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आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के पास होगा फर्स्ट एड बाक्स
Sonbhadra
Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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सोनभद्र। अब अंागनबाड़ी कार्यकत्रियां न सिर्फ गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाएंगी बल्कि गांवों में हल्की-फुल्की बीमारी होने पर उपचार भी कर सकेंगी। इसके लिए कार्यकत्रियों को फर्स्ट एड बाक्स थमाया जाएगा। कार्यकत्रियों को इससे निपटने के लिए दवाइयों के प्रयोग के गुर भी सिखाए जाएंगे। यह पूरी व्यवस्था गर्मी में गांवों में फैलने वाली बीमारियों से निपटने के लिए किया जा रहा है।
अत्यंत पिछड़े, आदिवासी बहुल सोनांचल में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। दुर्गम इलाकों मेें तो संक्रामक बीमारी फैलने की जब तक सूचना मिलती है और स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां तक पहुंचती है तब तक कई की मौत हो चुकी होती है। जंगली इलाकों में आदिवासी चिकित्सकों के अधिक ओझाओं पर विश्वास करते हैं। सभी गांवों तक पहुंचने के लिए सीधा रास्ता न होने की वजह से भी स्वास्थ्य विभाग को गांवों तक पहुंचने में परेशानी होती है। गर्मी के दिनों में पहाड़ी इलाके में पानी की समस्या विकराल हो जाती है। नदियां तालाब सहित अन्य पेयजल स्रोत सूख जाते हैं। लोग चुआड़ों का गंदा पानी पीते हैं। बांध, नाले का दूषित पानी का सेवन करने से गांवों में डायरिया सहित अन्य बीमारियाें का प्रकोप होता है तथा लोग बेमौत मारे जाते हैं। इन्ही समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने रोगों से बचाव के लिए आशा कार्यकत्रियों और एएनएम सेंटरों को एलर्ट किया है। गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में जच्चगी के लिए प्रेरित करने और उन्होंने अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाने वाली आशा कार्यकत्रियों को रोगों से बचाव की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जनपद की सैकड़ों आशा कार्यकत्रियों को फर्स्ट एड बाक्स दिया जा रहा है। इसमें उल्टी, दश्त, हल्का बुखार सहित छोटी मोटी बीमारियों की दवा उपलब्ध है। इससे उनके इलाके में यदि बीमारी फैलने की सूचना मिलती है तो वह पहुंच कर दवा देगी तथा समय से स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करेगी, इससे विभाग समय से रोगों से बचाव कर सकेगा।
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अत्यंत पिछड़े, आदिवासी बहुल सोनांचल में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। दुर्गम इलाकों मेें तो संक्रामक बीमारी फैलने की जब तक सूचना मिलती है और स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां तक पहुंचती है तब तक कई की मौत हो चुकी होती है। जंगली इलाकों में आदिवासी चिकित्सकों के अधिक ओझाओं पर विश्वास करते हैं। सभी गांवों तक पहुंचने के लिए सीधा रास्ता न होने की वजह से भी स्वास्थ्य विभाग को गांवों तक पहुंचने में परेशानी होती है। गर्मी के दिनों में पहाड़ी इलाके में पानी की समस्या विकराल हो जाती है। नदियां तालाब सहित अन्य पेयजल स्रोत सूख जाते हैं। लोग चुआड़ों का गंदा पानी पीते हैं। बांध, नाले का दूषित पानी का सेवन करने से गांवों में डायरिया सहित अन्य बीमारियाें का प्रकोप होता है तथा लोग बेमौत मारे जाते हैं। इन्ही समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने रोगों से बचाव के लिए आशा कार्यकत्रियों और एएनएम सेंटरों को एलर्ट किया है। गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में जच्चगी के लिए प्रेरित करने और उन्होंने अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाने वाली आशा कार्यकत्रियों को रोगों से बचाव की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जनपद की सैकड़ों आशा कार्यकत्रियों को फर्स्ट एड बाक्स दिया जा रहा है। इसमें उल्टी, दश्त, हल्का बुखार सहित छोटी मोटी बीमारियों की दवा उपलब्ध है। इससे उनके इलाके में यदि बीमारी फैलने की सूचना मिलती है तो वह पहुंच कर दवा देगी तथा समय से स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करेगी, इससे विभाग समय से रोगों से बचाव कर सकेगा।
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