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म ंगों के समर्थन में डाक्टरों ने बुलंद की आवाज
Updated Tue, 25 Sep 2018 12:12 AM IST
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सोनभद्र। सातवें वेतन आयोग के क्रम में प्राप्त मूल वेतन का 35 प्रतिशत प्रैक्टिस भत्ता एक जनवरी 2016 से देने समेत अन्य मांगों को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के बैनर तले डॉक्टरों ने आवाज बुलंद की। मांगें पूर्ण न होने पर वृहद आंदोलन करने की चेतावनी दी। डॉक्टरों ने डीएम अमित कुमार सिंह से मिलकर उन्हें सूबे के मुख्यमंत्री के नाम संबोधित मांगपत्र सौंपा।
जिलाध्यक्ष डॉ. केके सिंह ने कहा कि शासन के मंशानुसार कार्य करते हुए डॉक्टर मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दे रहे हैं। बावजूद इसके शासन स्तर से डॉक्टरों के जायज मांगों को पूर्ण नहीं किया जा रहा। इससे चिकित्सकों में निराशा का भाव है। जिला सचिव डॉ. राघवेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि वर्षों से विभागीय प्रोन्नतियां लंबित है। डॉ. वीके सिंह, डॉ. प्रेमनाथ, डॉ. दयाशंकर ने कहा कि विशेष चिकित्सकों को उनकी विशेषता के सापेक्ष वेतन, भत्ते तथा उनकी निशेज्ञता के अनुरूप संसाधन एवं समुचित कार्य दशाएं उपलब्ध कराएं। वित्त सचिव डॉ. अनुराग वर्मा, डॉ केके पांडेय ने कहा कि हमारे संवर्ग को ग्रामीण भत्ता मूल वेतन का 25 प्रतिशत दिया जाए। नोयडा प्राधिकरण की भांति सरकारी चिकित्सकों को वाहन भत्ता अथवा 40 लीटर पेट्रोल/डीजल दिया जाए। महिला उपाध्यक्ष डॉ. केकुमार और डॉ. गीता कुुमार ने कहा कि कार्य के घंटे निर्धारित हो। राजपत्रित अवकाश में केवल इमरजेंसी सेवाएं ही चालू रखी जाए। डॉ. राजेंद्र और डॉ. पीके सिंह, बिडिंग के माध्यम से ढाई लाख रुपये प्रतिमाह पर डॉक्टर रखे जा रहे है, जबकि नियममित चिकित्सकों को सेवा में आने के समय 60 से 70 हजार रुपये दिया जा रहा है। इसका संगठन पुरजोर विरोध करता है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार उनकी जायज मांगों को अविलंब पूर्ण नहीं की तो आने वाले दिनों में वृहद आंदोलन किया जाएगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन, जिला प्रशासन की होगी।
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जिलाध्यक्ष डॉ. केके सिंह ने कहा कि शासन के मंशानुसार कार्य करते हुए डॉक्टर मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दे रहे हैं। बावजूद इसके शासन स्तर से डॉक्टरों के जायज मांगों को पूर्ण नहीं किया जा रहा। इससे चिकित्सकों में निराशा का भाव है। जिला सचिव डॉ. राघवेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि वर्षों से विभागीय प्रोन्नतियां लंबित है। डॉ. वीके सिंह, डॉ. प्रेमनाथ, डॉ. दयाशंकर ने कहा कि विशेष चिकित्सकों को उनकी विशेषता के सापेक्ष वेतन, भत्ते तथा उनकी निशेज्ञता के अनुरूप संसाधन एवं समुचित कार्य दशाएं उपलब्ध कराएं। वित्त सचिव डॉ. अनुराग वर्मा, डॉ केके पांडेय ने कहा कि हमारे संवर्ग को ग्रामीण भत्ता मूल वेतन का 25 प्रतिशत दिया जाए। नोयडा प्राधिकरण की भांति सरकारी चिकित्सकों को वाहन भत्ता अथवा 40 लीटर पेट्रोल/डीजल दिया जाए। महिला उपाध्यक्ष डॉ. केकुमार और डॉ. गीता कुुमार ने कहा कि कार्य के घंटे निर्धारित हो। राजपत्रित अवकाश में केवल इमरजेंसी सेवाएं ही चालू रखी जाए। डॉ. राजेंद्र और डॉ. पीके सिंह, बिडिंग के माध्यम से ढाई लाख रुपये प्रतिमाह पर डॉक्टर रखे जा रहे है, जबकि नियममित चिकित्सकों को सेवा में आने के समय 60 से 70 हजार रुपये दिया जा रहा है। इसका संगठन पुरजोर विरोध करता है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार उनकी जायज मांगों को अविलंब पूर्ण नहीं की तो आने वाले दिनों में वृहद आंदोलन किया जाएगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन, जिला प्रशासन की होगी।
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