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विदेश के समाचार: अमेरिका के वर्जीनिया के स्कूल में गोलीबारी, ग्लोरिया स्टीनम का 92 वर्ष की उम्र में निधन

Thu, 03 Sep 2026 11:49 AM IST
देवेश त्रिपाठी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 03 Sep 2026 11:49 AM IST
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दुनिया की बड़ी खबरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
अमेरिका के वर्जीनिया राज्य के एक प्राथमिक स्कूल में बुधवार सुबह हुई गोलीबारी में एक वयस्क घायल हो गया। घटनास्थल पर पहुंचे एक अधिकारी ने बताया कि इस घटना में कोई बच्चा घायल नहीं हुआ है। वायनेसबोरो सिटी काउंसिल के सदस्य जिम वुड ने फोन पर बताया कि यह घटना अलग-थलग थी और गोली चलाने वाला अब कोई खतरा नहीं है। वुड के निर्वाचन क्षेत्र में वेस्टवुड हिल्स एलीमेंट्री स्कूल आता है। उन्होंने संदिग्ध की स्थिति के बारे में अधिक जानकारी देने से इनकार किया।
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वुड ने कहा, “यह दो लोगों के बीच हुई घटना है।” वह बुधवार सुबह पास में आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद थे और सूचना मिलने के बाद घटनास्थल पर पहुंचे। इसके बाद वह एक चर्च गए, जहां उन्होंने बताया कि बच्चों को उनके परिवारों से मिलवाया जा रहा था। वुड ने कहा कि घायल वयस्क को अस्पताल ले जाया गया है और उसकी चोटें जानलेवा नहीं हैं।
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वर्जीनिया राज्य पुलिस की प्रवक्ता रॉबिन लॉसन ने भी पुष्टि की कि शुरुआती जानकारी के अनुसार एक वयस्क घायल हुआ है और किसी बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचा है। वायनेसबोरो पुलिस ने अभी तक गोलीबारी के संबंध में विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, लॉसन ने कहा कि बुधवार दोपहर तक पुलिस की ओर से बयान जारी किया जाएगा। वुड ने कहा कि वह संदिग्ध की पहचान नहीं बता सकते और यह भी पुष्टि नहीं कर सकते कि उसका घायल व्यक्ति से कोई संबंध था या नहीं।
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हमले से रूस पर भड़का जर्मनी, राजनयिक तलब
जर्मनी ने पिछले महीने लीपजिग एयरपोर्ट पर हुए ड्रोन हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है। इसके जवाब में बर्लिन ने एक रूसी वाणिज्य दूतावास और सांस्कृतिक केंद्र को बंद करने का आदेश दिया है। जर्मन सरकार का कहना है कि वह रूस की किसी भी जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है, पर मास्को के ये हाइब्रिड हमले अपने राजनीतिक उद्देश्यों में सफल नहीं होंगे। इस बीच रूसी विदेश मंत्रालय ने मास्को में जर्मनी के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया है। बुधवार देर रात जर्मनी के दक्षिणी शहर आग्सबर्ग में रेलवे स्टेशन के पास अज्ञात वस्तु में हुए धमाके में दो यूक्रेनी नागरिक घायल हो गए। 

जमीन के 1.6 किलोमीटर नीचे मिला अदृश्य कण, डार्क मैटर की खोज में जुटे वैज्ञानिकों को मिला अहम सिग्नल
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में डार्क मैटर की खोज भौतिकविदों ने अमेरिका के साउथ डकोटा में जमीन से करीब 1.6 किलोमीटर (1 मील) नीचे एक बेहद दुर्लभ और रहस्यमयी 'अदृश्य कण' की टक्कर को रिकॉर्ड किया है। यह प्रयोग अमेरिका के साउथ डकोटा की एक पुरानी सोने की खदान में बने एक कक्ष में चल रहा है। डिटेक्टर मशीन का नाम लुक्स जेपलिन है, जिसे दुनिया का सबसे संवेदनशील डार्क मैटर डिटेक्टर माना जाता है। इस महा-डिटेक्टर के मुख्य टैंक में 7 टन (कुल क्षमता लगभग 10 टन) अत्यधिक शुद्ध लिक्विड जेनॉन गैस को माइनस 108 डिग्री सेल्सियस पर जमाकर रखा गया है। डार्क मैटर के कणों को डब्लूआईएमपी (वीकली इंटरेक्टिंग मैसिव पार्टिकल्स) कहा जाता है। ये कण सामान्य पदार्थ (जैसे इंसानों, दीवारों या ग्रहों) के आर-पार बिना छुए निकल जाते हैं, लेकिन इस प्रयोग के दौरान एक अनोखी घटना दर्ज की गई।

जेनॉन से टकराया अदृश्य कण
वैज्ञानिकों के प्रयोग के दौरान एक रहस्यमयी अदृश्य कण सीधे आकर जेनॉन के एक परमाणु के नाभिक (न्यूक्लियस) से टकराया। इसी दौरान रोशनी की एक हल्की सी चमक और इलेक्ट्रॉनों की बौछार पैदा हुई, जिसे वहां लगे सुपर-सेंसिटिव कैमरों ने पकड़ लिया। डार्क मैटर ब्रह्मांड के कुल हिस्से का लगभग 27 प्रतिशत है, लेकिन आज तक इसे सीधे कभी देखा या पकड़ा नहीं जा सका है।

खून को भी अब जवान बनाएगी दवा, दूर होगा बुढ़ापा
बिना खून बदले बुढ़ापे की रफ्तार थामने का दावा किया गया है। अमेरिकी स्टार्टअप जनरेशन लैब का कहना है कि उसके 1 जेनरेशन इंजेक्शन में दो पहले से स्वीकृत दवाओं का मिश्रण है। यह खून में उम्र बढ़ने से जुड़े कारकों को निष्क्रिय कर कोशिकाओं की मरम्मत में मदद कर सकता है।

कंपनी अब 100 से ज्यादा लोगों पर इसका परीक्षण करने की तैयारी में है। इंजेक्शन लेने वाले कुछ लोगों ने मानसिक स्पष्टता, ऊर्जा, आंखों की रोशनी और जोड़ों के दर्द में सुधार महसूस होने का दावा किया है। कंपनी ने इंजेक्शन में इस्तेमाल दोनों दवाओं के नाम भी अभी गुप्त रखे हैं। इस शोध के पीछे वैज्ञानिक इरिना कॉनबॉय का वर्षों पुराना काम है। 2005 में उनके चूहों पर प्रयोग में जवान रक्त के संपर्क से बूढ़े चूहों के कुछ ऊतकों में सुधार देखा गया था। बाद के प्रयोगों में जवान खून के बिना भी बूढ़े प्लाज्मा में बदलाव से ऐसे प्रभाव मिले। 
इंसानी परीक्षण पर विशेषज्ञों की नजर : विशेषज्ञों की नजर अब इंसानी परीक्षण पर है। अभी यह साबित नहीं हुआ है कि इंजेक्शन इंसानों में बुढ़ापा रोक सकता है या लंबे समय तक सुरक्षित है। एजेंसीक्यों खास है प्रयोग बुढ़ापे का कारण सिर्फ उम्र नहीं, बल्कि खून में बदलता रासायनिक वातावरण भी हो सकता है। इसी विचार पर यह उपचार विकसित किया जा रहा है। इंजेक्शन में कौन-सी दो दवाएं हैं, यह अभी सार्वजनिक नहीं है। बड़े नियंत्रित परीक्षण और वैज्ञानिक समीक्षा के बाद ही इसके असर का पता चलेगा।

दक्षिण एशियाई अमेरिकियों के खिलाफ घृणा अपराध के मामलों में ठोस कदम उठाने की मांग

दक्षिण एशियाई अमेरिकी समुदायों के साथ भेदभाव पर चिंता जताते हुए, कई अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने नफरत से निपटने और हिंसा को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। यह मांग बुधवार को यूएस कैपिटल में 'इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट' और 'स्टॉप AAPI हेट' द्वारा आयोजित दक्षिण एशियाई मूल के चुने हुए अधिकारियों की एक राउंडटेबल बैठक के दौरान की गई।

इस राउंडटेबल में यूएस कांग्रेस सदस्य राजा कृष्णमूर्ति, श्री थानेदार, एमी बेरा, सुहास सुब्रमण्यम, प्रमिला जयपाल और दक्षिण एशियाई मूल के चुने हुए अधिकारी शामिल हुए। कृष्णमूर्ति ने एक बयान में कहा, 'यह दक्षिण एशियाई अमेरिकियों की सुरक्षा के बारे में है, लेकिन ये यह स्पष्ट करने के बारे में भी है कि किसी भी अमेरिकी को यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि वे यहां के नहीं हैं - चाहे वे कहीं भी पैदा हुए हों, कैसे पूजा करते हों, या उनका नाम कैसा भी हो।'

 ग्लोरिया स्टीनम का 92 वर्ष की उम्र में निधन
अमेरिकी महिला आंदोलन की प्रमुख आवाज, पत्रकार और नारीवादी आइकन ग्लोरिया स्टीनम का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके आधिकारिक मीडिया हैंडल पर साझा की गई इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया गया कि उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित अपने घर में अपने प्रियजनों के बीच शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली। बयान में कहा गया कि स्टीनम ने अपने जीवन के अंतिम समय तक समानता के लिए काम किया और स्वतंत्र सोच, जिज्ञासा तथा हास्यबोध के साथ जीवन जिया। उन्होंने 1970 के दशक में न्यूयॉर्क में पत्रकारिता शुरू की और बाद में Ms magazine शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पांच दशक से अधिक समय पहले उन्होंनेविमेंस एक्शन अलायंस की स्थापना में भी योगदान दिया, जिसका उद्देश्य लैंगिक भेदभाव का मुकाबला करना था। 1970 के दशक में स्टीनम महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की मुखर समर्थक रहीं और 1973 के Roe v. Wade फैसले का स्वागत किया, जिसने गर्भपात के संवैधानिक अधिकार को मान्यता दी थी। उनके जीवन और अमेरिकी महिला आंदोलन में योगदान को HBO की डॉक्यूमेंट्री ‘ ग्लोरिया: उन्हीं के शब्दों में’ में भी दर्शाया गया। हाल के वर्षों में वह लेखन और समुदाय के साथ संवाद को सबसे अधिक महत्व देती रहीं।

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