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दुद्धी को जिला बनाने के लिए प्रदर्शन किया
sonbhadra
Updated Sat, 15 Sep 2018 11:43 PM IST
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दुद्धी। दुद्धी को जिला बनाने की मांग जारी है। शनिवार को अधिवक्ताओं ने फिर न्यायिक कार्य से विरत रहकर दुद्धी को जिला बनाने की मांग उठाई। अधिवक्ताओं ने कचहरी गेट पर प्रदर्शन और नारेबाजी की। चेताया कि यदि सरकार जिला बनाने की घोषणा नहीं करती है तो आने वाले लोकसभा चुनाव में क्षेत्र की जनता इसका जवाब देगी।
यहां जिला बनाओ संघर्ष मोर्चा के महासचिव प्रभु सिंह कुशवाहा ने कहा कि सोनभद्र उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला होने के साथ ही साथ पूर्व के नक्सल प्रभावित तीन जिलों में से एक है। इसके बावजूद जिले के सोन नदी के दक्षिण का क्षेत्र अभी भी विकास से अछूता है, क्योकि तहसील दुद्धी के पूर्वी -पश्चिम एवं दक्षिणी सीमा पर स्थित ग्रामों से जिले का मुख्यालय राबर्ट्सगंज करीब 150 किमी दूर है। इससे शासन प्रशासन तक जनता की पहुंच आसान नहीं है।
दुद्दी बार के सचिव अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सर्वाधिक राजस्व देने वाले नक्सल प्रभावित, आदिवासी बाहुल्य, अति पिछड़े क्षेत्र के लोगों को सुलभ एवं सस्ता न्याय दिलाने एवं शासन-प्रशासन तक जनता की पहुंच आसान बनाने के लिए पृथक जिला दुद्धी बनाना न्यायसंगत होगा। उन्होंने कहा कि दुद्धी जिले में सोन नदी के दक्षिण का पूरा भू-भाग और कोन क्षेत्र के झारखंड ,छतीसगढ़ मध्य प्रदेश के सीमा से सटे पूरे गांव को नए जिले दुद्धी में शामिल किया जाए।
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दुद्धी को जिला न बनने से क्षेत्र में शुद्ध पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ्य की सुविधा भी नही मिल रही। दिनेश अग्रहरि, रामपाल जौहरी, राकेश श्रीवस्तव, रामअजोर भारती, कुलभूषण, मनोज कनौजिया, जयप्रकाश तिवारी, विष्णुकांत तिवारी, अजय रतनेंद्र आदि रहे।
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यहां जिला बनाओ संघर्ष मोर्चा के महासचिव प्रभु सिंह कुशवाहा ने कहा कि सोनभद्र उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला होने के साथ ही साथ पूर्व के नक्सल प्रभावित तीन जिलों में से एक है। इसके बावजूद जिले के सोन नदी के दक्षिण का क्षेत्र अभी भी विकास से अछूता है, क्योकि तहसील दुद्धी के पूर्वी -पश्चिम एवं दक्षिणी सीमा पर स्थित ग्रामों से जिले का मुख्यालय राबर्ट्सगंज करीब 150 किमी दूर है। इससे शासन प्रशासन तक जनता की पहुंच आसान नहीं है।
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दुद्दी बार के सचिव अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सर्वाधिक राजस्व देने वाले नक्सल प्रभावित, आदिवासी बाहुल्य, अति पिछड़े क्षेत्र के लोगों को सुलभ एवं सस्ता न्याय दिलाने एवं शासन-प्रशासन तक जनता की पहुंच आसान बनाने के लिए पृथक जिला दुद्धी बनाना न्यायसंगत होगा। उन्होंने कहा कि दुद्धी जिले में सोन नदी के दक्षिण का पूरा भू-भाग और कोन क्षेत्र के झारखंड ,छतीसगढ़ मध्य प्रदेश के सीमा से सटे पूरे गांव को नए जिले दुद्धी में शामिल किया जाए।
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दुद्धी को जिला न बनने से क्षेत्र में शुद्ध पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ्य की सुविधा भी नही मिल रही। दिनेश अग्रहरि, रामपाल जौहरी, राकेश श्रीवस्तव, रामअजोर भारती, कुलभूषण, मनोज कनौजिया, जयप्रकाश तिवारी, विष्णुकांत तिवारी, अजय रतनेंद्र आदि रहे।