सूरज की तपिश पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ी। करमा विकास खंड के करनवाह गांव में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमहालक्ष्मी नारायण महायज्ञ के अंतिम दिन सोमवार को यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।
कड़ी धूप के बावजूद भारी संख्या में श्रद्धालु भगवान विष्णु एवं महालक्ष्मी की कृपा पाने के लिए मंडप स्थल पर पहुंचे और हवन कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान ढाई क्विंटल हवन सामग्री से हवन कुंड में चार लाख आहुति प्रदान की गई। सोमवार अंतिम दिन सुबह से ही भक्तों के यज्ञ स्थल पर आने का सिलसिला शुरू हो गया। हवन-पूजन के बाद आयोजित भंडारे में भारी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। महायज्ञ में करनवाह के साथ क्षेत्र के टिकुरिया, तियरा, सिरविट, मदैनिया, रानीतारा, पटेहरा, पगिया, सिरसिया ठकुराई, धौरहरा, भरकवाह, कर्मा आदि गांवों से भी ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। रात में यज्ञ अधिष्ठाता स्वामी सुग्रीवानंद जी महाराज ने संगीतमय प्रवचन के दौरान परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मार्मिक प्रसंग सुनाया। यजमान गोपाल सिंह वैद्य, रविंद्र बहादुर सिंह, संजय सिंह, रोहित सिंह, भैयालाल सिंह, संतोष सिंह आदि ने हवन में भाग लिया। अंत में यज्ञाचार्य दयाशंकर शुक्ल एवं पं, अरुण कुमार शुक्ल, पं, हीरा त्रिपाठी, पं, धीरज त्रिपाठी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापित देवी-देवताओं का विसर्जन कराया।