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Sitapur News: आचमन लायक भी नहीं काशीकुंड का जल
Sat, 19 Sep 2026 11:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 19 Sep 2026 11:43 PM IST
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नैमिषारण्य। देश भर में पितरों के तर्पण के लिए प्रसिद्ध नैमिष का काशीकुंड इस समय बदहाल है। यहां काईयुक्त दूषित जल स्नान तो दूर आचमन के लायक भी नहीं है। सफाई के अभाव में परिसर गंदगी का शिकार है। पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहे हैं लेकिन काशी कुंड अभी तक उपेक्षित है। हालात ऐसे ही रहे तो यहां श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
देश के जिन तीन स्थानों पर गया पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म किया जाता है, उनमें नैमिष का काशी कुंड भी शामिल है। यह नाभि गया के नाम से विख्यात है। इसलिए पितृ पक्ष में यहां देश-विदेश से हजारों की संख्या में लोग श्राद्ध व पिंड दान करने आते हैं। पिंड दान की क्रिया में सर्वप्रथम सर के बाल मुड़वाकर तीर्थ में स्नान करना आवश्यक होता है। इसके बाद अन्य क्रियाएं की जाती हैं। यहां अब तक सफाई नहीं कराई गई है। तीर्थ के जल में इस कदर काई लगी है कि स्नान तो दूर श्रद्धालु आचमन तक नहीं कर सकते हैं। तीर्थ के आसपास साफ-सफाई के अभाव में झाड़ी व घासफूस उग आई है। परिसर में पेयजल व प्रकाश का भी अभाव है। हालात यही बने रहे तो इन समस्याओं के बीच श्रद्धालुओं को पितृ कार्य करना पड़ सकता है।
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देश के जिन तीन स्थानों पर गया पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म किया जाता है, उनमें नैमिष का काशी कुंड भी शामिल है। यह नाभि गया के नाम से विख्यात है। इसलिए पितृ पक्ष में यहां देश-विदेश से हजारों की संख्या में लोग श्राद्ध व पिंड दान करने आते हैं। पिंड दान की क्रिया में सर्वप्रथम सर के बाल मुड़वाकर तीर्थ में स्नान करना आवश्यक होता है। इसके बाद अन्य क्रियाएं की जाती हैं। यहां अब तक सफाई नहीं कराई गई है। तीर्थ के जल में इस कदर काई लगी है कि स्नान तो दूर श्रद्धालु आचमन तक नहीं कर सकते हैं। तीर्थ के आसपास साफ-सफाई के अभाव में झाड़ी व घासफूस उग आई है। परिसर में पेयजल व प्रकाश का भी अभाव है। हालात यही बने रहे तो इन समस्याओं के बीच श्रद्धालुओं को पितृ कार्य करना पड़ सकता है।
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