दुद्धी। कोल को जनजाति का दर्जा, वनाधिकार कानून के तहत जंगल की जमीनों पर काबिज आदिवासियों और अन्य वन परंपरागत निवासियों को पट्टा समेत अन्य मुद्दों को लेकर आदिवासी वनवासी महासभा ने मुहिम शुरू की है। यह जानकारी देते हुए पूर्व विधायक विजय सिंह गोंड ने बताया कि दो नवंबर को गोंडवाना भवन दुद्धी में आदिवासी वनवासी अधिकार सम्मेलन होगा। सम्मेलन में जिले भर से आदिवासी प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि वनाधिकार कानून को लागू कर वन भूमि पर पुश्तैनी तौर पर काबिज लोगों को पट्टा दिलाने का मुद्दा सम्मेलन में मजबूती से उठाया जाएगा। जितनी जमीन पर आदिवासी काबिज हैं, उससे बहुत कम भूमि का आवंटन के लिए सत्यापन किया जा रहा है। कोल समुदाय आदिवासी है, लेकिन अनुसूचित जनजाति का दर्जा न देने से यह आदिवासी समुदाय तमाम संवैधानिक अधिकारों से वंचित हैं। उरांव-धांगर, कोरवा, करौई, बादी, मलार, घसिया, गोंड की उपजाति माझी, मझवार व चंदौली जनपद के खरवार, चेरो, पनिका को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाय। आदिवासी वनवासी महासभा के कृपा शंकर पनिका ने बताया कि सम्मेलन में सभी गरीबों को बिना ब्याज का कर्जा, सस्ते दर पर उनके लिए खाद, बीज, पानी और उनके पैदावार की खरीद की गारंटी, वन उपज पर आदिवासियों व वनवासियों एवं ग्राम पंचायतों को अधिकार देने, आदिवासियों समेत सभी वर्ग की लड़कियों के लिए कम से कम दो आवासीय महिला डिग्री कॉलेज, हर ब्लाक में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों का निर्माण आदि की मांग की जाएगी।