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मेला नीलामी राशि के निकासी पर रोक
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शक्तिनगर। ज्वालामुखी मंदिर परिसर पर लगने वाले पाक्षिक मेले की जमा राशि निकालने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया है। मामले की सुनवाई एक अप्रैल को कोर्ट की डबल बेंच ने किया था। शुक्रवार शाम को आर्डर अपलोड होने के बाद यह सार्वजनिक हुआ।
मंदिर के पुजारी हेमंत मिश्र ने 16 मार्च को डीएम सोनभद्र को पत्र देकर अवगत कराया था कि एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा भूमि अधिग्रहण के बाद चिल्काडांड ग्राम पंचायत व राजस्व विभाग की कोई भूमि शेष नहीं है। ज्वालामुखी मंदिर के नाम गाटा संख्या 536/ 0152 रकवा दर्ज है। उल्लेखित रकवे पर ज्वालामुखी देवी विराजमान है। ऐसे में ग्राम पंचायत या राजस्व विभाग द्वारा कोई मेला नीलामी, तहबजारी/ वसूली विधि व्यवस्था के खिलाफ है। ऐसे में जब ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग के नाम पर मंदिर के आसपास कोई भूमि दर्ज नहीं तो मेला नीलामी कराना गैर कानूनी होगा। इस पर रोक लगाई जाए। मंदिर पुजारी श्री मिश्र की आपत्ति पर डीएम ने कोई निर्णय नहीं दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। प्रकरण की सुनवाई एक अप्रैल को जज प्रदीप कुमार सिंह बघेल व पंकज भाटिया ने किया। वादी के पक्ष को सुनने के बाद कोर्ट ने मेला नीलाम की राशि 12 लाख 52 हजार को आहरित करने पर रोक लगाते हुए आदेश पारित किया कि इस राशि को राजस्व विभाग के खाते से अलग एक नया खाता में डाला जाए और जब तक मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाए तब तक इसकी निकासी नहीं की जाए। बताते चले कि मेले की नीलामी 28 मार्च को तहसीलदार दुद्धी की मौजूदगी में संपन्न कराई गई थी। 12 लाख 52 हजार की सर्वाधिक बोली लगाने वाले मंजय शाह के पक्ष में ठेका फाइनल किया गया था। हाईकोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई नौ मई को होगी।
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मंदिर के पुजारी हेमंत मिश्र ने 16 मार्च को डीएम सोनभद्र को पत्र देकर अवगत कराया था कि एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा भूमि अधिग्रहण के बाद चिल्काडांड ग्राम पंचायत व राजस्व विभाग की कोई भूमि शेष नहीं है। ज्वालामुखी मंदिर के नाम गाटा संख्या 536/ 0152 रकवा दर्ज है। उल्लेखित रकवे पर ज्वालामुखी देवी विराजमान है। ऐसे में ग्राम पंचायत या राजस्व विभाग द्वारा कोई मेला नीलामी, तहबजारी/ वसूली विधि व्यवस्था के खिलाफ है। ऐसे में जब ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग के नाम पर मंदिर के आसपास कोई भूमि दर्ज नहीं तो मेला नीलामी कराना गैर कानूनी होगा। इस पर रोक लगाई जाए। मंदिर पुजारी श्री मिश्र की आपत्ति पर डीएम ने कोई निर्णय नहीं दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। प्रकरण की सुनवाई एक अप्रैल को जज प्रदीप कुमार सिंह बघेल व पंकज भाटिया ने किया। वादी के पक्ष को सुनने के बाद कोर्ट ने मेला नीलाम की राशि 12 लाख 52 हजार को आहरित करने पर रोक लगाते हुए आदेश पारित किया कि इस राशि को राजस्व विभाग के खाते से अलग एक नया खाता में डाला जाए और जब तक मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाए तब तक इसकी निकासी नहीं की जाए। बताते चले कि मेले की नीलामी 28 मार्च को तहसीलदार दुद्धी की मौजूदगी में संपन्न कराई गई थी। 12 लाख 52 हजार की सर्वाधिक बोली लगाने वाले मंजय शाह के पक्ष में ठेका फाइनल किया गया था। हाईकोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई नौ मई को होगी।
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