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Sitapur News: देश के पहले गोबर गैस प्लांट के अभिलेख होंगे संरक्षित
Sat, 30 Sep 2023 12:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 30 Sep 2023 12:08 AM IST
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गोबर गैस प्लांट।
इमलिया सुल्तानपुर (सीतापुर)। देश का पहला गोबर गैस प्लांट सीतापुर के ऐलिया ब्लॉक स्थित रामनगर खटकरी में लगा था। इसे स्थापित करने वाले दिवंगत वैज्ञानिक डॉ. राम बक्श सिंह इसी गांव में जन्मे थे। उनके अभिलेखों को राष्ट्रीय अभिलेखागार संरक्षित करेगा। भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इस सूचना को साझा किया है। इससे परिजनों, ग्रामीणों संग जिले के वैज्ञानिकों में खुशी की लहर है।
दिवंगत वैज्ञानिक के पुत्र राजेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि 1957 में रामनगर खटकरी में डॉ. राम बक्श सिंह ने गैर परंपरागत ऊर्जा के क्षेत्र में देश के पहले बायोगैस व गोबर गैस प्लांट की स्थापना की। इसका उद्घाटन तत्कालीन केंद्रीय सामुदायिक विकास मंत्री गोविंद नारायण ने किया था। वहीं, इटावा स्थित एशिया के पहले गोबर गैस रिसर्च स्टेशन अजीतमल को भी डॉ. राम बक्श ने शुरू किया था।
भारत और विदेशों में 40 वर्षों तक काम के दौरान डेनमार्क, ईरान, जर्मनी, नेपाल, अमेरिका, सीलोन, हालैंड, कनाडा, मैक्सिको, निकारागुआ, होंडूर, कोस्टा रिका, पनामा संग 15 देशों में एक हजार से अधिक बायोगैस और गोबर गैस सिस्टम को डिजाइन व स्थापित किया। संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्ष 1972 में पहला बायोगैस संयंत्र बनाया। इसका उद् घाटन अलास्का के सीनेटर माइक ग्रेवेल ने किया था। भारत व विदेश के हर गांव में उच्च स्तर के बायोगैस व गोबर गैस उर्जा के उत्सर्जन की दिशा में लोगों में जागरूकता बढ़ाने की मुहिम भी चलाई थी।
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उन्होंने बताया कि पिता को यह सम्मान मिला तो काफी खुशी मिली। अन्य महापुरुषों व नामचीन हस्तियों की वस्तुओं की तरह उनके पिता के अभिलेखों को संरक्षित किया जाएगा, जिससे पिता का नाम अमर हो जाएगा। आने वाले पीढ़ियों तक उन्हें लोग एक वैज्ञानिक के रूप में जानेंगे। राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि प्लांट का स्ट्रक्चर, रिसर्च, उपकरण व फोटो को संरक्षित किया जाएगा।
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दिवंगत वैज्ञानिक के पुत्र राजेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि 1957 में रामनगर खटकरी में डॉ. राम बक्श सिंह ने गैर परंपरागत ऊर्जा के क्षेत्र में देश के पहले बायोगैस व गोबर गैस प्लांट की स्थापना की। इसका उद्घाटन तत्कालीन केंद्रीय सामुदायिक विकास मंत्री गोविंद नारायण ने किया था। वहीं, इटावा स्थित एशिया के पहले गोबर गैस रिसर्च स्टेशन अजीतमल को भी डॉ. राम बक्श ने शुरू किया था।
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भारत और विदेशों में 40 वर्षों तक काम के दौरान डेनमार्क, ईरान, जर्मनी, नेपाल, अमेरिका, सीलोन, हालैंड, कनाडा, मैक्सिको, निकारागुआ, होंडूर, कोस्टा रिका, पनामा संग 15 देशों में एक हजार से अधिक बायोगैस और गोबर गैस सिस्टम को डिजाइन व स्थापित किया। संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्ष 1972 में पहला बायोगैस संयंत्र बनाया। इसका उद् घाटन अलास्का के सीनेटर माइक ग्रेवेल ने किया था। भारत व विदेश के हर गांव में उच्च स्तर के बायोगैस व गोबर गैस उर्जा के उत्सर्जन की दिशा में लोगों में जागरूकता बढ़ाने की मुहिम भी चलाई थी।
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उन्होंने बताया कि पिता को यह सम्मान मिला तो काफी खुशी मिली। अन्य महापुरुषों व नामचीन हस्तियों की वस्तुओं की तरह उनके पिता के अभिलेखों को संरक्षित किया जाएगा, जिससे पिता का नाम अमर हो जाएगा। आने वाले पीढ़ियों तक उन्हें लोग एक वैज्ञानिक के रूप में जानेंगे। राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि प्लांट का स्ट्रक्चर, रिसर्च, उपकरण व फोटो को संरक्षित किया जाएगा।