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जुलाई में बारिश ने चार साल का तोड़ा रिकार्ड
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सीतापुर। देरी और मानसून की सुस्त चाल के बाद भी जुलाई में हुई बारिश ने पिछले चार साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। जिला प्रशासन की ओर से शासन को भेजी रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में 1576 मिमी. बारिश हुई है। यह बारिश 2015 के बाद अब तक जुलाई में हुई बरसात में सबसे ज्यादा है।
पिछले साल के मुकाबले इस बार जुलाई में 190.5 मिमी. अधिक बारिश रिकार्ड की गई है। जिले में इस बार प्री मानसून धोखा दे गया था। जून में महज पांच दिन ही बारिश हुई। आठ जून को होने वाली 51 मिमी. बारिश ने प्री मानसून आने के संकेत दिए, लेकिन फिर बादल रूठ गए। इसके बाद 20 जून को महज चार मिमी बारिश हुई।
22 जून को तीन मिमी, 24 जून को 15 मिमी तथा 25 जून को सबसे ज्यादा 63 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। फिर तीन व पांच जुलाई को दो और एक मिमी बारिश ही हुई। प्री मानसून के धोखा देने के बाद छह जुलाई को मानसून ने दस्तक दी। इस दिन 247 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।
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इसके बाद कभी कम तो कभी ज्यादा बारिश होने का दौर चल निकला। दस दिन तक लगातार बादल बरसते रहे। 15 जुलाई को मौसम साफ रहने के बाद 16 व 17 जुलाई को बादल झूमकर बरसे। इसके बाद बारिश थम गई।
24 से 28 जुलाई तक एक बार फिर लगातार बारिश हुई। जुलाई में 1576 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। इस बार जुलाई में होने वाली बारिश ने पिछले चार साल का रिकार्ड तोड़ दिया है।
जुलाई में हुई बारिश
वर्ष बारिश (मिमी.)
2015 1118.1
2016 1243.5
2017 1418.3
2018 1385.5
2019 1576.0
1312 मिमी. अधिक हुई बारिश
इस साल जुलाई में 19 दिन बारिश हुई। इसमें सबसे कम पांच जुलाई को महज एक मिमी बारिश रिकार्ड की गई। सबसे अधिक छह जुलाई को 247 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। जुलाई में औसत बारिश 264 मिमी होनी चाहिए। अबकी जुलाई में औसत से 1312 मिमी अधिक बारिश हुई है।
बेहतर पैदावार की उम्मीद
जुलाई में पर्याप्त बारिश से इस बार खरीफ फसलों की बेहतर पैदावार होने की उम्मीद है। इसे किसान खुश हैं। खरीफ फसल में सबसे अधिक खेती यहां धान की होती है। कृषि विभाग के मुताबिक जिले में अबकी खरीफ फसल की बोआई का लक्ष्य 208986 हेक्टेयर है। इसमें सबसे अधिक धान की बोआई 161264 हेक्टेयर करने का लक्ष्य है।
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पिछले साल के मुकाबले इस बार जुलाई में 190.5 मिमी. अधिक बारिश रिकार्ड की गई है। जिले में इस बार प्री मानसून धोखा दे गया था। जून में महज पांच दिन ही बारिश हुई। आठ जून को होने वाली 51 मिमी. बारिश ने प्री मानसून आने के संकेत दिए, लेकिन फिर बादल रूठ गए। इसके बाद 20 जून को महज चार मिमी बारिश हुई।
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22 जून को तीन मिमी, 24 जून को 15 मिमी तथा 25 जून को सबसे ज्यादा 63 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। फिर तीन व पांच जुलाई को दो और एक मिमी बारिश ही हुई। प्री मानसून के धोखा देने के बाद छह जुलाई को मानसून ने दस्तक दी। इस दिन 247 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।
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इसके बाद कभी कम तो कभी ज्यादा बारिश होने का दौर चल निकला। दस दिन तक लगातार बादल बरसते रहे। 15 जुलाई को मौसम साफ रहने के बाद 16 व 17 जुलाई को बादल झूमकर बरसे। इसके बाद बारिश थम गई।
24 से 28 जुलाई तक एक बार फिर लगातार बारिश हुई। जुलाई में 1576 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। इस बार जुलाई में होने वाली बारिश ने पिछले चार साल का रिकार्ड तोड़ दिया है।
जुलाई में हुई बारिश
वर्ष बारिश (मिमी.)
2015 1118.1
2016 1243.5
2017 1418.3
2018 1385.5
2019 1576.0
1312 मिमी. अधिक हुई बारिश
इस साल जुलाई में 19 दिन बारिश हुई। इसमें सबसे कम पांच जुलाई को महज एक मिमी बारिश रिकार्ड की गई। सबसे अधिक छह जुलाई को 247 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। जुलाई में औसत बारिश 264 मिमी होनी चाहिए। अबकी जुलाई में औसत से 1312 मिमी अधिक बारिश हुई है।
बेहतर पैदावार की उम्मीद
जुलाई में पर्याप्त बारिश से इस बार खरीफ फसलों की बेहतर पैदावार होने की उम्मीद है। इसे किसान खुश हैं। खरीफ फसल में सबसे अधिक खेती यहां धान की होती है। कृषि विभाग के मुताबिक जिले में अबकी खरीफ फसल की बोआई का लक्ष्य 208986 हेक्टेयर है। इसमें सबसे अधिक धान की बोआई 161264 हेक्टेयर करने का लक्ष्य है।