ब्लॉक से बहू व भतीजे को न जिता सके नगर विधायक
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जनता-जनार्दन ने पंचायत चुनाव में कई धुरंधरों को धूल चटा दी है। घोषित नतीजों में कई चौंकाने वाले परिणाम आए हैं। सत्ता पक्ष से जुड़े कई माननीयों के रिश्तेदारों व सगे-संबंधियों को हार का मुंह देखना पड़ा है।
नगर विधायक राधेश्याम जायसवाल अपनी ही विधानसभा क्षेत्र से भतीजे व बहू को चुनाव नहीं जिता सके। पूर्व मंत्री बुनियाद हुसैन अंसारी के बेटे भी चुनाव में औंधे मुंह गिरे। जबकि पूर्व मंत्री श्यामलाल रावत के पुत्र राजीव व सपा के जिला महासचिव चित्रकेश यादव ने भी मिट्टी पलीत करवा ली।
चुनाव में सत्ता पक्ष से जुड़े कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। चुनाव में उनके रिश्तेदारों के हारने से कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
सीतापुर की सियासत में नगर विधायक राधेश्याम जायसवाल किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। सभासद का चुनाव जीतकर प्रदेश की राजनीति में दखल बनाने वाले नगर विधायक सियासत के काफी माहिर खिलाड़ी हैं।
सभासद का चुनाव जीतने का शुरू हुआ सफर नगर पालिका अध्यक्ष से होते हुए विधायक तक जा पहुंचा। जोड़-तोड़ की सियासत के दिग्गज राधेश्याम लगातार तीन बार से विधानसभा के चुनाव में फतह हासिल करते चले आ रहे हैं।
जिला पंचायत सदस्य पद के लिए इस बार वार्ड संख्या 21 से उनके भतीजे सतीश तथा वार्ड संख्या 22 से बहू ममता जायसवाल चुनाव लड़ रही थीं। इन वार्डों का ज्यादातर हिस्सा सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में ही आता है।
नगर विधायक का भतीजा-बहू होने के नाते इन्हें सशक्त उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन नतीजा आने के बाद सियासी पंडितों के समीकरण धरे रह गए। सतीश और ममता दोनों को चुनाव में करारी शिकस्त मिली है।
पूर्व मंत्री बुनियाद हुसैन अंसारी सपा से ही ताल्लुक रखते हैं। इनके बेटे जुनैद अंसारी वार्ड नंबर 20 से किस्मत आजमा रहे थे। पूर्व मंत्री की साख अपने बेटे को चुनाव जिताने में काम न आ सकी।
सपा के जिला महासचिव चित्रकेश यादव वार्ड संख्या 51 से जनता के दरबार में पहुंचे थे, लेकिन जनता का फैसला इनके हक में नहीं आया। सपा के सिधौली विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष शिव प्रसाद यादव की पत्नी शिवप्यारी और पूर्व मंत्री श्यामलाल रावत के बेटे राजीव रावत वार्ड संख्या 53 से चुनाव लड़ रहे थे। ये दोनों चुनाव हार गए हैं।
इसके अलावा सीतापुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष देवभानु सिंह के बेटे सुरैंचा स्टेट राजपरिवार के यशवर्धन सिंह भी चुनाव हार गए हैं।