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दलितों के लिए स्वरोजगार के खुले दरवाजे
Updated Tue, 07 Aug 2018 11:56 PM IST
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सोनभद्र। आजादी के 70 साल के इतिहास में पहली बार देश में दलितों के आर्थिक सशक्तिकरण का एजेंडा आया। प्रधानमंत्री के इस एजेंडे से दलित रोजगार की ओर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री की मंशा है कि दलित रोजगार को लेकर पलायन न करें, बल्कि वह अपने ही आसपास के इलाकों में स्वरोजगार करें।
यह बातें प्रदेश के अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड के चेयरमैन व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री लालजी प्रसाद निर्मल ने लोक निर्माण विभाग अतिथि गृह में मंगलवार को प्रेसवार्ता में कहीं।
उन्होंने कहा कि दलितों को उद्योग धंधे स्थापित करने के लिए हर संभव मदद की जा रही है। उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत बैंक की प्रत्येक शाखाएं एक दलित और महिला को 10 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये ऋण देकर मदद कर रही है। प्रदेश में हाथ से मैला उठाने वाले 11225 लोगों को चिन्हित कर लिया गया है और इसके सापेक्ष 9952 परिवारों को लाभान्वित कर दिया गया है। उन्हें स्वरोजगार के लिए अलग से एक करोड़ 58 लाख रुपये अनुदान की राशि भी अवमुक्त की गई है। ऐसे लोगों के स्थाई रूप से पुनर्वास की कोशिश की जा रही हैग। आर्थिक रूप से कमजोर दलितों के लिए कौशल वृद्धि प्रशिक्षण योजना के तहत ट्रेलरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, ब्यूटीपार्लर, एयर कंडीशन मरम्मत, डिजिटल वीडियोग्राफी, इलेक्ट्रानिक कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए 65 करोड़ रुपये का बजट का प्राविधान किया गया है। इस मौके पर विधायक सदर भूपेश चैबे, अजीत चौबे, संतोष शुक्ला, सुनील सिंह, अशोक मौर्या, विनोद मौर्या, प्रदीप अग्रवाल मौजूद रहे।
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यह बातें प्रदेश के अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड के चेयरमैन व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री लालजी प्रसाद निर्मल ने लोक निर्माण विभाग अतिथि गृह में मंगलवार को प्रेसवार्ता में कहीं।
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उन्होंने कहा कि दलितों को उद्योग धंधे स्थापित करने के लिए हर संभव मदद की जा रही है। उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत बैंक की प्रत्येक शाखाएं एक दलित और महिला को 10 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये ऋण देकर मदद कर रही है। प्रदेश में हाथ से मैला उठाने वाले 11225 लोगों को चिन्हित कर लिया गया है और इसके सापेक्ष 9952 परिवारों को लाभान्वित कर दिया गया है। उन्हें स्वरोजगार के लिए अलग से एक करोड़ 58 लाख रुपये अनुदान की राशि भी अवमुक्त की गई है। ऐसे लोगों के स्थाई रूप से पुनर्वास की कोशिश की जा रही हैग। आर्थिक रूप से कमजोर दलितों के लिए कौशल वृद्धि प्रशिक्षण योजना के तहत ट्रेलरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, ब्यूटीपार्लर, एयर कंडीशन मरम्मत, डिजिटल वीडियोग्राफी, इलेक्ट्रानिक कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए 65 करोड़ रुपये का बजट का प्राविधान किया गया है। इस मौके पर विधायक सदर भूपेश चैबे, अजीत चौबे, संतोष शुक्ला, सुनील सिंह, अशोक मौर्या, विनोद मौर्या, प्रदीप अग्रवाल मौजूद रहे।
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