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किसानों की आय दो गुनी करने का सरकार है कटिबद्घ
Updated Wed, 10 Oct 2018 11:28 PM IST
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सोनभद्र। विकास भवन में पंचायत विभाग के सभागार में जलाशय मत्सिकी विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण बुुधवार से शुरू हो गया। सांसद छोटेलाल खरवार ने फीता काटकर प्रशिक्षण का शुभारंभ किया। यहां सांसद ने कहा कि वर्तमान सरकार किसानों की आय दुगुना करने के लिए कटिबद्ध है। जिन किसानों के पास जहां भी पानी अपने खेत में इकठ्ठा हो रहा है, वहीं पर मत्स्य विभाग से संपर्क कर समय से मत्स्यबीज संचय कर लें।
उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन कभी भी घाटे का सौदा नहीं होता है। जहां पर वर्ष भर पानी रहता है, वहां 70 एमएम से 100 एमएम के मत्स्य बीज संचय करें तथा जिस स्थान पर मात्र तीन से चार मीटर पानी रहता है, वहां पर आठ से दस एमएम का मत्स्य बीज संचय करें। तीन माह बाद बडे़ किसानों जिनके खेतों, तालाबों में वर्ष भर पानी रहता है, उन्हें मछली का बडे़ साइज के बच्चे बेच कर फायदा लिया जा सकता है। जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि सभी किसान कृषि विभाग से पंजीकरण प्रत्येक दशा में करा लें, जिससे जो भी छूट की योजना आए भविष्य में लिया जा सकता है। उप कृषि निदेषक भी तालाबों के भीते पर सब्जी की खेती तथा वृक्षा रोपड़ का कार्य कर अपनी आय में वृद्धि किया जा सकता है। प्रशिक्षण का संचालन सहायक निदेशक मत्स्य विजयपाल ने बताया कि किसान मछली पालन के क्षेत्र में तीन तरह से व्यवसाय या पालन किया जा सकता है। मछली के बच्चों को पालकर किसान तनी माह में अच्छी आय प्राप्त कर सकता है। इसलिए जिन किसानों के खेत में तीन से चार माह तक पानी रहता है, बरसात से पूर्व खेत की जोताई कर गोबर का छिड़कन, 25 कुंतल प्रति हेेक्टेयर की दर से तीन किस्तों में करें। यहां मत्य निरीक्षक आकाश दीप सिंह, आदर्श, ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक ओएन भारती समेत अन्य मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन कभी भी घाटे का सौदा नहीं होता है। जहां पर वर्ष भर पानी रहता है, वहां 70 एमएम से 100 एमएम के मत्स्य बीज संचय करें तथा जिस स्थान पर मात्र तीन से चार मीटर पानी रहता है, वहां पर आठ से दस एमएम का मत्स्य बीज संचय करें। तीन माह बाद बडे़ किसानों जिनके खेतों, तालाबों में वर्ष भर पानी रहता है, उन्हें मछली का बडे़ साइज के बच्चे बेच कर फायदा लिया जा सकता है। जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि सभी किसान कृषि विभाग से पंजीकरण प्रत्येक दशा में करा लें, जिससे जो भी छूट की योजना आए भविष्य में लिया जा सकता है। उप कृषि निदेषक भी तालाबों के भीते पर सब्जी की खेती तथा वृक्षा रोपड़ का कार्य कर अपनी आय में वृद्धि किया जा सकता है। प्रशिक्षण का संचालन सहायक निदेशक मत्स्य विजयपाल ने बताया कि किसान मछली पालन के क्षेत्र में तीन तरह से व्यवसाय या पालन किया जा सकता है। मछली के बच्चों को पालकर किसान तनी माह में अच्छी आय प्राप्त कर सकता है। इसलिए जिन किसानों के खेत में तीन से चार माह तक पानी रहता है, बरसात से पूर्व खेत की जोताई कर गोबर का छिड़कन, 25 कुंतल प्रति हेेक्टेयर की दर से तीन किस्तों में करें। यहां मत्य निरीक्षक आकाश दीप सिंह, आदर्श, ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक ओएन भारती समेत अन्य मौजूद रहे।
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