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चटख हो रहा कोयले का अवैध धंधा
Sonbhadra
Updated Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
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अनपरा (संवाददाता)। ऊर्जांचल में धीमे ही सही अवैध कोयले के कारोबार का धंधा एक बार फिर चटख होने को है। पूर्व में इस गोरखधंधे का स्वाद चख चुके लोग फिर व्यवस्था को अपने पक्ष में करने में जुटे हैं। स्थानीय लोगों पर एतबार करें तो रोजाना कुछ गाड़ियां वाराणसी की ओर रुख कर रही हैं।
बता दें कि ऊर्जांचल में जुलाई 2009 जुलाई से पूर्व धड़ल्ले से कोयला चोरी होती थी। कोयला परियोजनाओं के यार्ड से लेकर चलती ट्रेनों तक कोयला माफियाओं का जाल बिछा था। लंबी शिकायतों के बाद जुलाई 2009 में सीबीआई की लखनऊ की टीम ने आधी रात को छापा मारकर ऊर्जांचल में अरबों की कोयला चोरी प्रकरण का भंडाफोड़ किया। इससे समूचा तंत्र हिल गया। इसके बाद कोयला चोरी में संलिप्त लोग भूमिगत हो गए। सिंगरौली से लेकर चंदौली जिले के चंधासी तक इस धंधे पर सियापा छा गया। धंधा ठप हुआ तो बड़ी तादाद में लोग बेरोजगार भी हुए। बिहार से लेकर उड़ीसा तक के श्रमिक दूसरे धंधे की ओर उन्मुख हुए। ऊर्जांचल में कहा जाने लगा कि अब यह धंधा फिर कभी शुरू नहीं हो पाएगा। लेकिन लोगों की आशंकाएं गलत साबित हुईं। इस धंधे का स्वाद चख चुके लोग न केवल इसे फिर से इसे शुरू कराने में जुट गए हैं अपितु सिंगरौली से अनपरा के रास्ते कई गाड़ियां कोयला लेकर गैर जनपदों की ओर कूच करने लगी हैं। लोगों के मुताबिक धंधा पुलिस के संरक्षण में हो रहा अथवा नहीं यह तो नहीं कह सकते, लेकिन अगर गाड़ियां चल रही हैं तो मामला संदिग्ध है।
गौरतलब हो कि पखवारे भर पहले निजी सुरक्षाकर्मियों ने एक डंपर चोरी का कोयला पकड़ा था जिसे चालक छोड़कर भाग गया। सुरक्षाकर्मियों ने कोयला सहित डंपर पुलिस को सौंप दिया था। दो मई की रात मोरवा पुलिस ने रेलवे साइडिंग से चोरी का कोयला लोड हाइवा पकड़ा और कोयला सहित वाहन सीज कर चालक का चालान कर दिया।
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बता दें कि ऊर्जांचल में जुलाई 2009 जुलाई से पूर्व धड़ल्ले से कोयला चोरी होती थी। कोयला परियोजनाओं के यार्ड से लेकर चलती ट्रेनों तक कोयला माफियाओं का जाल बिछा था। लंबी शिकायतों के बाद जुलाई 2009 में सीबीआई की लखनऊ की टीम ने आधी रात को छापा मारकर ऊर्जांचल में अरबों की कोयला चोरी प्रकरण का भंडाफोड़ किया। इससे समूचा तंत्र हिल गया। इसके बाद कोयला चोरी में संलिप्त लोग भूमिगत हो गए। सिंगरौली से लेकर चंदौली जिले के चंधासी तक इस धंधे पर सियापा छा गया। धंधा ठप हुआ तो बड़ी तादाद में लोग बेरोजगार भी हुए। बिहार से लेकर उड़ीसा तक के श्रमिक दूसरे धंधे की ओर उन्मुख हुए। ऊर्जांचल में कहा जाने लगा कि अब यह धंधा फिर कभी शुरू नहीं हो पाएगा। लेकिन लोगों की आशंकाएं गलत साबित हुईं। इस धंधे का स्वाद चख चुके लोग न केवल इसे फिर से इसे शुरू कराने में जुट गए हैं अपितु सिंगरौली से अनपरा के रास्ते कई गाड़ियां कोयला लेकर गैर जनपदों की ओर कूच करने लगी हैं। लोगों के मुताबिक धंधा पुलिस के संरक्षण में हो रहा अथवा नहीं यह तो नहीं कह सकते, लेकिन अगर गाड़ियां चल रही हैं तो मामला संदिग्ध है।
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गौरतलब हो कि पखवारे भर पहले निजी सुरक्षाकर्मियों ने एक डंपर चोरी का कोयला पकड़ा था जिसे चालक छोड़कर भाग गया। सुरक्षाकर्मियों ने कोयला सहित डंपर पुलिस को सौंप दिया था। दो मई की रात मोरवा पुलिस ने रेलवे साइडिंग से चोरी का कोयला लोड हाइवा पकड़ा और कोयला सहित वाहन सीज कर चालक का चालान कर दिया।
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