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Sitapur News: कुल्हड़ बनाकर काम कर रहे लाखों, दे रहे रोजगार

Sun, 17 Nov 2024 10:32 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Sun, 17 Nov 2024 10:32 PM IST
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Lakhs of people are working by making kulhads and providing employment.
सेउता (सीतापुर)। लॉकडाउन में पंकज की नौकरी चली गई। घर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था। आर्थिक समस्याएं इस कदर हावी हो गईं कि दो वक्त की रोटी के लाले पड़ने लगे। चाय पीते हुए आइडिया आया और सोशल मीडिया की मदद से कुल्हड़ बनाना शुरू कर दिया। अब इस कुल्हड़ की डिमांड ने पंकज की किस्मत बदल दी है। साल में दो लाख से अधिक कमाकर दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं।
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सीतापुर जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर सेवता गांव है। इस गांव में किसान के बेटे पंकज मौर्य पिछले तीन वर्षों से मिट्टी के डिजाइनदार कुल्हड़ बनाने का काम कर रहे हैं। पिता गजोधर किसान हैं। उनकी माली हालत ठीक नहीं थी। पंकज बताते हैं कि 2020 से पहले लखनऊ, हरियाणा व दिल्ली में प्राइवेट कंपनियों में काम करते थे।
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लॉकडाउन होने के कारण घर पर आकर रुक गए, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई। 2021 में दोबारा प्राइवेट कंपनियों में काम शुरू किया। लखनऊ में एक चाय की दुकान पर चाय पीते हुए आइडिया आया कि क्यों ना हम भी कुल्हड़ बनाकर अपने घर पर रोजगार शुरू करें। फिर सोशल मीडिया की सहायता से जानकारी हासिल की और कुछ रुपये एकत्र किए।
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कुल्हड़ बनाने वाली आधुनिक मशीन खरीदी और ट्रेनिंग प्राप्त की। उन्होंने बताया कि नवंबर 2021 से काम शुरू किया था। अब अच्छा खासा कमा लेता हूं। मेरे साथ में पांच लोग और भी काम करते हैं। इस डिजाइनर कुल्हड़ की डिमांड क्षेत्र में ही इतनी हो गई है कि लोगों को आवश्यकता के अनुसार कुल्हड़ नहीं दे पाता रहा हूं। उन्होंने बताया कि खर्चा निकालकर साल में करीब दो लाख की बचत हो जाती है।


सरकार दिला दे मिट्टी तो और बढ़े कारोबार
पंकज कहते है कि गांव के आसपास कुल्हड़ बनाने के लिए मिट्टी उपयुक्त नहीं है। हमें बाहर से मिट्टी मंगवानी पड़ती है। इससे थोड़ा खर्च और बढ़ जाता है। यदि सरकार मिट्टी दिलवा दे तो और अधिक विस्तार कर सकता हूं।
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