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Sonebhadra News: एक्सिस बैंक के ऋण प्रबंधक, फील्ड ऑफिसर सहित सभी कर्मियों पर धोखाधड़ी की प्राथमिकी
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सोनभद्र। लोन के नाम पर व्यवसायी के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एसपी अभिषेक वर्मा के निर्देश पर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस ने एक्सिस बैंक रॉबर्ट्सगंज के ऋण प्रबंधक विनय कुमार, फील्ड ऑफिसर सत्येंद्र कुमार, बसंत पटेल समेत सभी कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
आरोप है कि पहले जमीन की खरीदारी के लिए मांगे गए ऋण की स्वीकृति के नाम पर अच्छी-खासी धनराशि वसूली गई। बाद में बैनामे के समय यह कहकर स्वीकृत हुई लोन की धनराशि उपलब्ध कराने से इन्कार कर दिया गया कि उन्हें उनका कमीशन नहीं मिला। इसके चलते पीड़ित को बैनामा दस्तावेज पर खर्च की गई रकम का भी नुकसान उठाना पड़ा। आरोप है कि कर्ज नहीं मिला खाते से ईएमआई कटने लगी।
कोतवाली क्षेत्र के घुवास मोहाल निवासी सूर्यनारायण पांडेय ने एसपी को सौंपे प्रार्थना पत्र में बताया है कि वह व्यवसायी हैं। दो दिसंबर 2025 को उन्हें विनय पांडेय ने कॉल किया। खुद को एक्सिस बैंक की वाराणसी स्थित महमूरगंज शाखा का ऋण अनुभाग प्रबंधक बताते हुए आवासीय ऋण 12 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का विश्वास दिलाया। इसके लिए नजदीकी शाखा से संपर्क करने के लिए कहा गया। इस पर वह रॉबर्ट्सगंज ब्रांच पहुंचे तो वहां फील्ड अफसर सत्येंद्र कुमार मिले। उन्होंने शाखा कर्मी संध्या वर्मा से संपर्क करवाकर उनका, उनकी पत्नी दोनों का खाता खुलवाया। कहा कि लोन का कामकाज वाराणसी से विनय ही देखते हैं। कॉल करने पर उन्होंने बगैर किसी प्रोसेसिंग फीस के तत्काल ऋण दिलाने की बात कही। इस आश्वासन पर उन्होंने पकरी में सुशीला देवी पत्नी श्यामबिहारी यादव से एक बिस्वा जमीन का सौदा कर लिया। लोन देने के नाम पर उनके और उनकी पत्नी से कई कागजात पर हस्ताक्षर करवाए गए। सुशीला से भी जाकर जानकारी ली गई और उनका अंगूठा निशान लगवाया गया।
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कभी लीगल चार्ज तो कभी विजिट शुल्क के नाम पर की जाती रही वसूली
जब ऋण दिए जाने की बारी आई तो लीगल चार्ज के नाम पर पांच दिसबर को 2,360 रुपये जमा कराए गए। फिर मौके की जांच के नाम पर 27 जनवरी से 27 फरवरी 9,558 रुपये लिए गए। संबधित जमीन को देखने आए बैंक के लोगों ने प्रत्येक विजिट के लिए पांच हजार रुपये लिए। इस बीच सुशीला को एडवांस के रूप में 1.60 लाख रुपये देने पड़े। 19 जनवरी को विनय के साथ बैंककर्मी बसंत पटेल ने उनसे बात की और 4500 रुपये मंगाए। इसके बाद बताया कि 17 लाख का लोन स्वीकृत हो चुका है। बैनामे के दिन सीधे डीडी (डिमांड ड्राफ्ट) से भुगतान कर दिया जाएगा।
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73 हजार खर्च कर तैयार कराए थे बैनामे के कागजात
लोन के आश्वासन पर 73 हजार खर्च कर रजिस्ट्री का पेपर तैयार करवाया। बैनामे की प्रक्रिया शुरू की तो विनय ने अपने एक परिचित एमके वर्मा के हाथ डीडी भेजी लेकिन 50 हजार कमीशन की मांग शुरू कर दी। महज 15 हजार ही बचे हुए थे जिसे उसने दिया भी लेकिन विनय पूरे 50 हजार की बात पर अड़े रहे। असमर्थता जताने पर डीडी वापस मंगा ली। पीड़ित ने बताया कि लोन नहीं मिला लेकिन उनके खाते से 10 मार्च और 10 अप्रैल को ईएमआई काट ली गई।
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वर्जन ...
मामले में एक्सिस बैंक रॉबर्ट्सगंज के सभी कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी गई है। - रामस्वरूप वर्मा प्रभारी निरीक्षक।
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आरोप है कि पहले जमीन की खरीदारी के लिए मांगे गए ऋण की स्वीकृति के नाम पर अच्छी-खासी धनराशि वसूली गई। बाद में बैनामे के समय यह कहकर स्वीकृत हुई लोन की धनराशि उपलब्ध कराने से इन्कार कर दिया गया कि उन्हें उनका कमीशन नहीं मिला। इसके चलते पीड़ित को बैनामा दस्तावेज पर खर्च की गई रकम का भी नुकसान उठाना पड़ा। आरोप है कि कर्ज नहीं मिला खाते से ईएमआई कटने लगी।
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कोतवाली क्षेत्र के घुवास मोहाल निवासी सूर्यनारायण पांडेय ने एसपी को सौंपे प्रार्थना पत्र में बताया है कि वह व्यवसायी हैं। दो दिसंबर 2025 को उन्हें विनय पांडेय ने कॉल किया। खुद को एक्सिस बैंक की वाराणसी स्थित महमूरगंज शाखा का ऋण अनुभाग प्रबंधक बताते हुए आवासीय ऋण 12 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का विश्वास दिलाया। इसके लिए नजदीकी शाखा से संपर्क करने के लिए कहा गया। इस पर वह रॉबर्ट्सगंज ब्रांच पहुंचे तो वहां फील्ड अफसर सत्येंद्र कुमार मिले। उन्होंने शाखा कर्मी संध्या वर्मा से संपर्क करवाकर उनका, उनकी पत्नी दोनों का खाता खुलवाया। कहा कि लोन का कामकाज वाराणसी से विनय ही देखते हैं। कॉल करने पर उन्होंने बगैर किसी प्रोसेसिंग फीस के तत्काल ऋण दिलाने की बात कही। इस आश्वासन पर उन्होंने पकरी में सुशीला देवी पत्नी श्यामबिहारी यादव से एक बिस्वा जमीन का सौदा कर लिया। लोन देने के नाम पर उनके और उनकी पत्नी से कई कागजात पर हस्ताक्षर करवाए गए। सुशीला से भी जाकर जानकारी ली गई और उनका अंगूठा निशान लगवाया गया।
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कभी लीगल चार्ज तो कभी विजिट शुल्क के नाम पर की जाती रही वसूली
जब ऋण दिए जाने की बारी आई तो लीगल चार्ज के नाम पर पांच दिसबर को 2,360 रुपये जमा कराए गए। फिर मौके की जांच के नाम पर 27 जनवरी से 27 फरवरी 9,558 रुपये लिए गए। संबधित जमीन को देखने आए बैंक के लोगों ने प्रत्येक विजिट के लिए पांच हजार रुपये लिए। इस बीच सुशीला को एडवांस के रूप में 1.60 लाख रुपये देने पड़े। 19 जनवरी को विनय के साथ बैंककर्मी बसंत पटेल ने उनसे बात की और 4500 रुपये मंगाए। इसके बाद बताया कि 17 लाख का लोन स्वीकृत हो चुका है। बैनामे के दिन सीधे डीडी (डिमांड ड्राफ्ट) से भुगतान कर दिया जाएगा।
73 हजार खर्च कर तैयार कराए थे बैनामे के कागजात
लोन के आश्वासन पर 73 हजार खर्च कर रजिस्ट्री का पेपर तैयार करवाया। बैनामे की प्रक्रिया शुरू की तो विनय ने अपने एक परिचित एमके वर्मा के हाथ डीडी भेजी लेकिन 50 हजार कमीशन की मांग शुरू कर दी। महज 15 हजार ही बचे हुए थे जिसे उसने दिया भी लेकिन विनय पूरे 50 हजार की बात पर अड़े रहे। असमर्थता जताने पर डीडी वापस मंगा ली। पीड़ित ने बताया कि लोन नहीं मिला लेकिन उनके खाते से 10 मार्च और 10 अप्रैल को ईएमआई काट ली गई।
वर्जन ...
मामले में एक्सिस बैंक रॉबर्ट्सगंज के सभी कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी गई है। - रामस्वरूप वर्मा प्रभारी निरीक्षक।