{"_id":"65a8287f9c6cc8229f08d5c4","slug":"the-community-stopped-hookah-and-water-quenched-their-thirst-by-digging-a-well-sitapur-news-c-102-1-stp1002-8640-2024-01-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sitapur News: बिरादरी ने बंद किया हुक्का-पानी, कुआं खोदकर बुझाई थी प्यास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sitapur News: बिरादरी ने बंद किया हुक्का-पानी, कुआं खोदकर बुझाई थी प्यास
Thu, 18 Jan 2024 12:50 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 18 Jan 2024 12:50 AM IST
विज्ञापन
इमलिया सुल्तानपुर/सीतापुर। राम मंदिर आंदोलन में मुस्लिम समाज के कई लोगों का अहम योगदान रहा है। कारसेवा की अलख जगाने के दौरान इन्हें बिरादरी का विरोध भी झेलना पड़ा। यहां तक कि बिरादरी ने इनका हुक्का-पानी तक बंद कर दिया।
गांव की बाजार से सब्जी और राशन देने को कोई तैयार नहीं होता था। इसके बाद भी इनका हौसला नहीं डिगा। कुंआ खोदकर परिवार की प्यास बुझाई। आज भले गुमनामी का जीवन जी रहे हैं, पर अयोध्या में राम मंदिर बनने से वे भी उतने ही खुश हैं जितना कोई हिंदू।
राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले साबिर मियां और सद्दीक उस दौर की यादें साझा करते हुए भावुक हो जाते हैं। डबडबाई आंखों से कहते हैं, हमने सच्चाई का साथ दिया, जिसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। अब अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के बाद श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा से हम बेहद खुश हैं।
विज्ञापन
बिरादरी से बेदखल हुए तो सीतापुर से लाते थे सब्जी व राशन
कचनार निवासी सााबिर मियां पूर्व सांसद शारदानंद दीक्षित के समक्ष जनसंघ पार्टी से जुड़े थे। राम मंदिर आंदोलन के दौरान इनकी सक्रियता से बिरादरी ने विरोध शुरू कर दिया। साबिर बताते हैं, कि बिरादरी के लोगों ने पार्टी छोड़ने का दबाव बनाया, पर हमने हमेशा सच का साथ दिया। इस बात से नाराज होकर हुक्का पानी बंद करते हुए हमें बिरादरी से बेदखल कर दिया गया। यह किस्सा साझा करते हुए उनकी आंखें भर आईं, बोले कि हद तो तब पार हो गई जब गांव की बाजार में हमें सब्जी व राशन तक मिलना बंद हो गया।
सैय्यद बहराइची की मजार के पास कुआं खोदकर अपनी व परिवार की प्यास बुझाई। सब्जी व राशन सीतापुर जाकर लाना होता था। लेकिन मैंने भी प्रण करके सबको बोला कि जैसे बाप हमेशा एक ही रहता है वैसे मरते दम तक पार्टी एक ही रखूंगा, चाहे कोई कितना भी सितम कर ले।
साबिर मियां आज भी भाजपा से जुड़े हैं। वर्तमान राजनीति से आहत साबिर आज गुमनामी का जीवन जी रहे हैं। परिवार में तीन बेटे व बेटियां हैं। कच्चे मकान में जीवन व्यतीत कर रहे साबिर मियां कहते हैं, कि राम मंदिर बनने की दिल में खुशी है।
बिरादरी का विरोध झेला, अपशब्द तक सुने
कचनार निवासी पूर्व ब्लाक प्रमुख सद्दीक 1989 में भाजपा की नीतियों व विचारधारा से प्रभावित होकर पार्टी से जुड़े थे। सद्दीक बताते हैं, कि दौलत राम चुनाव जीकर मंत्री बने तो हमें थाना प्रभारी बनाया। 1990 में राम मंदिर आंदोलन शुरू हो गया। साथियों समेत आंदोलन में सक्रिय हो गए। इस दौरान बिरादरी के लोगों ने राम मंदिर आंदोलन में शामिल होने का काफी विरोध किया। पीठ पीछे लोगों ने गालियां दीं, बिरादरी से बेदखल करने की धमकी भी मिली। बिरादरी के उम्रदराज लोग कई तरह से दबाव बनाते थे। इसके बाद भी हमने आंदोलन में पार्टी का साथ दिया। आज इस बात की खुशी है, कि जिस आंदोलन में हम शामिल हुए थे वह अब फलीभूत हो रहा है। अयोध्या में राम मंदिर बनने से मन में प्रसन्नता है।
विज्ञापन
गांव की बाजार से सब्जी और राशन देने को कोई तैयार नहीं होता था। इसके बाद भी इनका हौसला नहीं डिगा। कुंआ खोदकर परिवार की प्यास बुझाई। आज भले गुमनामी का जीवन जी रहे हैं, पर अयोध्या में राम मंदिर बनने से वे भी उतने ही खुश हैं जितना कोई हिंदू।
विज्ञापन
राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले साबिर मियां और सद्दीक उस दौर की यादें साझा करते हुए भावुक हो जाते हैं। डबडबाई आंखों से कहते हैं, हमने सच्चाई का साथ दिया, जिसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। अब अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के बाद श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा से हम बेहद खुश हैं।
विज्ञापन
बिरादरी से बेदखल हुए तो सीतापुर से लाते थे सब्जी व राशन
कचनार निवासी सााबिर मियां पूर्व सांसद शारदानंद दीक्षित के समक्ष जनसंघ पार्टी से जुड़े थे। राम मंदिर आंदोलन के दौरान इनकी सक्रियता से बिरादरी ने विरोध शुरू कर दिया। साबिर बताते हैं, कि बिरादरी के लोगों ने पार्टी छोड़ने का दबाव बनाया, पर हमने हमेशा सच का साथ दिया। इस बात से नाराज होकर हुक्का पानी बंद करते हुए हमें बिरादरी से बेदखल कर दिया गया। यह किस्सा साझा करते हुए उनकी आंखें भर आईं, बोले कि हद तो तब पार हो गई जब गांव की बाजार में हमें सब्जी व राशन तक मिलना बंद हो गया।
सैय्यद बहराइची की मजार के पास कुआं खोदकर अपनी व परिवार की प्यास बुझाई। सब्जी व राशन सीतापुर जाकर लाना होता था। लेकिन मैंने भी प्रण करके सबको बोला कि जैसे बाप हमेशा एक ही रहता है वैसे मरते दम तक पार्टी एक ही रखूंगा, चाहे कोई कितना भी सितम कर ले।
साबिर मियां आज भी भाजपा से जुड़े हैं। वर्तमान राजनीति से आहत साबिर आज गुमनामी का जीवन जी रहे हैं। परिवार में तीन बेटे व बेटियां हैं। कच्चे मकान में जीवन व्यतीत कर रहे साबिर मियां कहते हैं, कि राम मंदिर बनने की दिल में खुशी है।
बिरादरी का विरोध झेला, अपशब्द तक सुने
कचनार निवासी पूर्व ब्लाक प्रमुख सद्दीक 1989 में भाजपा की नीतियों व विचारधारा से प्रभावित होकर पार्टी से जुड़े थे। सद्दीक बताते हैं, कि दौलत राम चुनाव जीकर मंत्री बने तो हमें थाना प्रभारी बनाया। 1990 में राम मंदिर आंदोलन शुरू हो गया। साथियों समेत आंदोलन में सक्रिय हो गए। इस दौरान बिरादरी के लोगों ने राम मंदिर आंदोलन में शामिल होने का काफी विरोध किया। पीठ पीछे लोगों ने गालियां दीं, बिरादरी से बेदखल करने की धमकी भी मिली। बिरादरी के उम्रदराज लोग कई तरह से दबाव बनाते थे। इसके बाद भी हमने आंदोलन में पार्टी का साथ दिया। आज इस बात की खुशी है, कि जिस आंदोलन में हम शामिल हुए थे वह अब फलीभूत हो रहा है। अयोध्या में राम मंदिर बनने से मन में प्रसन्नता है।