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Sitapur News: जर्जर लखई घाट पुल की जांच शुरू
Fri, 22 Nov 2024 12:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 22 Nov 2024 12:44 AM IST
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खैराबाद (सीतापुर)। गोन नदी के लखई घाट पर बने जर्जर पुल से जोखिम उठाकर ग्रामीण आवागमन करते हैं। अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद डीएम ने पुल की स्थिति की जांच के लिए लेखपाल को मौके पर भेजा। बृहस्पतिवार को पुल का मुआयना करने पहुंचे लेखपाल पुल इसकी जर्जर स्थिति देखकर आवागमन बंद कराने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया। उनका कहना था कि वैकल्पिक व्यवस्था करने के बाद ही पुलिस से आवागमन रोका जाए। ग्रामीणों ने नए पुल का निर्माण कराए जाने की मांग उठाई है।
विकास खंड क्षेत्र के मखुवा चौबेपुर से फूलपर जाने वाले मार्ग पर गोन नदी के लखई घाट पर बना पुल करीब 19 वर्षों से जर्जर हालत में है। पुल का स्लैब टूट चुका है और इसमें गड्ढे हो गए हैं। ऐसे में पुल से गुजरना खतरे से खाली नहीं है, लेकिन 20 किमी अधिक दूरी तय करने से बचने के लिए सैकड़ों गांवों के लोग जोखिम उठाकर जर्जर पुल से आवागमन करते हैं। अमर उजाला ने 19 नंवबर को ''पुल बदहाल, जोखिम उठा निकलते हैं राहगीर'' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर समस्या उठाई थी। इसके बाद डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर अभिनव यादव ने लेखपाल को मौके पर भेजा। क्षेत्रीय लेखपाल राजेश विश्वकर्मा बृहस्पतिवार को मौके पर पहुंचे। उन्होंने जर्जर पुल से आवागमन बंद कराने की कवायद शुरू की तो राहगीरों ने विरोध शुरू कर दिया।
हरद्वारी बघेल, प्रधान प्रतिनिधि नैमिष शर्मा, योगेंद्र, नीरज, बब्बू भार्गव, विदित पाल, लल्लू यादव आदि का कहना है कि प्रशासन पुल बंद कराने से पहले लिखित में नये पुल का निर्माण कराने का आश्वासन दे। अन्यथा आवागमन बंद नहीं करने दिया जाएगा। ग्रामीणों के विरोध के चलते लेखपाल को बैरंग वापस लौटना पड़ा। अब प्रशासन यह पता लगाने में जुट गया है कि इस पुल का निर्माण किस कार्यदायी संस्था ने किया था। वहीं, अमर उजाला में खबर छपने के बाद हरकत में प्रशासन को देख ग्रामीणों में नया पुल बनने की उम्मीद जगी है।
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...तो क्षेत्र पंचायत ने कराया था निर्माण
लखई घाट का पुल बनने के बाद एक साल भी नहीं टिक सका था। सूत्र बताते हैं कि क्षेत्र पंचायत ने 2005 में लगभग 29 लाख रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया था। मानक विहीन निर्माण कराए जाने के चलते यह पुल एक वर्ष भी नहीं टिका और पहली बारिश में ही क्षतिग्रस्त होने लगा। सवाल यह भी है कि शासन-प्रशासन ने अब तक इस मानक विहीन पुल को बनवाने वाली कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई क्यों नहीं की।
जांच के लिए भेजा गया था लेखपाल
लेखपाल को जांच के लिए मौके पर भेजा था। ग्रामीणों का कहना है जब तक नदी पार करने का कोई विकल्प नहीं है, उन्हें निकलने दिया जाए। पुल बंद होने से उन्हें लंबी दूरी तय कर गुजरना पड़ेगा। सिंचाई विभाग को इस समस्या से अवगत कराया गया है। इस पुल का किस कार्यदायी संस्था ने निर्माण कराया था, इस बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही स्थिति दुरुस्त की जाएगी।
- अभिनव यादव, एसडीएम सदर
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विकास खंड क्षेत्र के मखुवा चौबेपुर से फूलपर जाने वाले मार्ग पर गोन नदी के लखई घाट पर बना पुल करीब 19 वर्षों से जर्जर हालत में है। पुल का स्लैब टूट चुका है और इसमें गड्ढे हो गए हैं। ऐसे में पुल से गुजरना खतरे से खाली नहीं है, लेकिन 20 किमी अधिक दूरी तय करने से बचने के लिए सैकड़ों गांवों के लोग जोखिम उठाकर जर्जर पुल से आवागमन करते हैं। अमर उजाला ने 19 नंवबर को ''पुल बदहाल, जोखिम उठा निकलते हैं राहगीर'' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर समस्या उठाई थी। इसके बाद डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर अभिनव यादव ने लेखपाल को मौके पर भेजा। क्षेत्रीय लेखपाल राजेश विश्वकर्मा बृहस्पतिवार को मौके पर पहुंचे। उन्होंने जर्जर पुल से आवागमन बंद कराने की कवायद शुरू की तो राहगीरों ने विरोध शुरू कर दिया।
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हरद्वारी बघेल, प्रधान प्रतिनिधि नैमिष शर्मा, योगेंद्र, नीरज, बब्बू भार्गव, विदित पाल, लल्लू यादव आदि का कहना है कि प्रशासन पुल बंद कराने से पहले लिखित में नये पुल का निर्माण कराने का आश्वासन दे। अन्यथा आवागमन बंद नहीं करने दिया जाएगा। ग्रामीणों के विरोध के चलते लेखपाल को बैरंग वापस लौटना पड़ा। अब प्रशासन यह पता लगाने में जुट गया है कि इस पुल का निर्माण किस कार्यदायी संस्था ने किया था। वहीं, अमर उजाला में खबर छपने के बाद हरकत में प्रशासन को देख ग्रामीणों में नया पुल बनने की उम्मीद जगी है।
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...तो क्षेत्र पंचायत ने कराया था निर्माण
लखई घाट का पुल बनने के बाद एक साल भी नहीं टिक सका था। सूत्र बताते हैं कि क्षेत्र पंचायत ने 2005 में लगभग 29 लाख रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया था। मानक विहीन निर्माण कराए जाने के चलते यह पुल एक वर्ष भी नहीं टिका और पहली बारिश में ही क्षतिग्रस्त होने लगा। सवाल यह भी है कि शासन-प्रशासन ने अब तक इस मानक विहीन पुल को बनवाने वाली कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई क्यों नहीं की।
जांच के लिए भेजा गया था लेखपाल
लेखपाल को जांच के लिए मौके पर भेजा था। ग्रामीणों का कहना है जब तक नदी पार करने का कोई विकल्प नहीं है, उन्हें निकलने दिया जाए। पुल बंद होने से उन्हें लंबी दूरी तय कर गुजरना पड़ेगा। सिंचाई विभाग को इस समस्या से अवगत कराया गया है। इस पुल का किस कार्यदायी संस्था ने निर्माण कराया था, इस बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही स्थिति दुरुस्त की जाएगी।
- अभिनव यादव, एसडीएम सदर