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Sonebhadra News: बसों में खिड़कियों के टूटे कांच, यात्रियों को लग रही आंच
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परिवहन निगम की अनदेखी व लापरवाही की वजह से जिले में रोडवेज की जर्जर बसे दौड़ रही हैं। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते कई ऐसी बसें चल रही हैं, जो धुआं फेंक रही हैं। कुछ ऐसी बसें है, जिनकी खिड़कियों के कांच (शीशे) टूट गए हैं। पूरा किराया देकर भी यात्री रोडवेज बसों में लू के थपेड़े खा रहे हैं। वहीं खिड़कियों के टूटे कॉच को बदलवाने के लिए अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सोनभद्र डिपो में इस समय कुल 56 बसें हैं। वहीं विंध्यनगर डिपो में 40 से अधिक रोडवेज बसें शामिल हैं। इसके साथ ही मिर्जापुर, काशी, जीरो रोड, प्रयागराज, चारबाग, चंदौली सहित अन्य डिपो की करीब 150 बसें सोनभद्र वाराणसी शक्तिनगर राजमार्ग के साथ ही अन्य प्रमुख मार्गों पर संचालित हो रही हैं। सोनभद्र डिपो में अधिकांश खटारा (कंडम) बसें हैं। इससे आए दिन रास्ते में खराब होती रहती हैं। वहीं जिले से होकर गुजरने वाली विभिन्न डिपो की बसों की मरम्मत के नाम पर भी सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। भीषण गर्मी के बावजूद अभी रोडवेज बस के खिड़कियों के टूटे कांच नहीं बदले जा सके हैं। ऐसे में यात्री फुल किराया देने के बाद भी रोडवेज बसों में लू के थपेड़े खाते हुए सफर कर रहे हैं। सोमवार को दोपहर में राबर्ट्सगंज रोडवेज बस स्टेशन परिसर में दो-तीन संख्या में ऐसी बसें खड़ी थी, जिनके खिड़कियों के कांच टूटे हुए थे। डिपो में कई बसें ऐसी भी है, जिन्हें स्टार्ट करने के लिए धक्का लगाना होता है। परिवहन निगम के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से खटारा बसों का मरम्मत समय से नहीं हो रहा है। सबसे ज्यादा काशी डिपो की बसों में असुविधाएं पाई जा रही हैं।
यात्रियों की परेशानी उनकी जुबानी
रोडवेज बस में यात्रा कर रहे विंध्यनगर एमपी के यात्री सूरज कुमार ने बताया कि जिस बस में वे सफर कर रहे हैं, उसके खिड़की के कॉच टूटे हुए हैं। लू के थपेड़ों से सभी यात्री बेहाल हैं। वहीं राबर्ट्सगंज के रहने वाले यात्री दिनेश का कहना है कि रोडवेज बसों के संचालन में परिवहन निगम के अधिकारियों की लापरवाही साफ दिख रही है। गर्मी के दिनों में बस के खिड़कियों की मरम्मत कराई जानी चाहिए, मगर ऐसा नहीं हुआ। ठंड के दिनों में भी ऐसी दिक्कत होती है।
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खटारा बसों को चिह्नित कर मरम्मत कराया जा रहा है। सोनभद्र डिपो की सभी बसों के खिड़कियों के टूटे कॉच बदलवा दिए गए हैं। इस समय सभी बसें ठीक चल रही हैं। -विश्राम, एआरएम- सोनभद्र डिपो।
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सोनभद्र डिपो में इस समय कुल 56 बसें हैं। वहीं विंध्यनगर डिपो में 40 से अधिक रोडवेज बसें शामिल हैं। इसके साथ ही मिर्जापुर, काशी, जीरो रोड, प्रयागराज, चारबाग, चंदौली सहित अन्य डिपो की करीब 150 बसें सोनभद्र वाराणसी शक्तिनगर राजमार्ग के साथ ही अन्य प्रमुख मार्गों पर संचालित हो रही हैं। सोनभद्र डिपो में अधिकांश खटारा (कंडम) बसें हैं। इससे आए दिन रास्ते में खराब होती रहती हैं। वहीं जिले से होकर गुजरने वाली विभिन्न डिपो की बसों की मरम्मत के नाम पर भी सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। भीषण गर्मी के बावजूद अभी रोडवेज बस के खिड़कियों के टूटे कांच नहीं बदले जा सके हैं। ऐसे में यात्री फुल किराया देने के बाद भी रोडवेज बसों में लू के थपेड़े खाते हुए सफर कर रहे हैं। सोमवार को दोपहर में राबर्ट्सगंज रोडवेज बस स्टेशन परिसर में दो-तीन संख्या में ऐसी बसें खड़ी थी, जिनके खिड़कियों के कांच टूटे हुए थे। डिपो में कई बसें ऐसी भी है, जिन्हें स्टार्ट करने के लिए धक्का लगाना होता है। परिवहन निगम के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से खटारा बसों का मरम्मत समय से नहीं हो रहा है। सबसे ज्यादा काशी डिपो की बसों में असुविधाएं पाई जा रही हैं।
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यात्रियों की परेशानी उनकी जुबानी
रोडवेज बस में यात्रा कर रहे विंध्यनगर एमपी के यात्री सूरज कुमार ने बताया कि जिस बस में वे सफर कर रहे हैं, उसके खिड़की के कॉच टूटे हुए हैं। लू के थपेड़ों से सभी यात्री बेहाल हैं। वहीं राबर्ट्सगंज के रहने वाले यात्री दिनेश का कहना है कि रोडवेज बसों के संचालन में परिवहन निगम के अधिकारियों की लापरवाही साफ दिख रही है। गर्मी के दिनों में बस के खिड़कियों की मरम्मत कराई जानी चाहिए, मगर ऐसा नहीं हुआ। ठंड के दिनों में भी ऐसी दिक्कत होती है।
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खटारा बसों को चिह्नित कर मरम्मत कराया जा रहा है। सोनभद्र डिपो की सभी बसों के खिड़कियों के टूटे कॉच बदलवा दिए गए हैं। इस समय सभी बसें ठीक चल रही हैं। -विश्राम, एआरएम- सोनभद्र डिपो।