{"_id":"6934907f3fee03c42302c7dc","slug":"winning-a-medal-boosted-her-prestige-and-now-she-is-carving-out-her-future-sitapur-news-c-102-1-stp1001-145662-2025-12-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sitapur News: मेडल जीतकर बढ़ाया मान, अब भविष्य तराश रहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sitapur News: मेडल जीतकर बढ़ाया मान, अब भविष्य तराश रहीं
Sun, 07 Dec 2025 01:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 07 Dec 2025 01:52 AM IST
विज्ञापन
सीतापुर। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन करने वाले कई खिलाड़ी अब नई पौध तैयार करने में जुटे हैं। बैडमिंटन खिलाड़ी बैडमिंटन खिलाड़ी चांदनी, सगुंधी, शगुन व आदर्शनी करीब 20 बालक-बालिकाओं को निशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं। ये होनहार स्कूल से आने के बाद महावीर पार्क में शाम को 10 से 15 साल के बालक-बालिकाओं को बैडमिंटन की बारीकियां समझा रही हैं।
बैडमिंटन खिलाड़ी चांदनी ने बताया कि वह इसी साल राज्य स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में तीन गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। राज्य स्तरीय माध्यमिक विद्यालयीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में अंडर 19 में भी सिल्वर मेडल मिला था। इस बीच उनके पिता हरद्वारी का देहांत हो गया। इस घटना से मन पूरी तरह से टूट गया। माता और बड़े भाई ने हौंसला देकर आगे बढ़ाया है। बैडमिंटन खिलाड़ी सुगंधी ने बताया कि उनके पिता मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इसके बावजूद घरवालों की हिम्मत और कोच निखिल रस्तोगी के मार्गदर्शन से ही राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल होने का अवसर मिलता है।
उन्होंने बताया कि मंडल और जनपद स्तर पर तीन गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। राज्य स्तरीय माध्यमिक विद्यालयीय बैडमिंटन प्रतियोगिता खेलने का मौका मिला था। इसी तरह से शगुन और आदर्शनी ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति हमेशा से ही खेल में रोड़ा बनी रहती है। इसके बावजूद हौसला नहीं डिगा। इसलिए हम सभी ने यह निर्णय लिया है कि जो बालक-बालिकाएं आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें बैडमिंटन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाए। स्कूल से छुट्टी होने के बाद हम लोग बालक-बालिकाओं को बैडमिंटन की बारीकियां समझाते हैं।
विज्ञापन
कोच ने नहीं आने दी आर्थिक समस्या
बैडमिंटन खिलाड़ी चांदनी, सगुंधी, शगुन व आदर्शनी ने बताया कि बचपन से ही बैडमिंटन में रूचि रही थी। आर्थिक हालातों के आगे हमेशा बेबस रहते थे। इस पर बैडमिंटन कोच निखिल रस्ताेगी ने मदद की। खेल में कभी भी आर्थिक समस्या नहीं आने दी।
सभी करें यह नेक काम
बैडमिंटन कोच निखिल रस्तोगी ने बताया कि हम अपनी तरफ से जो कर सकते हैं वह कर देते हैं। तरणताल स्टेडियम में इन चारों बालिकाओं की फीस वह स्वयं वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि इस नेक काम में अन्य जिम्मेदारों और सामाजिक संगठनों को भी आगे आना चाहिए। अगर इन्हें थोड़ा सा आर्थिक मजबूती मिल जाए तो ये बालिकाएं देश में नाम रोशन कर सकती हैं। अन्य बच्चों की मजबूरी समझकर यह बालिकाएं उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं।
विज्ञापन
बैडमिंटन खिलाड़ी चांदनी ने बताया कि वह इसी साल राज्य स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में तीन गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। राज्य स्तरीय माध्यमिक विद्यालयीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में अंडर 19 में भी सिल्वर मेडल मिला था। इस बीच उनके पिता हरद्वारी का देहांत हो गया। इस घटना से मन पूरी तरह से टूट गया। माता और बड़े भाई ने हौंसला देकर आगे बढ़ाया है। बैडमिंटन खिलाड़ी सुगंधी ने बताया कि उनके पिता मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इसके बावजूद घरवालों की हिम्मत और कोच निखिल रस्तोगी के मार्गदर्शन से ही राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल होने का अवसर मिलता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि मंडल और जनपद स्तर पर तीन गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। राज्य स्तरीय माध्यमिक विद्यालयीय बैडमिंटन प्रतियोगिता खेलने का मौका मिला था। इसी तरह से शगुन और आदर्शनी ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति हमेशा से ही खेल में रोड़ा बनी रहती है। इसके बावजूद हौसला नहीं डिगा। इसलिए हम सभी ने यह निर्णय लिया है कि जो बालक-बालिकाएं आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें बैडमिंटन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाए। स्कूल से छुट्टी होने के बाद हम लोग बालक-बालिकाओं को बैडमिंटन की बारीकियां समझाते हैं।
विज्ञापन
कोच ने नहीं आने दी आर्थिक समस्या
बैडमिंटन खिलाड़ी चांदनी, सगुंधी, शगुन व आदर्शनी ने बताया कि बचपन से ही बैडमिंटन में रूचि रही थी। आर्थिक हालातों के आगे हमेशा बेबस रहते थे। इस पर बैडमिंटन कोच निखिल रस्ताेगी ने मदद की। खेल में कभी भी आर्थिक समस्या नहीं आने दी।
सभी करें यह नेक काम
बैडमिंटन कोच निखिल रस्तोगी ने बताया कि हम अपनी तरफ से जो कर सकते हैं वह कर देते हैं। तरणताल स्टेडियम में इन चारों बालिकाओं की फीस वह स्वयं वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि इस नेक काम में अन्य जिम्मेदारों और सामाजिक संगठनों को भी आगे आना चाहिए। अगर इन्हें थोड़ा सा आर्थिक मजबूती मिल जाए तो ये बालिकाएं देश में नाम रोशन कर सकती हैं। अन्य बच्चों की मजबूरी समझकर यह बालिकाएं उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं।