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Sonebhadra News: कोई दबाव बनाकर लिखवा रहा जांच, जिन्हें जरूरत वह लौट रहे निराश
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डॉक्टर साहब, मुझे पेट में दर्द है अल्ट्रासाउंड करा दीजिए। मेरे सिर में दर्द रहता है, सीटी स्कैन लिख दीजिए... जिला अस्पताल में रोजाना ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो खुद से डॉक्टर को जांच लिखने का दबाव बना रहे हैं। डॉक्टर के जरूरी न समझने के बाद भी मरीजों के दबाव से विवाद की स्थिति बन रही है।
यही नहीं बेवजह जांच की प्रवृत्ति से पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड और एक्सरे केंद्र पर लोड भी बढ़ रहा है। इससे कई ऐसे मरीज बिना जांच निराश लौट रहे, जिन्हें वास्तव में जांच जरूरी है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, सीटी स्कैन सहित कई तरह की जांच सुविधा सिर्फ जिला अस्पताल में ही मौजूद है।
यहां पहुंचने के लिए मरीजों को कई घंटे का सफर तय करना पड़ता है। बभनी, म्याेरपुर, दुद्धी और कोन जैसे इलाकों से तो मरीज एक दिन पहले ही आ जाते हैं, ताकि समय से वह जांच केंद्र पर पहुंच सके। बावजूद कई बार उन्हें केंद्रों पर अत्यधिक भीड़ के चलते मायूस होना पड़ता है।
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अस्पताल की ओपीडी में 800-900 मरीज पहुंचते हैं। रोजाना औसतन 50-60 मरीजों का सीटी स्कैन, 30 से 40 मरीजों का अल्ट्रासाउंड हो पाता है। करीब 250 से 300 मरीजों के खून की जांच हो पाती है। काफी संख्या के मरीजों को बगैर जांच के वापस लौटना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों की मानें तो बड़ी संख्या में ऐसे मरीज आ रहे हैं, जो पर्ची देते ही अल्ट्रासाउंड जांच, सीटी स्कैन लिखने का दबाव दे रहे हैं। कई तो विवाद पर उतारू हैं। ऐसे में काफी संख्या में चिकित्सक विवाद से बचने के लिए ब्लड की जांच, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड लिख रहे हैं।
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डेढ़ माह बाद मिल रही अल्ट्रासाउंड की तारीख
पेट की कई ऐसी बीमारियां होती हैं, जिसकी समय पर पहचान जरूरी है। इसके लिए चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं। यहां अल्ट्रासाउंड कराना आसान नहीं है। एक दिन नंबर लगाइए तो डेढ़ माह बाद अल्ट्रासाउंड हो पाएगा। मरीजों काे इस समय पांच से 6 सितंबर का नंबर अल्ट्रासाउंड के लिए मिल रहा है। इसका लाभ निजी सेंटर संचालक उठा रहे हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए निजी सेंटरों पर मरीज को 700 से 1000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सागर ने सभी विभागाध्यक्ष, एसआर, जेआर को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि जितने भी चिकित्सक हैं, वे मरीजों के दबाव में अनावश्यक रूप से ब्लड, एक्सरे, सीटी, अल्ट्रासाउंड लिख रहे हैं। इससे जांच केंद्रों पर लोड बढ़ रहा है।
जिला अस्पताल में उपचार कराने आई पन्नूगंज निवासी सरिता देवी को सर्जन ने अल्ट्रासाउंड की सलाह दी। वह पहुंची तो पहले से वेटिंग थी। उसे पांच सिंतबर को जांच के लिए डेट दिया गया।
जुगैल निवासी मोहन कुमार को चिकित्सक ने खून की जांच लिखी थी। वह जब तक काउंटर पर पहुंचते जांच का समय और संख्या भी अधिक होने के चलते बाद में आने को कहा गया।
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यही नहीं बेवजह जांच की प्रवृत्ति से पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड और एक्सरे केंद्र पर लोड भी बढ़ रहा है। इससे कई ऐसे मरीज बिना जांच निराश लौट रहे, जिन्हें वास्तव में जांच जरूरी है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, सीटी स्कैन सहित कई तरह की जांच सुविधा सिर्फ जिला अस्पताल में ही मौजूद है।
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यहां पहुंचने के लिए मरीजों को कई घंटे का सफर तय करना पड़ता है। बभनी, म्याेरपुर, दुद्धी और कोन जैसे इलाकों से तो मरीज एक दिन पहले ही आ जाते हैं, ताकि समय से वह जांच केंद्र पर पहुंच सके। बावजूद कई बार उन्हें केंद्रों पर अत्यधिक भीड़ के चलते मायूस होना पड़ता है।
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अस्पताल की ओपीडी में 800-900 मरीज पहुंचते हैं। रोजाना औसतन 50-60 मरीजों का सीटी स्कैन, 30 से 40 मरीजों का अल्ट्रासाउंड हो पाता है। करीब 250 से 300 मरीजों के खून की जांच हो पाती है। काफी संख्या के मरीजों को बगैर जांच के वापस लौटना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों की मानें तो बड़ी संख्या में ऐसे मरीज आ रहे हैं, जो पर्ची देते ही अल्ट्रासाउंड जांच, सीटी स्कैन लिखने का दबाव दे रहे हैं। कई तो विवाद पर उतारू हैं। ऐसे में काफी संख्या में चिकित्सक विवाद से बचने के लिए ब्लड की जांच, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड लिख रहे हैं।
डेढ़ माह बाद मिल रही अल्ट्रासाउंड की तारीख
पेट की कई ऐसी बीमारियां होती हैं, जिसकी समय पर पहचान जरूरी है। इसके लिए चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं। यहां अल्ट्रासाउंड कराना आसान नहीं है। एक दिन नंबर लगाइए तो डेढ़ माह बाद अल्ट्रासाउंड हो पाएगा। मरीजों काे इस समय पांच से 6 सितंबर का नंबर अल्ट्रासाउंड के लिए मिल रहा है। इसका लाभ निजी सेंटर संचालक उठा रहे हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए निजी सेंटरों पर मरीज को 700 से 1000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सागर ने सभी विभागाध्यक्ष, एसआर, जेआर को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि जितने भी चिकित्सक हैं, वे मरीजों के दबाव में अनावश्यक रूप से ब्लड, एक्सरे, सीटी, अल्ट्रासाउंड लिख रहे हैं। इससे जांच केंद्रों पर लोड बढ़ रहा है।
जिला अस्पताल में उपचार कराने आई पन्नूगंज निवासी सरिता देवी को सर्जन ने अल्ट्रासाउंड की सलाह दी। वह पहुंची तो पहले से वेटिंग थी। उसे पांच सिंतबर को जांच के लिए डेट दिया गया।
जुगैल निवासी मोहन कुमार को चिकित्सक ने खून की जांच लिखी थी। वह जब तक काउंटर पर पहुंचते जांच का समय और संख्या भी अधिक होने के चलते बाद में आने को कहा गया।