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रमजान में मांगी जा रही देश की खुशहाली एवं तरक्की की दुआ
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बीजपुर। रमजान का पवित्र महीना शुरू होते ही मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रख नमाज अदा कर देश की खुशहाली एवं तरक्की के लिये जहां दुआ कर रहे हैं वही मस्जिदों में लोगों को मतदान के लिए भी प्रेरित कर रहे।
रोजेदारों ने बताया कि मस्जिदों और घरों से कुरान शरीफ की तिलावत की आवाज आनी शुरू हो जाती है। जिस तरह नमाज पढ़ना हर मुसलमान के लिए फर्ज है उसी तरह रोजे रखना भी खुदा ने फर्ज करार दिया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। शांतिनगर स्थित मज्जिद पर रोजेदार हर रोज नमाज अदा कर देश में अनैन चैन की दुआ मांगी जा रही है रोजेदारों द्वारा पाक महीने में मांगी गयी दुआ अल्हा ताला जरूर पूरी करते है साथ ही मस्जिद से लोकसभा में शत प्रतिशत मतदान के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। इस पाक महीने को रहमतों का महीना कहा जाता है। प्यास की शिद्दत, भूख की तड़प, गर्मी की तपिश होने के बाद भी एक-एक रोजेदार खुदा का शुक्रिया अदा करता है। रूह को पाक करके अल्लाह के करीब जाने का मौका देने वाला रमजान का मुकद्दस महीना हर इंसान को अपनी जिंदगी को सही राह पर लाने का पैगाम देता है इसी की तरबीयत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है और यही रमजान माह की खासियत भी है। रमजान का मकसद खुद को गलत काम करने से रोकने की ताकत पैदा करना या उसे फिर से जिंदा करना है। खुद को गलत कामों से रोकने की ताकत को शरीअत में तकवा कहा गया है जिसमें इंसान खुद को रोक लेता है। रोजेदार को सख्त प्यास लगी होती है लेकिन वो खुद को रोक लेता है। गलत बात होने के बावजूद खुद को गुस्सा होने से रोकता है। झूठ बोलने और बदनिगाही से परहेज करता है।
रोजेदारों ने बताया कि मस्जिदों और घरों से कुरान शरीफ की तिलावत की आवाज आनी शुरू हो जाती है। जिस तरह नमाज पढ़ना हर मुसलमान के लिए फर्ज है उसी तरह रोजे रखना भी खुदा ने फर्ज करार दिया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। शांतिनगर स्थित मज्जिद पर रोजेदार हर रोज नमाज अदा कर देश में अनैन चैन की दुआ मांगी जा रही है रोजेदारों द्वारा पाक महीने में मांगी गयी दुआ अल्हा ताला जरूर पूरी करते है साथ ही मस्जिद से लोकसभा में शत प्रतिशत मतदान के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। इस पाक महीने को रहमतों का महीना कहा जाता है। प्यास की शिद्दत, भूख की तड़प, गर्मी की तपिश होने के बाद भी एक-एक रोजेदार खुदा का शुक्रिया अदा करता है। रूह को पाक करके अल्लाह के करीब जाने का मौका देने वाला रमजान का मुकद्दस महीना हर इंसान को अपनी जिंदगी को सही राह पर लाने का पैगाम देता है इसी की तरबीयत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है और यही रमजान माह की खासियत भी है। रमजान का मकसद खुद को गलत काम करने से रोकने की ताकत पैदा करना या उसे फिर से जिंदा करना है। खुद को गलत कामों से रोकने की ताकत को शरीअत में तकवा कहा गया है जिसमें इंसान खुद को रोक लेता है। रोजेदार को सख्त प्यास लगी होती है लेकिन वो खुद को रोक लेता है। गलत बात होने के बावजूद खुद को गुस्सा होने से रोकता है। झूठ बोलने और बदनिगाही से परहेज करता है।
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