सिंगरौली: कोयला संकट का समाधान तलाशने एनसीएल मुख्यालय पहुंचे केंद्रीय कोयला मंत्री, खदानों का लेंगे जायजा
देश में 110 पावर प्लांट कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। कई राज्यों में बिजली संकट और पावर कट की समस्या बनी हुई है। कोयला संकट का समाधान तलाशने केंद्रीय कोयला मंत्री मंत्री प्रह्लाद एनसीएल मुख्यालय सिंगरौली पहुंचे हैं।
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नेशनल पावर पोर्टल की ओर से जारी आंकड़ों के तहत देश में 110 पावर प्लांट कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। कई राज्यों में बिजली संकट और पावर कट की समस्या बनी हुई है। उत्तर प्रदेश राज्य उत्पादन निगम की अनपरा, ओबरा, पारीक्षा सहित कई प्रमुख विद्युत गृहों में पर्याप्त कोयला न होने से इकाइयों को कम क्षमता पर चलाया जा रहा है।
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राज्य में विद्युत आपूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए सरकार को दो से ढाई गुने दाम पर निजी कंपनियों से बिजली खरीदनी पड़ रही है। उत्पादन इकाइयों की ओर से कोयले की कम आपूर्ति की दलील दी जा रही है, जबकि एनसीएल की ओर से अनुबंध से भी अधिक आपूर्ति का दावा किया जा रहा है।
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रेल रैक से कोयले की आपूर्ति शुरू, अनपरा को मिली राहत
रेल रैक से कोयले की आपूर्ति शुरू होने के बाद अनपरा परियोजना को कोयला संकट से आंशिक राहत मिली है। कोयला आपूर्ति को लेकर रेलवे के बाद परियोजना प्रबंधन ने सोमवार को एनसीएल प्रबंधन के साथ भी बैठक कर विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण अनपरा परियोजना को रेल रैक से कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी।
इससे परियोजना में कोयले का स्टॉक लगातार कम हो रहा था। रविवार को अनपरा बी परियोजना में महज आधे दिन का स्टॉक शेष रह गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उत्पादन निगम के साथ परियोजना प्रबंधन भी लगातार रेलवे व एनसीएल प्रबंधन के संपर्क में था। रविवार को रेलवे के एडीआरएम के साथ परियोजना प्रबंधन की हुई बैठक में दो रेल रैक कोयला आपूर्ति पर सहमति बनी थी।
अनपरा परियोजना प्रबंधन के अनुसार कोयला संकट को देखते हुए सोमवार को एनसीएल प्रबंधन की ओर से भी अपनी सहमति दे दी गई है। रविवार को परियोजना को 40239 एमटी कोयला प्राप्त हुआ है। इससे परियोजना में कोयले का स्टॉक भी 49755 एमटी से बढ़कर 60206 एमटी हो गया है। हालांकि कोयला संकट के कारण लोड कम करने के साथ ही इस समय प्रदेश में बिजली की मांग में कमी से परियोजना को थर्मल बैकिंग का भी सामना करना पड़ रहा है।
बिजली की मांग लुढ़की, परियोजनाओं से भारी थर्मल बैकिंग
रविवार सुबह प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 20631 मेगावाट थी। पारा लुढ़कते ही सोमवार सुबह तक यह गिरकर 14751 मेगावाट पहुंच गया। इस दौरान न्यूनतम मांग 10006 मेगावाट हो जाने से सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर पारीछा व हरदुआगंज की इकाइयों को बंद करा दिया गया। इसके साथ ही अनपरा के सभी बिजलीघरों से थर्मल बैंकिंग शुरू हो गई।
अनपरा ए से 341, बी से 536 व डी परियोजना से महज 543 मेगावाट बिजली उत्पादन होने से निगम का उत्पादन भी लुढ़ककर 1764 मेगावाट पहुंच गया। इस दौरान निजी क्षेत्र की लैंको परियोजना से भी 450 मेगावाट उत्पादन कम किया गया। सोमवार दोपहर तक सूबे में बिजली की मांग 10668 मेगावाट रही। दोपहर तक रिहंद हाइड्रो के चार टरबाइनों से 142 मेगावाट उत्पादन किया जा रहा था।