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Sonebhadra News: एक साल में बदले जाने थे 500 किमी जर्जर तार, दो साल में 430 किमी हुआ काम

Sat, 08 Nov 2025 01:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 08 Nov 2025 01:27 AM IST
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500 km of worn-out wires were to be replaced in one year, but 430 km of work was completed in two years.
रॉबर्ट्सगंज न्यू कालोनी रोड पर जर्जर विद्युत पोल। संवाद
सोनभद्र। नगर में जर्जर तारों और खंभों को बदलने की कवायद पिछले चार साल से चल रही है। रिवैंप योजना के तहत सर्वे के बाद काम भी शुरू कराया गया था। दो बार मियाद बढ़ाई गई। इसके बावजूद मुख्य बाजार और आबादी वाले इलाकों में जर्जर तार नहीं बदले जा सके। रॉबर्ट्सगंज डिविजन में करीब 500 किमी जर्जर तार बदले जाने थे, लेकिन अभी 430 किमी ही काम हो पाया है।
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पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत रॉबर्ट्सगंज विद्युत वितरण क्षेत्र में कुल 42 फीडर है। इनमें से 36 फीडरों में आठ हजार से अधिक एलटी लाइन के खंभे लगाए जाने थे। इसके सापेक्ष अब तक 7420 खंभे बदले जा चुके हैं। वहीं 500 किमी से अधिक के तार बदले जाने थे, इसके मुकाबले 430 किमी के जर्जर तारों को बदला गया है। इसी तरह इन फीडरों से जुड़े इलाकों में 11 हजार लाइन के करीब 1900 से अधिक जर्जर खंभे चिह्नित किए गए थे, इसके सापेक्ष अब तक सिर्फ 1842 खंभे ही बदले गए हैं। 11 हजार के जर्जर तारों को बदलने का काम भी सुस्त है। अब तक 505 किमी ही तारों को बदला जा सका है। वहीं इन इलाकों में 33 केवी लाइन के जर्जर तारों को बदलते हुए 93 बिजली के खंभे लगाए गए हैं। 11 मीटर ऊंचे लोहे के खंभे लगाए गए हैं। रॉबर्ट्सगंज नगर के साथ ही पन्नूगंज, कुसुम्हा सहित अन्य विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े गांवों में चार से पांच दशक पुराने लगे जर्जर तार व खंभों को अभी तक बदला नहीं जा सका है। करीब दो साल पहले शुरू हुए जर्जर तार व खंभों को बदलने का काम पिछले साल दिसंबर तक ही पूरा किया जाना था। मगर बिजली निगम के अधिकारियों की मानें तो अभी तक सिर्फ 80 फीसदी ही कार्य पूरा हुआ है। जिले के कुसुम्हा, पन्नूगंज, जमगाई, रामपुर फीडर समेत अन्य इलाकों में अभी जर्जर तारों को नहीं बदला जा सका है। जबकि इन इलाकों में जर्जर तारों के टूटने से पूर्व में हादसे भी हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महज आठ से दस फीट की ऊंचाई पर हाईटेंशन तार ढीले होकर नीचे लटक रहे हैं। जर्जर तार व खंभों को बदलने में लापरवाही बरती जा रही है।
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शहरी क्षेत्र में बांस बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति
रॉबर्ट्सगंज नगर के संतनगर इलाके, अकड़हवा पोखरा के पीछे वाले इलाके में बांस बल्ली के सहारे आज भी बिजली के तार खीचें गए हैं। बांस के सहारे करीब 400 मीटर की दूरी तक बिजली के तार खींचे गए हैं। अंबेडकर नगर, न्यू कॉलोनी और ब्रह्मनगर में कई स्थानों पर कम ऊंचाई पर हाईटेंशन तार लटक रहा है। महिला थाना के पास लगा बिजली का खंभा टेढ़ा हो गया है। भारी वाहनों के आवागमन के दौरान हाईटेंशन तार ऊपर छू जाने से हादसा होने का डर बना रहता है। न्यू कॉलोनी में हरदा बाबा मंदिर के पास ट्रांसफार्मर लगा बिजली का खंभा टेढ़ा हो गया है, वहीं बिजली के तार आठ फीट की ऊंचाई पर लटक रहा है। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। नगर क्षेत्र में जर्जर खंभे व तारों को बदलने का कार्य कुछ इलाकों तक ही सिमट कर रह गया है।
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जर्जर तारों की वजह से यहां हो चुके हैं हादसे
नगर से सटे बरकरा गांव में दो साल पहले जर्जर हाईंटेशन का तार टूटने की वजह से एक किसान की मौत हो गई थी। इसी तरह से हरिहरपुर गांव, मधकपुर गांव में हादसे हो चुके हैं। कई स्थानों पर स्टेवायर में करंट उतरने की शिकायत रहती है, बावजूद इसके समस्या के समाधान पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे पहले पटवध गांव में अमिला मोड़ के पास टूटे एलटी तार की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई थी। कोन थाना क्षेत्र के चेरवाडीह गांव में हाइटेंशन तार टूट कर खेत में गिरने से एक किसान मर गया था।


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वर्जन:

बिजली के तार और खंभे बदले जा रहे हैं। कार्यदायी संस्था को जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। करीब 80 से 85 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। रॉबर्ट्सगंज के बचे इलाकों में बांस-बल्ली की जगह खंभे लगाए जाएंगे। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। - एसबी ठाकुर, एक्सईएन, रॉबर्ट्सगंज।
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