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कटान में मिट गया फौजदारपुरवा का अस्तित्व
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रेउसा/रामपुर मथुरा/तंबौर। तराई इलाके में उफनाई शारदा व सरयू ने अब रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। बाढ़ ने शुक्रवार को सबसे अधिक नुकसान कर दिया। बिसवां तहसील के फौजदारपुरवा गांव का अस्तित्व समाप्त हो गया। प्राथमिक विद्यालय भी बाढ़ की भेंट चढ़ गया।
अब न तो गांव में कोई घर बचा है और न ही स्कूल। सभी परिवार पहले ही पलायन कर चुके हैं। वहीं लहरपुर व महमूदाबाद तहसील के करीब 35 गांवों में पानी भरा हुआ है। अखरी गांव के 15 घरों पर अब कटान का खतरा मंडरा रहा है। जलस्तर कम न होने से लोगों की मुसीबतें बढनी लगी है।
बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी से अब तराई में बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। प्रशासन भले ही अभी बाढ़ न आने की बात कह रहा हो लेकिन हालात किसी बाढ़ से कम नहीं हैं। बिसवां तहसील के फौजदारपुरवा गांव की आबादी करीब छह सौ थी।
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यहां 150 परिवार निवास कर रहे थे लेकिन इधर लगातार नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांव पर संकट खड़ा हो गया था। ज्यादातर परिवार पहले ही पलायन कर गए हैं।
शुक्रवार को जनकलाल, जगदीश, कन्हई व सनेही के घर कट गए। वहीं प्राथमिक विद्यालय पहले से ही पानी से चारों ओर घिर गया था। शुक्रवार रात पूरा विद्यालय भवन कटान में बह गया। इससे गांव का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो गया है। जहां पर गांव था, अब वहां पर न तो कोई घर बचा है न ही स्कूल व पेड़-पौधे। हर तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।
लेखपाल सदानंद ने बताया कि गांव का अस्तित्व पूरी तरह से मिट गया है। वहीं पासिनपुरवा में अब लहरें हिलोरे मार रही हैं। नंदकिशोर व रामदास के घर कटान में समा गए। मैनेजर, किशोर व दुर्गा प्रसाद पानी के डर की वजह से अपने घर तोड़ रहे हैं। परमेश्वरपुरवा में सुंदर, कैलाश, कमलेश व तीरथ के घर भी अब कटान के मुहाने पर आ गए हैं।
कई गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भर गया है। इससे गांव तक पहुंचने का अब कोई रास्ता भी नहीं बचा है। इससे ग्रामीण नावों के जरिये कहीं आ-जा रहे हैं। तहसीलदार अभिचल प्रताप सिंह ने बताया कि प्रभावित गांवों का बराबर भ्रमण किया जा रहा है। पीड़ित परिवार को मदद पहुंचाई जा रही है। पानी पर नजर बनाए रखी है।
लहरपुर तहसील के तंबौर इलाके से निकली शारदा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से गांवों में पानी भरा हुआ है। पानी के ठहराव से निचले इलाकों में नदी के किनारे के बाढ़ प्रभावित गांवों के हालात जस के तस बने हुए हैं। गुरुवार को बरक्षता, बरेला, हनुमानसिंह पुरवा व रजनापुर के चारों ओर पानी भर गया। शुक्रवार को पानी शिवपुर व नन्हूई में भी पहुंच गया।
इन गांवों के संपर्क मार्ग अभी तक प्रभावित हैं। क्षेत्रीय लेखपाल श्रवण कुमार ने पैदल जाकर बाढ़ की जानकारी ली। उधर नदी की दो धाराओं के बीच बसे मीतमउ, नकहा व परेवा गांव के घरों के अंदर तक पानी भरा हुआ है। अभी तक इन गांवों में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंच सका है। कोल्हुआपुरवा के पास तटबंध में पानी रिसने की जानकारी मिलने पर इसकी मरम्मत कर दी गई है। इससे नदी का पानी निकालना बंद हो गया है।
रामपुर मथुरा संवाद सूत्र के अनुसार महमूदाबाद तहसील के गांवों में पानी भरा होने से लोगों को अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी व कीचड़ से होकर ही गुजरना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या पशु पालकों को हो रही है। ग्रामीणों द्वारा रखा गया चारा व भूसा पूरी तरह भीग गया है। नायब तहसीलदार व लेखपाल द्वारा निरीक्षण किया गया है।
खुनापूरवा, बंगालीपुरवा, अखरी व सोंतीपुरवा में सूखा स्थान न होने के कारण लोगों को नित्य क्रियाओं के लिए भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं। करीब 30 परिवारों वाला ग्राम अखरी कभी नदी के किनारे होते हुए भी हरा-भरा और सुंदर दिखाई दे रहा था जो आज अपने अस्तित्व की समाप्ति की बाट जोह रहा है।
सरयू नदी की बाढ़ व कटान की दोहरी मार झेल रही इस गांव की आधी से अधिक आबादी दूरदराज के गांवों व सगे-संबंधियों के यहां शरण ले चुकी है। बचे हुए 15 परिवार भी लगातार आ रही बाढ़ से आजिज आकर धीरे-धीरे ऊंचे स्थानों पर जा रहे हैं। तहसीलदार महमूदाबाद अशोक कुमार ने बताया कि नावों की व्यवस्था कर दी गई है। इसके साथ ही लोगों को जरूरी मदद भी पहुंचाई जा रही है।
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अब न तो गांव में कोई घर बचा है और न ही स्कूल। सभी परिवार पहले ही पलायन कर चुके हैं। वहीं लहरपुर व महमूदाबाद तहसील के करीब 35 गांवों में पानी भरा हुआ है। अखरी गांव के 15 घरों पर अब कटान का खतरा मंडरा रहा है। जलस्तर कम न होने से लोगों की मुसीबतें बढनी लगी है।
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बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी से अब तराई में बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। प्रशासन भले ही अभी बाढ़ न आने की बात कह रहा हो लेकिन हालात किसी बाढ़ से कम नहीं हैं। बिसवां तहसील के फौजदारपुरवा गांव की आबादी करीब छह सौ थी।
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यहां 150 परिवार निवास कर रहे थे लेकिन इधर लगातार नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांव पर संकट खड़ा हो गया था। ज्यादातर परिवार पहले ही पलायन कर गए हैं।
शुक्रवार को जनकलाल, जगदीश, कन्हई व सनेही के घर कट गए। वहीं प्राथमिक विद्यालय पहले से ही पानी से चारों ओर घिर गया था। शुक्रवार रात पूरा विद्यालय भवन कटान में बह गया। इससे गांव का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो गया है। जहां पर गांव था, अब वहां पर न तो कोई घर बचा है न ही स्कूल व पेड़-पौधे। हर तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।
लेखपाल सदानंद ने बताया कि गांव का अस्तित्व पूरी तरह से मिट गया है। वहीं पासिनपुरवा में अब लहरें हिलोरे मार रही हैं। नंदकिशोर व रामदास के घर कटान में समा गए। मैनेजर, किशोर व दुर्गा प्रसाद पानी के डर की वजह से अपने घर तोड़ रहे हैं। परमेश्वरपुरवा में सुंदर, कैलाश, कमलेश व तीरथ के घर भी अब कटान के मुहाने पर आ गए हैं।
कई गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भर गया है। इससे गांव तक पहुंचने का अब कोई रास्ता भी नहीं बचा है। इससे ग्रामीण नावों के जरिये कहीं आ-जा रहे हैं। तहसीलदार अभिचल प्रताप सिंह ने बताया कि प्रभावित गांवों का बराबर भ्रमण किया जा रहा है। पीड़ित परिवार को मदद पहुंचाई जा रही है। पानी पर नजर बनाए रखी है।
लहरपुर तहसील के तंबौर इलाके से निकली शारदा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से गांवों में पानी भरा हुआ है। पानी के ठहराव से निचले इलाकों में नदी के किनारे के बाढ़ प्रभावित गांवों के हालात जस के तस बने हुए हैं। गुरुवार को बरक्षता, बरेला, हनुमानसिंह पुरवा व रजनापुर के चारों ओर पानी भर गया। शुक्रवार को पानी शिवपुर व नन्हूई में भी पहुंच गया।
इन गांवों के संपर्क मार्ग अभी तक प्रभावित हैं। क्षेत्रीय लेखपाल श्रवण कुमार ने पैदल जाकर बाढ़ की जानकारी ली। उधर नदी की दो धाराओं के बीच बसे मीतमउ, नकहा व परेवा गांव के घरों के अंदर तक पानी भरा हुआ है। अभी तक इन गांवों में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंच सका है। कोल्हुआपुरवा के पास तटबंध में पानी रिसने की जानकारी मिलने पर इसकी मरम्मत कर दी गई है। इससे नदी का पानी निकालना बंद हो गया है।
रामपुर मथुरा संवाद सूत्र के अनुसार महमूदाबाद तहसील के गांवों में पानी भरा होने से लोगों को अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी व कीचड़ से होकर ही गुजरना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या पशु पालकों को हो रही है। ग्रामीणों द्वारा रखा गया चारा व भूसा पूरी तरह भीग गया है। नायब तहसीलदार व लेखपाल द्वारा निरीक्षण किया गया है।
खुनापूरवा, बंगालीपुरवा, अखरी व सोंतीपुरवा में सूखा स्थान न होने के कारण लोगों को नित्य क्रियाओं के लिए भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं। करीब 30 परिवारों वाला ग्राम अखरी कभी नदी के किनारे होते हुए भी हरा-भरा और सुंदर दिखाई दे रहा था जो आज अपने अस्तित्व की समाप्ति की बाट जोह रहा है।
सरयू नदी की बाढ़ व कटान की दोहरी मार झेल रही इस गांव की आधी से अधिक आबादी दूरदराज के गांवों व सगे-संबंधियों के यहां शरण ले चुकी है। बचे हुए 15 परिवार भी लगातार आ रही बाढ़ से आजिज आकर धीरे-धीरे ऊंचे स्थानों पर जा रहे हैं। तहसीलदार महमूदाबाद अशोक कुमार ने बताया कि नावों की व्यवस्था कर दी गई है। इसके साथ ही लोगों को जरूरी मदद भी पहुंचाई जा रही है।