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Sitapur News: 10 सेमी बढ़ा सरयू का जलस्तर, लोग सहमे
Sun, 06 Jul 2025 12:59 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 06 Jul 2025 12:59 AM IST
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रामपुर मथुरा (सीतापुर)। सरयू और शारदा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सरयू का पानी पिछले 24 घंटे में 10 सेमी बढ़कर 117.20 मीटर पर पहुंच गया है। इससे नदी के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा फिर मंडराने लगा है।
संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए गांजरवासियों में हड़कंप है। इसका असर गांवों की करीब 15 हजार आबादी पड़ेगा। गिरिजापुरी बैराज से शनिवार को फिर 2.67 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है।
पहाड़ों पर भारी बारिश और बैराजों से रोजाना छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से नदियों का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। शनिवार को सरयू का जलस्तर 117.20 मीटर दर्ज किया गया। शुक्रवार की तुलना में पानी 10 सेमी बढ़ा है।
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नदी के तटवर्ती गांवों के करीब लहरें किनारों से टकरा रही हैं। बाढ़ आने पर अखरी ,अंगरौरा, निरंजनपुरवा, बाबाकुटी, परमगोंडा, कलुवापुर, बंगलीपुरवा, शुकुलपुरवा, बगस्ती समेत लगभग 15 गांव प्रभावित हो सकते हैं, जिससे इन गांवों के लोग भयभीत हैं। उधर, तीनों बैराज से शनिवार को फिर 2.67 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। ग्रामीणों को कहना है कि बैराज से छोड़े जा रहे पानी से नदी का जलस्तर बढ़ता है। ऐसे में किसी भी समय बाढ़ दस्तक दे सकती है।
कोई ईंधन तो कोई मवेशियों के चारे का कर रहा इंतजाम
बाढ़ आने पर सबसे बड़ी समस्या ईंधन व जानवरों के चारे व भूसे की होती है। इसलिए शनिवार को तटवर्ती गांवों के पशुपालक ऊंचे स्थानों पर चारा संग्रह करने का प्रयास करते दिखाई दिए। बाढ़ के समय खाना बनाने के लिए सूखी लकड़ियों की जरूरत पड़ती है। इसे देखते हुए ईंधन की व्यवस्था भी लोग कर रहे हैं। इसके अलावा सुरक्षित ठिकानों पर लोग घास-फूस की झोपड़ी बनाने में भी जुटे हुए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि अब बाढ़ किसी भी समय आ सकती है। ऐसे में हम यदि पहले से तैयार नहीं रहेंगे तो भूखे रहना पड़ सकता है।
बाढ़ जैसे हालात नहीं
सरयू का जलस्तर अभी बहुत कम है। बाढ़ जैसे हालात बिल्कुल नहीं हैं। परमगोंडा में नंदकिशोर का घर कटान की जद में है, किंतु इस समय कटान बिल्कुल बंद है। प्रशासन की ओर से सभी जरूरी तैयारियां कर ली गई हैं।
- अनिल कुमार, तहसीलदार महमूदाबाद
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संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए गांजरवासियों में हड़कंप है। इसका असर गांवों की करीब 15 हजार आबादी पड़ेगा। गिरिजापुरी बैराज से शनिवार को फिर 2.67 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है।
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पहाड़ों पर भारी बारिश और बैराजों से रोजाना छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से नदियों का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। शनिवार को सरयू का जलस्तर 117.20 मीटर दर्ज किया गया। शुक्रवार की तुलना में पानी 10 सेमी बढ़ा है।
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नदी के तटवर्ती गांवों के करीब लहरें किनारों से टकरा रही हैं। बाढ़ आने पर अखरी ,अंगरौरा, निरंजनपुरवा, बाबाकुटी, परमगोंडा, कलुवापुर, बंगलीपुरवा, शुकुलपुरवा, बगस्ती समेत लगभग 15 गांव प्रभावित हो सकते हैं, जिससे इन गांवों के लोग भयभीत हैं। उधर, तीनों बैराज से शनिवार को फिर 2.67 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। ग्रामीणों को कहना है कि बैराज से छोड़े जा रहे पानी से नदी का जलस्तर बढ़ता है। ऐसे में किसी भी समय बाढ़ दस्तक दे सकती है।
कोई ईंधन तो कोई मवेशियों के चारे का कर रहा इंतजाम
बाढ़ आने पर सबसे बड़ी समस्या ईंधन व जानवरों के चारे व भूसे की होती है। इसलिए शनिवार को तटवर्ती गांवों के पशुपालक ऊंचे स्थानों पर चारा संग्रह करने का प्रयास करते दिखाई दिए। बाढ़ के समय खाना बनाने के लिए सूखी लकड़ियों की जरूरत पड़ती है। इसे देखते हुए ईंधन की व्यवस्था भी लोग कर रहे हैं। इसके अलावा सुरक्षित ठिकानों पर लोग घास-फूस की झोपड़ी बनाने में भी जुटे हुए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि अब बाढ़ किसी भी समय आ सकती है। ऐसे में हम यदि पहले से तैयार नहीं रहेंगे तो भूखे रहना पड़ सकता है।
बाढ़ जैसे हालात नहीं
सरयू का जलस्तर अभी बहुत कम है। बाढ़ जैसे हालात बिल्कुल नहीं हैं। परमगोंडा में नंदकिशोर का घर कटान की जद में है, किंतु इस समय कटान बिल्कुल बंद है। प्रशासन की ओर से सभी जरूरी तैयारियां कर ली गई हैं।
- अनिल कुमार, तहसीलदार महमूदाबाद