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एनटीपीसी रिहंद का चालू वितीय वर्ष है उपलब्धियों भरा
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बीजपुर। एनटीपीसी रिहंद मुख्य महाप्रबंधक ए के मुखर्जी ने कहा कि परियोजना के कर्मियों एवं अधिकारियों में विषम से विषम परिस्थितियों में भी चुनौती स्वीकार करने की क्षमता है। रिहंद परियोजना आज 3000 मेगावाट बिजली उत्पादन विभिन्न उपलब्धियों के साथ कर रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में रिहंद परियोजना उपलब्धियों से भरा रहा।
वह शुक्रवार को शिवालिक अतिथि गृह में पत्रकार वार्ता में संबोधित कर रहे थे। कहा कि प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के माध्यम से ग्रामीण नव युवकों एवं युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सीएसआर विभाग सदैव प्रयासरत है। परियोजना को बेहतर कार्यों के प्रदर्शन के लिए एक्सिलेंस एवार्ड भी मिला है। राख उपयोग की दिशा में भी परियोजना का प्रयास सराहनीय है, जो 32 प्रतिशत लक्ष्य के सापेक्ष 35 प्रतिशत उपयोग किया जा चुका है। पत्रकारों के एफजीडी के बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि यह कार्य 2022 तक पूरा कर लिए जाने की संभावना है। पानी की बचत के संदर्भ में भी मुखर्जी ने विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए उस पर प्रकाश डाला। कहा कि परियोजना के विस्तारीकरण के संदर्भ में 800 मेगावाट यूनिट के निर्माण के लिए भी प्रपोजल भेजा जा चुका है। सहायक प्रबंधक जनसंपर्क एवं राजभाषा अधिकारी मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव के सौजन्य से साहित्य के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की प्रशंसा की। इस अवसर पर महाप्रबंधक रंजन कुमार, महाप्रबंधक जीसी चौकसे, महाप्रबंधक एम रमेश, महाप्रबंधक एके चट्टोपाध्याय, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रेनू सक्सेना, अपर महाप्रबंधक ई नंद किशोर, अपर महाप्रबंधक वेद प्रकाश, अपर महाप्रबंधक हरेराम सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक अनिल कुमार आदि मौजूद रहे।
रेलवे बैंगन से होगी राख की ट्रांसपोर्टिंग
अनपरा। महाप्रबंधक ए के मुखर्जी ने ने कहा कि विद्युत गृहों के लिए राख का प्रयोग किसी चुनौती से कम नहीं है। राख को अधिक से अधिक प्रयोग में लाने के लिए सभी विद्युत गृह नए-नए एक्शन प्लान बना रहे हैं। एनटीपीसी रिहंद भी राख के डिस्पोजल के लिए भारत में नई पहल करते हुए राख को रेल बैंगन से सीमेंट फैक्ट्रियों को भेजने के प्रयास में जुट गया है। बताया कि रेलवे बैंगन से राख सीमेंट फैक्ट्रियों को भेजने के लिए रेलवे विभाग से एएमओयू किया गया है। जल्द ही इस कार्य को मूर्त रूप दिया जाएगा।
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वह शुक्रवार को शिवालिक अतिथि गृह में पत्रकार वार्ता में संबोधित कर रहे थे। कहा कि प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के माध्यम से ग्रामीण नव युवकों एवं युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सीएसआर विभाग सदैव प्रयासरत है। परियोजना को बेहतर कार्यों के प्रदर्शन के लिए एक्सिलेंस एवार्ड भी मिला है। राख उपयोग की दिशा में भी परियोजना का प्रयास सराहनीय है, जो 32 प्रतिशत लक्ष्य के सापेक्ष 35 प्रतिशत उपयोग किया जा चुका है। पत्रकारों के एफजीडी के बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि यह कार्य 2022 तक पूरा कर लिए जाने की संभावना है। पानी की बचत के संदर्भ में भी मुखर्जी ने विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए उस पर प्रकाश डाला। कहा कि परियोजना के विस्तारीकरण के संदर्भ में 800 मेगावाट यूनिट के निर्माण के लिए भी प्रपोजल भेजा जा चुका है। सहायक प्रबंधक जनसंपर्क एवं राजभाषा अधिकारी मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव के सौजन्य से साहित्य के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की प्रशंसा की। इस अवसर पर महाप्रबंधक रंजन कुमार, महाप्रबंधक जीसी चौकसे, महाप्रबंधक एम रमेश, महाप्रबंधक एके चट्टोपाध्याय, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रेनू सक्सेना, अपर महाप्रबंधक ई नंद किशोर, अपर महाप्रबंधक वेद प्रकाश, अपर महाप्रबंधक हरेराम सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक अनिल कुमार आदि मौजूद रहे।
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रेलवे बैंगन से होगी राख की ट्रांसपोर्टिंग
अनपरा। महाप्रबंधक ए के मुखर्जी ने ने कहा कि विद्युत गृहों के लिए राख का प्रयोग किसी चुनौती से कम नहीं है। राख को अधिक से अधिक प्रयोग में लाने के लिए सभी विद्युत गृह नए-नए एक्शन प्लान बना रहे हैं। एनटीपीसी रिहंद भी राख के डिस्पोजल के लिए भारत में नई पहल करते हुए राख को रेल बैंगन से सीमेंट फैक्ट्रियों को भेजने के प्रयास में जुट गया है। बताया कि रेलवे बैंगन से राख सीमेंट फैक्ट्रियों को भेजने के लिए रेलवे विभाग से एएमओयू किया गया है। जल्द ही इस कार्य को मूर्त रूप दिया जाएगा।
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