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फारेस्ट गार्ड का फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर पहुंचे चार युवक
Updated Sat, 04 Aug 2018 11:56 PM IST
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सोनभद्र। सोनभद्र वन प्रभाग के छपका स्थित कार्यालय में शनिवार सुबह चार युवक फारेस्ट गार्ड का फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर ज्वाइन करने पहुंच गए। यहां के प्रधान सहायक ने अधिकारियों से इसको लेकर जानकारी हासिल करने के बाद, पत्र फर्जी होने की जानकारी दी तो वह वहां से खिसक लिए। एक का नियुक्ति पत्र टेबल पर ही रह गया, जिसे विभाग ने कब्जे में ले लिया है।
मुरादाबाद जिला निवासी व्यक्ति के नाम से जारी नियुक्ति पत्र को गत 27 जुलाई को कार्यालय चीफ पर्सनल आफिसर फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट मासन रोड, एफआरआई, देहरादून, उत्तराखंड से जारी होना दिखाया गया है। पत्र में सबसे ऊपर पर्यावरण एवं वन विभाग का लोगो भी बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि वन विभाग में नियुक्ति के नाम पर ठगी का बड़ा रैकेट चल रहा है। एक साल पूर्व भी दो युवक सोनभद्र वन प्रभाग कार्यालय में फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर ज्वाइन करने पहुंचे थे, जिन्हें पुलिस के हवाले करते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई लेकिन रैकेट पकड़ में नहीं आया। छह माह पूर्व एक युवती भी ऐसा ही नियुक्ति पत्र लेकर पहुंची, जिसे भी जब सही तथ्य की जानकारी हुई तो वह लौट गई। इस संबंध में डीएफओ मूल चंद ने कहा कि लेटर में ट्रेनिंग के लिए भेजे जाने की बात अंकित है। जबकि सोनभद्र में कोई ट्रेनिंग सेंटर है ही नहीं। जैसे ही मामले की जानकारी हुई मैंने उन सभी को रुकने के लिए कहा लेकिन जब तक मैं दफ्तर पहुंचता वे भाग निकले। लेटर देखने से भी सही नहीं लग रहा है।
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मुरादाबाद जिला निवासी व्यक्ति के नाम से जारी नियुक्ति पत्र को गत 27 जुलाई को कार्यालय चीफ पर्सनल आफिसर फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट मासन रोड, एफआरआई, देहरादून, उत्तराखंड से जारी होना दिखाया गया है। पत्र में सबसे ऊपर पर्यावरण एवं वन विभाग का लोगो भी बना हुआ है।
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उल्लेखनीय है कि वन विभाग में नियुक्ति के नाम पर ठगी का बड़ा रैकेट चल रहा है। एक साल पूर्व भी दो युवक सोनभद्र वन प्रभाग कार्यालय में फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर ज्वाइन करने पहुंचे थे, जिन्हें पुलिस के हवाले करते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई लेकिन रैकेट पकड़ में नहीं आया। छह माह पूर्व एक युवती भी ऐसा ही नियुक्ति पत्र लेकर पहुंची, जिसे भी जब सही तथ्य की जानकारी हुई तो वह लौट गई। इस संबंध में डीएफओ मूल चंद ने कहा कि लेटर में ट्रेनिंग के लिए भेजे जाने की बात अंकित है। जबकि सोनभद्र में कोई ट्रेनिंग सेंटर है ही नहीं। जैसे ही मामले की जानकारी हुई मैंने उन सभी को रुकने के लिए कहा लेकिन जब तक मैं दफ्तर पहुंचता वे भाग निकले। लेटर देखने से भी सही नहीं लग रहा है।
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