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Sonebhadra News: सिल्ट से 17 फीसदी घटी धंधरौल बांध की जल संग्रहण क्षमता, जल्द होगी सफाई

Sat, 25 Apr 2026 11:49 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Apr 2026 11:49 PM IST
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Dhandhraul Dam's Water Storage Capacity Drops by 17% Due to Silt; Cleaning to Begin Soon
धंधरौल बांध, जिसके तलहटी में जमे सिल्ट की होनी है सफाई। संवाद
सोनभद्र। मिर्जापुर मंडल के सबसे पुराने बांधों में से एक धंधरौल बांध में सिल्ट (गाद) जमा होने की वजह से बांध की जल संग्रहण क्षमता 17 फीसदी कम हो गई है। जल संग्रहण क्षमता कम होने की वजह से इस बांध पर बनी पेयजल परियोजनाओं और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मुश्किलें होने लगती है। अब सिल्ट की सफाई करके बांध के जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने की कवायद में सिंचाई विभाग जुट गया है। सिल्ट की सफाई ड्रेजर मशीन लगाकर कराई जाएगी। सिल्ट की सफाई होने से न सिर्फ जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि बांध की उम्र और उपयोगिता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।
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एसडीओ-मिर्जापुर कैनाल डिवीजन अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आने वाले 15 से 20 वर्षो में धंधरौल बांध में संग्रहित पानी की सिंचाई और पीने के पानी में ज्यादा उपयोगिता बढ़ेगी। वर्ष 2047 तक धंधरौल बांध से पानी आपूर्ति मांग दोगुना हो जाएगी। इसको ध्यान में रखते हुए धंधरौल बांध के मरम्मत और इसके सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण के बाद से अब तक बांध की एक बार भी सफाई नहीं हुई है। ऐसे में बांध के तलहटी में सिल्ट जमा होने से बांध में जल संग्रहण की क्षमता 17 फीसदी कम हो गई है। जल्द ही बांध की तलहटी में जमी गाद को ड्रेजर मशीन के माध्यम से सफा कराया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले वर्षों में क्षेत्र की बढ़ती सिंचाई जरूरतों और परियोजनाओं की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए इस कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है।
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मिर्जापुर कैनाल डिवीजन मिर्जापुर (एमसीडी) की तरफ से करीब 109 साल पुराने धंधरौल बांध की देखरेख किया जाता है। अंग्रेजों के शासनकाल में बने इस बांध से मौजूदा समय में सोनभद्र के साथ ही मिर्जापुर जिले के मड़िहान तहसील क्षेत्र के हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई होती है। साथ ही बांध पर बने रॉबर्ट्सगंज पुनर्गठन पेयजल योजना, बेलाही पेयजल परियोजना और बढ़ौली-कुसाही ग्राम समूह पेयजल परियोजना को पानी मिलता है। हालांकि बढ़ौली-कुसाही ग्राम समूह पेयजल परियोजना से जुड़े गांवों को पटवध पेयजल परियोजना से जोड़ा जा रहा है। इस तरह से सिंचाई के साथ ही पीने के पानी और आस-पास के गांवों की वॉटर लेवल मेंटेन रखने में धंधरौल बांध की भूमिका काफी अहम है।
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8.50 करोड़ की लागत से बांध का रोका जाएगा सीपेज
जिले की सबसे पुरानी धंधरौल बांध का मरम्मत कार्य भी कराया जाना है। करीब 8 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की तरफ से बांध का मरम्मत कराया जाएगा। वर्ष 2023 में बांध का सोनाेग्राफी सर्वे कराते हुए सीडब्ल्यूसी की टीम ने बांध का सीपेज को रोकने व मरम्मत कराने का प्रस्ताव दिया है। बताया जा रहा है कि जल्द ही केंद्र सरकार की तरफ से धंधरौल बांध का मरम्मत कार्य शुरू कराया जा सकता है। बता दें कि डैम एक्ट 2021 के अन्तर्गत धंधरौल बांध को भी शामिल किया गया है। इसलिए इसका मरम्मत कार्य केंद्र सरकार की एजेंसी की देखरेख में कराया जाएगा।
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