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रिहंद जलविद्युत गृह से पूरी क्षमता से उत्पादन की कोशिशों को झटका
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:31 PM IST
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सोनभद्र (अनपरा)। रिहंद जल विद्युत गृह से पूर्ण क्षमता से उत्पादन की कोशिशों को झटका लगा है। लंबे समय से अनुरक्षण पर चल रही पचास मेगावाट वाली छठवीं इकाई तीस जून को उत्पादन पर ले ली गई, लेकिन इसी क्षमता की दूसरी इकाई को बारिश के बाद ही उत्पादन पर आने की उम्मीद है। वहीं चौथी इकाई को भी तीस दिन के अनुरक्षण के लिए भेल को सुपुर्द कर दिया गया है।
पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार रिहंद डैम का जलस्तर बेहतर बना हुआ है। वहीं तीन दिन की बारिश में जलस्तर में एक फीट तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। शनिवार को रिहंद बांध का जलस्तर 844.2 फीट दर्ज किया गया। जबकि पिछले साल इसी दिन का जलस्तर 838.2 फीट था। पिछले वर्ष बांध पर बना जल विद्युत गृह की पचास-पचास मेगावाट वाली छह इकाइयों में से तीन के ही उत्पादन पर रहने से हजारों क्यूसेक पानी बेकार बह गया था। जबकि पन बिजली की लागत महज 50 से 60 पैसे प्रति यूनिट पड़ने के कारण इसकी मांग लगातार बनी रहती है। इसको देखते हुए इस बार पन बिजली से बारिश के शुरुआत से ही पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन की तैयारी की गई थी। इस कड़ी में भेल की तरफ से अनुरक्षण के लिए ली गई दूसरी और छठवीं इकाई को हर हाल में जून के अंत तक उत्पादन पर लेने का और चौथी इकाई का तीस दिन का अनुरक्षण पूर्ण कर लेने का दावा किया गया था। बावजूद अब तक महज छठवीं इकाई उत्पादन पर आ सकी। वहीं, चौथी इकाई का तीस दिन का अनुरक्षण बाकी है। उधर, अधीक्षण अभियंता शैलेश सिंह का कहना था कि जल विद्युत गृह से ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हो, इसके लिए प्रयास है। फिलहाल चार इकाइयों से विद्युत उत्पादन लिया जा रहा है। दूसरी इकाई को अक्टूबर तक उत्पादन पर आने की उम्मीद है। चौथी इकाई का तीस दिन का अनुरक्षण होना है, जिसको समय से पूरा करने के लिए भेल पर लगातार दबाव बना हुआ है।
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पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार रिहंद डैम का जलस्तर बेहतर बना हुआ है। वहीं तीन दिन की बारिश में जलस्तर में एक फीट तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। शनिवार को रिहंद बांध का जलस्तर 844.2 फीट दर्ज किया गया। जबकि पिछले साल इसी दिन का जलस्तर 838.2 फीट था। पिछले वर्ष बांध पर बना जल विद्युत गृह की पचास-पचास मेगावाट वाली छह इकाइयों में से तीन के ही उत्पादन पर रहने से हजारों क्यूसेक पानी बेकार बह गया था। जबकि पन बिजली की लागत महज 50 से 60 पैसे प्रति यूनिट पड़ने के कारण इसकी मांग लगातार बनी रहती है। इसको देखते हुए इस बार पन बिजली से बारिश के शुरुआत से ही पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन की तैयारी की गई थी। इस कड़ी में भेल की तरफ से अनुरक्षण के लिए ली गई दूसरी और छठवीं इकाई को हर हाल में जून के अंत तक उत्पादन पर लेने का और चौथी इकाई का तीस दिन का अनुरक्षण पूर्ण कर लेने का दावा किया गया था। बावजूद अब तक महज छठवीं इकाई उत्पादन पर आ सकी। वहीं, चौथी इकाई का तीस दिन का अनुरक्षण बाकी है। उधर, अधीक्षण अभियंता शैलेश सिंह का कहना था कि जल विद्युत गृह से ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हो, इसके लिए प्रयास है। फिलहाल चार इकाइयों से विद्युत उत्पादन लिया जा रहा है। दूसरी इकाई को अक्टूबर तक उत्पादन पर आने की उम्मीद है। चौथी इकाई का तीस दिन का अनुरक्षण होना है, जिसको समय से पूरा करने के लिए भेल पर लगातार दबाव बना हुआ है।
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