था। आख्या में उल्लेख किया गया है कि बरकरा निवासी बसंतू ने तीन लोगों को लगभग दस बिस्वा जमीन विक्रय कर दिया है। विक्रेता अनुसूचित जाति का है और क्रेता गैर अनुसूचित जाति के है। विक्रय पत्र में विक्रेता की जाति का उल्लेख नहीं किया गया है तथा वास्तविकता को छिपाया गया है। वाद दर्ज कर नोटिस जारी की गई। विक्रेता बसंतू ने कोर्ट में हाजिर होकर प्रार्थना पत्र व वकालतनामा प्रस्तुत किया। जबकि क्रेता ने कभी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। उपजिलाधिकारी यमुनाधर चौहान ने बताया कि उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 157-क में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि धारा 153 से 157 में निहित प्रतिबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना अनुसूचित जाति के किसी भूमिधर, आसामी को कलेक्टर केपूर्व अनुमोदन के बिना कोई भूमि किसी ऐसे व्यक्ति को जो अनुसूचित जाति का न हो, विक्रय, दान, बंधक या पट्टे द्वारा अंतरित करने का अधिकार नहीं होगा।
विज्ञापन
तहाीलदार के आख्या से स्पष्ट है कि बसंतू अनुसूचित जाति का है और उसने सामान्य जाति के तीन व्यक्तियों को जमीन विक्रय कर दिया है। उन्होंने बताया कि बसंतू का खतौनी से नाम निरस्त करके राज्य सरकार/गांव सभा केखाते में अंकित कर दिया गया है।
विज्ञापन