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विस्थापितों को मिले 1.56 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
Updated Sat, 03 Oct 2015 12:55 AM IST
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तापीय परियोजना आवासीय परिसर स्थित विदेशी अतिथि गृह में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार शुक्रवार को 24 विस्थापित परिवारों को मुआवजे के रूप में 1.56 करोड़ का चेक वितरित किया गया।
इनके पुनर्वास लाभ का मामला लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ था।
क्षेत्रीय लेखपाल के साथ ही अन्य राजस्व कर्मी, विस्थापितों की अगुवाई कर रहे पंकज मिश्र, हरदेव सिंह, राकेश कुमार बैसवार, मुकेश पांडेय आदि ने चेक वितरण कार्यक्रम में सहभागिता दर्ज कराई। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कुलडोमरी, औड़ी, अनपरा और पिपरी के अब तक 1022 किसानों एवं आश्रितों को राज्य सरकार पुनर्वास लाभ के रूप में 31 करोड़ रुपए वितरित कर चुकी है।
उधर, इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले पंकज मिश्रा के मुताबिक अनपरा तापीय परियोजना के परियोजना प्रभावित परिवारों की संख्या पुनर्वास एवं पुर्नस्थापन नीति 2003 के अनुसार 15 हजार से अधिक है।
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उन्होंने पुनर्वास लाभ के साथ विस्थापित परिवारों को सेवायोजन का भी लाभ दिए जाने की मांग की। बताया कि धारा चार और वर्ग चार की जमीनों का मुआवजा न दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में छह अक्तूबर को सुनवाई की तिथि निर्धारित है।
उम्मीद है कि यह तिथि विस्थापितों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आएगी।
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इनके पुनर्वास लाभ का मामला लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ था।
क्षेत्रीय लेखपाल के साथ ही अन्य राजस्व कर्मी, विस्थापितों की अगुवाई कर रहे पंकज मिश्र, हरदेव सिंह, राकेश कुमार बैसवार, मुकेश पांडेय आदि ने चेक वितरण कार्यक्रम में सहभागिता दर्ज कराई। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कुलडोमरी, औड़ी, अनपरा और पिपरी के अब तक 1022 किसानों एवं आश्रितों को राज्य सरकार पुनर्वास लाभ के रूप में 31 करोड़ रुपए वितरित कर चुकी है।
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उधर, इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले पंकज मिश्रा के मुताबिक अनपरा तापीय परियोजना के परियोजना प्रभावित परिवारों की संख्या पुनर्वास एवं पुर्नस्थापन नीति 2003 के अनुसार 15 हजार से अधिक है।
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उन्होंने पुनर्वास लाभ के साथ विस्थापित परिवारों को सेवायोजन का भी लाभ दिए जाने की मांग की। बताया कि धारा चार और वर्ग चार की जमीनों का मुआवजा न दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में छह अक्तूबर को सुनवाई की तिथि निर्धारित है।
उम्मीद है कि यह तिथि विस्थापितों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आएगी।