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करोड़ों खर्च होने के बाद भी हरियाली नदारद
Sonbhadra
Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
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चुर्क। एक तरफ तो जंगलों में हरियाली बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते लगाए लए लाखों पौधे सूख जा रहे हैं। चुर्क स्थित पौधशाला में पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने से पौधों के अस्तित्व पर संकट आ गया है। सवाल उठता है कि जब पौधे पौधशाला में तैयार ही नहीं होंगे तो विभाग कहां से लगाएगा।
शासन के निर्देश पर हर वर्ष बारिश होते ही शहर, देहात और जंगलों में विशेष अभियान चलाकर पौधरोपण किया जाता है। संबंधित विभागों को पौधरोपण का लक्ष्य भी दिया जाता है। इसके लिए शासन से अलग से बजट भी स्वीकृत होता है। समाजसेवी संस्थाओं से भी मदद ली जाती है। इससे पहले वन और उद्यान विभाग को अपने नर्सरी में पौधे तैयार करने को कहा जाता है जिससे खुद पौधरोपण करने के साथ अन्य विभाग और किसानों को दें। मगर शासन की मंशा पर अधिकारी पानी फेर दे रहे हैं। वन प्रभाग में पौधों की उपलब्धता के लिए चुर्क में वर्ष 2004-05 में नर्सरी की स्थापना की गई। एक हेक्टेयर पौधशाला में 181 क्यारियां बना कर पौध तैयार किए जाते हैं। पौधों की सिंचाई के लिए तीन वर्ष पूर्व पौधशाला के नजदीक ही पहाड़ी नाले पर चेकडैम का निर्माण किया गया। पौधों की सिंचाई के लिए पौधशाला में बोरिंग भी की गई मगर वह जरूरत के मुताबिक काफी कम पानी देता है। वहीं, पिछले वर्ष बारिश के दौरान पहाड़ी नाले के तेज बहाव को चेकडैम नहीं झेल सका और बह गया। चेकडैम निर्माण में कितना घपला हुआ और चेकडैम बहने के कारणों की तह में जाने की बात छोड़ भी दें तो पौधों के अस्तित्व पर संकट आ गया है।
चेकडैम बहने से पौधों को पानी नहीं मिल पा रहा है। पौधशाला के कर्मचारियों का कहना है कि पौधों की सिंचाई के लिए जो बोरिंग की गई वह उससे पौधों की सिंचाई नहीं हो पाती है और न ही कोई विकल्प है।
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शासन के निर्देश पर हर वर्ष बारिश होते ही शहर, देहात और जंगलों में विशेष अभियान चलाकर पौधरोपण किया जाता है। संबंधित विभागों को पौधरोपण का लक्ष्य भी दिया जाता है। इसके लिए शासन से अलग से बजट भी स्वीकृत होता है। समाजसेवी संस्थाओं से भी मदद ली जाती है। इससे पहले वन और उद्यान विभाग को अपने नर्सरी में पौधे तैयार करने को कहा जाता है जिससे खुद पौधरोपण करने के साथ अन्य विभाग और किसानों को दें। मगर शासन की मंशा पर अधिकारी पानी फेर दे रहे हैं। वन प्रभाग में पौधों की उपलब्धता के लिए चुर्क में वर्ष 2004-05 में नर्सरी की स्थापना की गई। एक हेक्टेयर पौधशाला में 181 क्यारियां बना कर पौध तैयार किए जाते हैं। पौधों की सिंचाई के लिए तीन वर्ष पूर्व पौधशाला के नजदीक ही पहाड़ी नाले पर चेकडैम का निर्माण किया गया। पौधों की सिंचाई के लिए पौधशाला में बोरिंग भी की गई मगर वह जरूरत के मुताबिक काफी कम पानी देता है। वहीं, पिछले वर्ष बारिश के दौरान पहाड़ी नाले के तेज बहाव को चेकडैम नहीं झेल सका और बह गया। चेकडैम निर्माण में कितना घपला हुआ और चेकडैम बहने के कारणों की तह में जाने की बात छोड़ भी दें तो पौधों के अस्तित्व पर संकट आ गया है।
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चेकडैम बहने से पौधों को पानी नहीं मिल पा रहा है। पौधशाला के कर्मचारियों का कहना है कि पौधों की सिंचाई के लिए जो बोरिंग की गई वह उससे पौधों की सिंचाई नहीं हो पाती है और न ही कोई विकल्प है।
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