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राष्ट्रीय खेल दिवस: सात साल से कोच को तरस रहा बास्केटबॉल कोर्ट, हॉकी खिलाड़ियों को स्टेडियम की आस

Sat, 29 Aug 2026 02:42 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 29 Aug 2026 02:42 PM IST
सार

सोनभद्र में खेल प्रतिभाओं के सामने संसाधनों के बावजूद प्रशिक्षकों और सुविधाओं का अभाव चुनौती बना है। तियरा स्थित विशिष्ट स्पोर्ट्स स्टेडियम में लाखों रुपये की लागत से बना सिंथेटिक बास्केटबॉल कोर्ट सात साल से कोच का इंतजार कर रहा है। कुश्ती, ताइक्वांडो, कबड्डी और टेबल टेनिस के कोर्ट भी प्रशिक्षकों के अभाव में उपयोगी नहीं हैं। हॉकी खिलाड़ी चुर्क के अस्थायी मैदान में अभ्यास करने को मजबूर हैं।

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National Sports Day Coach craving for basketball court seven years in sonbhadra hockey players hope stadium
जिला स्टेडियम में स्थित बास्केटबॉल कोर्ट। - फोटो : संवाद

विस्तार

खेल प्रतिभाओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच जिले में खिलाड़ियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। तियरा स्थित विशिष्ट स्पोर्ट्स स्टेडियम में सात साल से बास्केटबॉल कोर्ट कोच का इंतजार कर रहा है। लाखों रुपये की लागत से बने सिंथेटिक कोर्ट का प्रशिक्षक के अभाव में इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। यही स्थिति कुश्ती, ताइक्वांडो, कबड्डी और टेबल टेनिस की भी है। कोर्ट और मैदान होने के बावजूद प्रशिक्षक नहीं होने से इन खेलों का नियमित प्रशिक्षण प्रभावित है।

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दूसरी ओर राष्ट्रीय खेल हॉकी के खिलाड़ी पिछले सात साल से मैदान की मांग कर रहे हैं। चुर्क में पहाड़ी क्षेत्र को समतल कर बनाए गए अस्थायी मैदान पर खिलाड़ी किसी तरह अभ्यास कर रहे हैं। इसी मैदान पर अभ्यास करते हुए 30 से अधिक खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं। इसके बावजूद खिलाड़ियों को अब तक मानक के अनुरूप हॉकी मैदान नहीं मिल सका है।
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जिले में ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा विभिन्न खेलों में भविष्य बनाने का सपना लेकर मैदान पहुंचते हैं। कई खिलाड़ी मंडल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जिले का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। इसके बावजूद आधारभूत सुविधाओं और प्रशिक्षकों की कमी उनकी राह में बाधा बनी हुई है। खिलाड़ियों का कहना है कि केवल प्रतियोगिताएं आयोजित कराने से खेल प्रतिभाओं को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। नियमित प्रशिक्षण, विशेषज्ञ कोच और मानक के अनुरूप मैदान भी जरूरी हैं। बास्केटबॉल कोर्ट समेत अन्य सुविधाओं पर खर्च के बाद प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं कराए जाने से उनका उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

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सिर्फ इन खेलों के हैं कोच
जिला स्टेडियम में तीरंदाजी का हॉस्टल है। इस खेल के लिए महिला और पुरुष प्रशिक्षकों के साथ खेलो इंडिया के तहत भी एक प्रशिक्षक नियुक्त है। इसके अलावा एथलेटिक्स, फुटबॉल, वॉलीबॉल और वेटलिफ्टिंग के एक-एक कोच हैं। वहीं कुश्ती, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन, क्रिकेट, बास्केटबॉल, टेबल टेनिस और जूडो-कराटे के लिए मैदान व कोर्ट होने के बावजूद प्रशिक्षक नहीं हैं। इन खेलों के कोच की मांग हर साल निदेशालय को भेजी जाती है, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है।

सात साल से मिल रहा आश्वासन
हॉकी खिलाड़ियों की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई है। करीब सात साल से खिलाड़ी चुर्क में पहाड़ी को समतल कर बनाए गए अस्थायी मैदान पर अभ्यास कर रहे हैं। जिला खेल समिति के सदस्य रहे स्वदीप श्रीवास्तव और हॉकी खिलाड़ी अमरजीत यादव के मुताबिक, कई बार हॉकी स्टेडियम की मांग उठाई जा चुकी है। वर्ष 2019 से पहले खिलाड़ी एक निजी कंपनी के परिसर में अभ्यास करते थे। 

प्रबंधन की आपत्ति के बाद जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से हॉकी मैदान उपलब्ध कराने की मांग की गई। मैदान बनाने की पहल भी हुई, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। समतल और मानक के अनुरूप मैदान नहीं होने से खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान परेशानी होती है। एनआईएस कोच दिग्विजय सिंह ने बताया कि जिले में हॉकी के कई प्रतिभावान खिलाड़ी हैं, लेकिन उचित मैदान नहीं होने से उनकी प्रतिभा प्रभावित हो रही है।

National Sports Day Coach craving for basketball court seven years in sonbhadra hockey players hope stadium
चुर्क में पहाड़ी पर हॉकी खेलते खिलाड़ी। - फोटो : संवाद

पहाड़ी मैदान पर चोटिल हो जाते हैं खिलाड़ी

जिले में हॉकी के कई प्रतिभावान खिलाड़ी हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में वे निखर नहीं पा रहे हैं। पहाड़ी पर खेलते समय खिलाड़ी कई बार चोटिल हो जाते हैं, जिसके बाद उन्हें खेल से दूरी बनानी पड़ती है। - सुमित रावत, नेशनल खिलाड़ी।

सही मार्गदर्शन और सुविधा की जरूरत
हॉकी के लिए जिले में भरपूर संभावनाएं हैं। जरूरत केवल खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। मानक के अनुरूप मैदान मिलने से खिलाड़ियों को काफी मदद मिलेगी। यहां के खिलाड़ी आगे तक जाने में सक्षम हैं। - अविनाश यादव, नेशनल खिलाड़ी।

ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देना जरूरी
स्पोर्ट्स हॉस्टल आने के बाद पता चला कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को प्रोत्साहित करना कितना जरूरी है। सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते। दूसरे राज्यों में खेलों को लेकर अलग तरह का उत्साह है। सुविधा और प्रोत्साहन मिलने पर खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। - महिमा रावत, हॉकी खिलाड़ी।
 

बास्केटबॉल के लिए एक सिंथेटिक समेत दो कोर्ट हैं। पूर्व में यहां कोच भी रहे हैं। फिलहाल स्टेडियम में पांच खेलों के प्रशिक्षक हैं। अन्य खेलों के लिए निदेशालय से कोच की मांग की गई है। जल्द नियुक्ति होने की उम्मीद है। खेलों के विकास के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। खेल संघों के समन्वय से प्रतियोगिताएं भी आयोजित कराई जा रही हैं। - शमीम अहमद, जिला खेल अधिकारी।

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