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अस्पतालों को गोद लेने में जनप्रतिनिधियों ने नहीं फैलाईं बाहें

Mon, 31 May 2021 11:22 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 31 May 2021 11:22 PM IST
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Public representatives did not spread arms in adopting hospitals
सीतापुर। चिकित्सा विशेषज्ञ कोरोना की तीसर लहर आने की आशंका जता रहे हैं। इस संभावित खतरे और महामारी से निपटने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने में लगे हैं। सीएम ने सांसदों और विधायकों से एक-एक अस्पताल को गोद लेने का आह्वान किया था, लेकिन सीतापुर में सीएम के आदेश का असर नहीं दिखा है।
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अभी तक जनप्रतिनिधियों ने सीएम के आदेश पर गौर ही नहीं किया है। सिर्फ महोली विधायक ने ही अस्पताल को गोद लेने की कवायद की है। ऐसे में चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे कर सत्ता की कुर्सी पर पहुंचने वाले ये जनप्रतिनिधि जनता की सुरक्षा को लेकर कितना फिक्रमंद हैं, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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जिले में जिला अस्पताल और डफरिन के साथ ही 20 सीएचसी और 59 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिला अस्पताल और डफरिन को छोड़कर बाकी सभी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तो कुर्सी-मेज और चंद दवाओं के अलावा कुछ भी नहीं है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अंचल के अस्पतालों का निरीक्षण किया था।
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इसके बाद उन्होंने सांसदों और विधायकों से एक-एक सीएचसी या फिर पीएचसी को गोद लेकर सुविधाओं को मुकम्मल कराने का आह्वान किया था, लेकिन सीतापुर के जनप्रतिनिधियों ने अभी तक इस पर गौर नहीं किया है। सिर्फ महोली विधायक शशांक त्रिवेदी ने सीएचसी महोली को गोद लेने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।
जिले की करीब 55 लाख की आबादी का चार सांसद और नौ विधायक प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें सभी सांसद सत्ताई दल के हैं। अधिकांश विधायक भी भाजपा के ही हैं। सिर्फ दो विधायक अन्य दलों के हैं। इसके बावजूद सीतापुर में सीएम के जनकल्याणकारी आह्वान का असर न दिखाई देना जनमानस के प्रति जनप्रतिनिधि की बेफिक्री को दर्शा रहा है। परियोजना कार्यालय के सूत्रों की माने तो कुछ जनप्रतिनिधियों ने कोविड उपकरण खरीदने को लेकर धनराशि जारी की है, लेकिन अस्पतालों को गोद लेने के लिए किसी ने पत्र नहीं लिखा है।
झोलाछाप के सहारे चल रही सेहत की पतवार
ग्रामीण अंचल की लाखों की आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बने हैं। सुविधाओं के अभाव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। कई पीएचसी चिकित्सक विहीन हैं। जहां चिकित्सक तैनात हैं, वहां वे रात्रि विश्राम नहीं करते हैं। अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर दोपहर बाद ताला लटकने लगता है। ऐसे में रात में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर ग्रामीणों के सामने झोलाछाप चिकित्सकों के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है। कई बार झोलाछाप चिकित्सक मरीज के लिए नीम हकीम खतरा-ए-जान भी साबित हो जाते हैं।

जनप्रतिनिधि तो निरीक्षण तक नहीं करते
सीतापुर के जनप्रतिनिधि अस्पतालों में पैर रखना मुनासिब नहीं समझते। कोरोना की दो लहरें जिले में भारी तबाही मचा चुकी हैं। सरकारी आंकड़ों में ही कोरोना से 171 मौत हो चुकी है। तबाही का वीभत्स मंजर इससे कहीं ज्यादा है। इसकी गवाही श्मशानों की चिताएं और कब्र दे चुकी है। जिले के किसी भी जनप्रतिनिधि ने स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर नहीं दिया है। जनप्रतिनिधियों ने अस्पतालों का निरीक्षण तक करना मुनासिब नहीं समझा है।
अस्पतालों को गोद लेने को लेकर जनप्रतिनिधियों ने पत्र नहीं लिखा है। पत्र मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- अरुण कुमार सिंह, पीडी
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