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Sitapur News: पितृ विसर्जन अमावस्या पर होगी पितरों की विदाई

Mon, 30 Sep 2024 01:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Mon, 30 Sep 2024 01:31 AM IST
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Farewell to ancestors on Amavasya
चक्रतीर्थ में स्नान करते श्रद्धालु।
नैमिषारण्य (सीतापुर)। पितृ विसर्जन अमावस्या 2 अक्तूबर को मनाई जाएगी। इस दिन देश-विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु नैमिष पहुंचेंगे। चक्रतीर्थ व आदि गंगा गोमती में स्नान कर श्रद्धालु अपने पितरों की मुक्ति के लिए पिंडदान व तर्पण करेंगे। यह दिन अपने पितरों के प्रति श्रद्धा भाव व्यक्त करने के लिए होता है। आश्विन मास की अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है।
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नैमिष तीर्थ भूमि का इस दिन विशेष महत्व है, इसे नाभि गया के नाम से भी जाना जाता है। यहां पितरों की तृप्ति के लिए पिंडदान, श्राद्ध व तर्पण करने से विशेष फल प्राप्त होता है। आचार्य प्रभाकर शास्त्री ने बताया कि इस दिन ब्राह्मण को भोजन कराने तथा दान देने से पितृ तृप्त हो जाते हैं। वे अपने पुत्रों को आशीर्वाद देकर जाते हैं। जिन परिवारों को अपने पितरों की तिथि याद नहीं रहती है या पितरों की तिथि ज्ञात होने पर भी यदि समय पर किसी कारण से श्राद्ध न हो पाए, तो उनका श्राद्ध भी इसी अमावस्या को कर देने से पितर संतुष्ट हो जाते हैं। जिनकी अकाल मृत्यु हो गई हो उनका भी श्राद्ध इसी अमावस्या के दिन किया जा सकता है। आचार्य ने बताया अमावस्या 1 अक्तूबर को रात में 9:39 बजे से लग जाएगी। जो 2 अक्तूबर की रात 12:18 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 2 अक्तूबर को सर्व पितृ अमावस्या मान्य होगी।
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दीपक जलाकर पितरों का मार्ग किया जाता आलोकित
आचार्य रमेश शास्त्री ने बताया कि इस पर्व को पितृ पक्ष का समापन पर्व भी कहते हैं। इस दिन शाम को दीपक जलाकर पूड़ी पकवान आदि खाद्य पदार्थ दरवाजे पर रखे जाते हैं। जिसका अर्थ है कि पितृ जाते समय भूखे न रह जाएं। इसी तरह दीपक जलाने का आशय उनके मार्ग को आलोकित करना है। पितृ विसर्जन अमावस्या का श्राद्ध पर्व किसी नदी, या सरोवर के तट पर या निजी आवास में भी हो सकता है।
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पीपल पेड़ की करें पूजा
पितृ अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर पूजन करें। इससे पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
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