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बाढ़ की आशंका से सहमे ग्रामीण ऊंची जगहों पर बनाने लगे झोपड़ी
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रेउसा (सीतापुर)। कई दिनों से होने वाली बारिश के चलते घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बाढ़ की संभावना को देखते हुए तटवर्ती गांव के बाशिंदों ने अपने घर-परिवार की सुरक्षा के उपाय शुरू कर दिए हैं। ग्रामीण सीतापुर-बहराइच मार्ग के किनारे फूस की झोपड़ी बनाने में जुट गए हैं। हालांकि इलाके में फिलहाल बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं।
जिले के गांजरी इलाके में हर साल घाघरा व शारदा नदियां भारी तबाही मचाती हैं। बाढ़ व कटान से सैकड़ों आशियाने उफनाती लहरों में समा जाते हैं। हजारों बीघा फसल डूब जाती है। घाघरा के तटवर्ती गार्गी पुरवा, दुर्गा पुरवा, नगीना पुरवा, मरैली, लोध पुरवा, रामलाल पुरवा, संबारी पुरवा, सुकई पुरवा, भगत सिकोरहर व जेतैहिया आदि दर्जनों मजरों के बाशिंदों को ऊंची जगहों पर डेरा डालना पड़ता है।
बारिश का दौर जारी रहने से घाघरा के जलस्तर में दिन-ब-दिन इजाफा हो रहा है। इससे तटवर्ती गांवों के बाशिंदों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगी हैं। दरअसल, बाढ़ आने पर सैकड़ों ग्रामीणों को गांव से पलायन करना पड़ता है।
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ग्रामीण ऊंची जगहों पर झोपड़ी बनाकर अथवा तिरपाल तानकर परिवार समेत उसमें गुजर-बसर करने को विवश होते हैं। इन हालात को देखते हुए कई ग्रामीण अभी से ऊंची जगहों पर झोपड़ी बनाने में जुट गए हैं।
चहलारी नई बस्ती के रहने वाले रामचंद्र, राजेश और राम आधार बुधवार को सीतापुर-बहराइच मार्ग के किनारे मारूबेहड़ के करीब झोपड़ी के लिए छप्पर बनाने में जुटे हुए थे। इन्होंने बताया कि घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। किसी भी वक्त बाढ़ आ सकती है। गांव में पानी घुसने पर अचानक परिवार समेत कहां जाएंगे, इसलिए अभी से झोपड़ी बना रहे हैं।
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जिले के गांजरी इलाके में हर साल घाघरा व शारदा नदियां भारी तबाही मचाती हैं। बाढ़ व कटान से सैकड़ों आशियाने उफनाती लहरों में समा जाते हैं। हजारों बीघा फसल डूब जाती है। घाघरा के तटवर्ती गार्गी पुरवा, दुर्गा पुरवा, नगीना पुरवा, मरैली, लोध पुरवा, रामलाल पुरवा, संबारी पुरवा, सुकई पुरवा, भगत सिकोरहर व जेतैहिया आदि दर्जनों मजरों के बाशिंदों को ऊंची जगहों पर डेरा डालना पड़ता है।
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बारिश का दौर जारी रहने से घाघरा के जलस्तर में दिन-ब-दिन इजाफा हो रहा है। इससे तटवर्ती गांवों के बाशिंदों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगी हैं। दरअसल, बाढ़ आने पर सैकड़ों ग्रामीणों को गांव से पलायन करना पड़ता है।
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ग्रामीण ऊंची जगहों पर झोपड़ी बनाकर अथवा तिरपाल तानकर परिवार समेत उसमें गुजर-बसर करने को विवश होते हैं। इन हालात को देखते हुए कई ग्रामीण अभी से ऊंची जगहों पर झोपड़ी बनाने में जुट गए हैं।
चहलारी नई बस्ती के रहने वाले रामचंद्र, राजेश और राम आधार बुधवार को सीतापुर-बहराइच मार्ग के किनारे मारूबेहड़ के करीब झोपड़ी के लिए छप्पर बनाने में जुटे हुए थे। इन्होंने बताया कि घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। किसी भी वक्त बाढ़ आ सकती है। गांव में पानी घुसने पर अचानक परिवार समेत कहां जाएंगे, इसलिए अभी से झोपड़ी बना रहे हैं।