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Sitapur News: सपनों के आशियाने पर चलने लगे मजबूरी के हथौड़े
Thu, 24 Aug 2023 10:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 24 Aug 2023 10:03 PM IST
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सीतापुर। जिले के रेउसा इलाके का गौढ़ी गांव दो दिन पहले तक आबाद था। करीब 65 मकानों वाला यह गांव आज उजड़ने की कगार पर है। यहां के 12 बाशिंदों ने अपने सपनों के आशियानों पर हथौड़ा चलाकर खुद उसे ढ़हा दिया है। मकानों की जगह पर खाली जमीन बची है। मलबा लेकर ग्रामीण सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर गए हैं। अन्य लोग भी जान बचाने की जद्दोजहद में पलायन कर रहे हैं।
इस गांव का अस्तित्व पर खतरा मंडराते देख सिंचाई विभाग व प्रशासन की नींद टूटी। गुरुवार को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल, सेवता विधायक के भाई रामेन्द्र तिवारी ने गौढ़ी पहुंचकर हालात का जायजा लिया। अधिशासी अभियंता ने कटान रोकने को काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
सरयू का जलस्तर गुरुवार को 118.60 मीटर पर स्थिर रहा। पानी खतरे के निशान से महज 40 सेमी नीचे बह रहा है। गांजर इलाके में सरयू व शारदा की कटान थमने का नाम नहीं ले रही। रेउसा क्षेत्र का गौढ़ी गांव लहरों के निशाने पर है। यहां गुरुवार को 20 बीघा कृषि योग्य भूमि कटकर फसल समेत नदी में बह गई। सरयू का रौद्र रूप देख गौढ़ी के ग्रामीण अपने हाथों से पक्के घर तोड़कर पलायन कर रहे हैं। गुरुवार को शत्रोहन अपने पक्के मकान पर खुद हथौड़ा चला रहे थे।
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कटान पीड़ितों को दिलाई जाएगी मदद
गौढ़ी में जिन लोगों ने घर तोड़कर पलायन किया है और जिनके खेत कटे हैं, लेखपाल से उन सभी की सूची मांगी गई है। कटान पीड़ितों को शासन से मिलने वाली सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
- पीएल मौर्य, एसडीएम बिसवां
शारदा में समा रहीं बंधे की बोरियां
तंबौर/सीतापुर। रतनगंज में शारदा नदी का कटान गुरुवार को भी जारी रहा। बंधे के किनारे लगी बोरियां नदी में समाती जा रही हैं। बांध बचाने की सिंचाई विभाग लगातार मशक्कत कर रहा है।कटान के डर से रास्ते के किनारे बसे सोहन, हनीफ, शरीफ, अख्तर व सोहराब सहित करीब 20 परिवारों ने मकान खाली कर दिए हैं।
तटबंध पर बाढ़ पीड़ितों के लिए बारिश बनी मुसीबत
रामपुर मथुरा/सीतापुर। तटबंध पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों के लिए पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश मुसीबत बन गई है। तेज बरसात में एक तिरपाल के नीचे परिवार समेत जीवन यापन करता मुश्किल हो रहा है। तटबंध पर रहने वाले मंगम, रामू, नरेश आदि ने बताया कि तिरपाल के नीचे बमुश्किल गृहस्थी का कुछ सामान व एक-दो लोग ही रह सकते हैं। इस समय बरसात के साथ चल रही हवा के कारण पानी अंदर तक पंहुच रहा है। ऐसे में सारा सामान भीग गया है। महमूदाबाद एसडीएम शिखा शुक्ला ने बताया कि लंच पैकेट व खाद्यान्न वितरण केवल बाढ़ आने पर ही किया जाता है। कटान पीड़ितों को आवासीय भूमि देने की प्रक्रिया चल रही है।
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इस गांव का अस्तित्व पर खतरा मंडराते देख सिंचाई विभाग व प्रशासन की नींद टूटी। गुरुवार को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल, सेवता विधायक के भाई रामेन्द्र तिवारी ने गौढ़ी पहुंचकर हालात का जायजा लिया। अधिशासी अभियंता ने कटान रोकने को काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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सरयू का जलस्तर गुरुवार को 118.60 मीटर पर स्थिर रहा। पानी खतरे के निशान से महज 40 सेमी नीचे बह रहा है। गांजर इलाके में सरयू व शारदा की कटान थमने का नाम नहीं ले रही। रेउसा क्षेत्र का गौढ़ी गांव लहरों के निशाने पर है। यहां गुरुवार को 20 बीघा कृषि योग्य भूमि कटकर फसल समेत नदी में बह गई। सरयू का रौद्र रूप देख गौढ़ी के ग्रामीण अपने हाथों से पक्के घर तोड़कर पलायन कर रहे हैं। गुरुवार को शत्रोहन अपने पक्के मकान पर खुद हथौड़ा चला रहे थे।
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कटान पीड़ितों को दिलाई जाएगी मदद
गौढ़ी में जिन लोगों ने घर तोड़कर पलायन किया है और जिनके खेत कटे हैं, लेखपाल से उन सभी की सूची मांगी गई है। कटान पीड़ितों को शासन से मिलने वाली सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
- पीएल मौर्य, एसडीएम बिसवां
शारदा में समा रहीं बंधे की बोरियां
तंबौर/सीतापुर। रतनगंज में शारदा नदी का कटान गुरुवार को भी जारी रहा। बंधे के किनारे लगी बोरियां नदी में समाती जा रही हैं। बांध बचाने की सिंचाई विभाग लगातार मशक्कत कर रहा है।कटान के डर से रास्ते के किनारे बसे सोहन, हनीफ, शरीफ, अख्तर व सोहराब सहित करीब 20 परिवारों ने मकान खाली कर दिए हैं।
तटबंध पर बाढ़ पीड़ितों के लिए बारिश बनी मुसीबत
रामपुर मथुरा/सीतापुर। तटबंध पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों के लिए पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश मुसीबत बन गई है। तेज बरसात में एक तिरपाल के नीचे परिवार समेत जीवन यापन करता मुश्किल हो रहा है। तटबंध पर रहने वाले मंगम, रामू, नरेश आदि ने बताया कि तिरपाल के नीचे बमुश्किल गृहस्थी का कुछ सामान व एक-दो लोग ही रह सकते हैं। इस समय बरसात के साथ चल रही हवा के कारण पानी अंदर तक पंहुच रहा है। ऐसे में सारा सामान भीग गया है। महमूदाबाद एसडीएम शिखा शुक्ला ने बताया कि लंच पैकेट व खाद्यान्न वितरण केवल बाढ़ आने पर ही किया जाता है। कटान पीड़ितों को आवासीय भूमि देने की प्रक्रिया चल रही है।