जिले में फर्जी रिलीज आर्डर पर विभिन्न थानों से बंद वाहनों को छुड़ाने का मामला गंभीर हो गया है। मिर्जापुर के आरटीओ के बाद शुक्रवार को वाराणसी के उप परिवहन आयुक्त भी एआरटीओ कार्यालय धमक पड़े। वाराणसी और लखनऊ से आए अफसरों ने घंटों वाहनों से जुड़ी पत्रावलियों को खंगाला। एक-एक फाइल की पड़ताल की और संबंधितों से पूछताछ की। अफसरों के तेवर से कई कर्मचारियों के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। जांच का दायरा बढ़ने के बाद अब मामले में कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
शुक्रवार की दोपहर बाद उप परिवहन आयुक्त वाराणसी अशोक कुमार सिंह, सहायक परिवहन आयुक्त लखनऊ सुरेंद्र सिंह, मिर्जापुर आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी, आरटीओ प्रवर्तन राजेश वर्मा एआरटीओ दफ्तर पहुंचे। कार्यालय में मौजूद सभी कर्मी अपने-अपने कुर्सी पर बैठ कर काम करने में जुट गए। अधिकारियों ने ट्रेजरी चालान, रिलीज आर्डर फाइल समेत अन्य पत्रावलियों की जांच करते हुए संबंधित बाबुओं से पूछताछ की। जांच के दौरान अधिकारियों ने कुछ पत्रावलियों की फोटो कॉपी भी ली। अधिकारियों ने रिलीज आर्डर पर किन-किन लोगों के हस्ताक्षर होते हैं आदि के बारे में भी पूछताछ की। एआरटीओ दफ्तर में दूसरे दिन भी छापेमारी होने से आसपास सन्नाटा पसरा रहा। बिचौलिये भी नहीं दिखाए दिए। उधर, देर शाम तक एआरटीओ दफ्तर में जांच टीम पत्रावलियों को खंगालने में जुटी रही। आरटीओ संजय तिवारी ने बताया कि फर्जी रिलीज आर्डर कैसे जारी हुआ समेत अन्य बिंदुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है। कहा कि जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।