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Sitapur News: तिरपाल से छनकर बिस्तर तक पहुंच रहीं ओस की बूंदे
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रामपुर मथुरा के चहलारी घाट-गनेशपुर तटबंध पर अखरी के पास तंबू त्रिपाल के नीचे जीवनयापन करते बाढ़ प
- फोटो : SITAPUR
रामपुर मथुरा(सीतापुर)। सरयू नदी की कटान से बेघर हुए 14 परिवार बंधे पर रात गुजारने को मजबूर हैं। इन परिवारों को छत नसीब नहीं हो सकी है। सर्द रातों में जब ओस की बूंदें पड़ती हैं तो तिरपाल से छनकर बिस्तर तक पहुंच जाती है। प्रशासनिक मदद के नाम पर फूटी कौड़ी तक नहीं मिली है।
महमूदाबाद तहसील के रामपुर मथुरा विकासखंड में प्रतिवर्ष बाढ़ आती है। बाढ़ में खेत कट जाते हैं। इस बार सरयू नदी की बाढ़ में अखरी, कनरखी, अंगरौरा, बाबाकुटी, शंकरपुरवा आदि गांवों के करीब 14 घर कटान में समा गए थे। इसके बाद से ये परिवार तटबंध पर जीवनयापन करने को मजबूर हो रहे हैं। अखरी निवासी सुमन तटबंध पर रह रही है। उन्होंने बताया कि घर कटे तीन माह हो गए हैं। अभी घर बनाने के लिए कोई जगह प्रशासन से नहीं मिली है। अब सर्द रातों में तिरपाल के नीचे रहना मुश्किल है।
राजेश ने बताया कि ठंड के महीनों में घने कोहरे के कारण तिरपाल भी टपकने लगता है। बिस्तर व कपड़े भीग जाते हैं। राकेश ने बताया कि यहां से 13 किमी. दूर रायसेनपुर गांव में जमीन देने की बात प्रशासन कह रहा है। इतनी दूर रहकर जीवनयापन का इंतजाम कैसे होगा। जो लोग पहले से वहां हैं उन्हें न तो मजदूरी का काम मिल रहा है और न ही बंटाई पर खेत। तटबंध पर अखरी, कनरखी, अंगरौरा, बाबाकुटी, शंकरपुरवा आदि गांवों को मिलाकर 10 हजार की आबादी निवास कर रही है। एसडीएम महमूदाबाद मिथिलेश त्रिपाठी ने बताया कि आसपास के गांवों में ग्राम पंचायत की जमीन न होने के कारण ही दूर बसाने की व्यवस्था की गई है।
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महमूदाबाद तहसील के रामपुर मथुरा विकासखंड में प्रतिवर्ष बाढ़ आती है। बाढ़ में खेत कट जाते हैं। इस बार सरयू नदी की बाढ़ में अखरी, कनरखी, अंगरौरा, बाबाकुटी, शंकरपुरवा आदि गांवों के करीब 14 घर कटान में समा गए थे। इसके बाद से ये परिवार तटबंध पर जीवनयापन करने को मजबूर हो रहे हैं। अखरी निवासी सुमन तटबंध पर रह रही है। उन्होंने बताया कि घर कटे तीन माह हो गए हैं। अभी घर बनाने के लिए कोई जगह प्रशासन से नहीं मिली है। अब सर्द रातों में तिरपाल के नीचे रहना मुश्किल है।
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राजेश ने बताया कि ठंड के महीनों में घने कोहरे के कारण तिरपाल भी टपकने लगता है। बिस्तर व कपड़े भीग जाते हैं। राकेश ने बताया कि यहां से 13 किमी. दूर रायसेनपुर गांव में जमीन देने की बात प्रशासन कह रहा है। इतनी दूर रहकर जीवनयापन का इंतजाम कैसे होगा। जो लोग पहले से वहां हैं उन्हें न तो मजदूरी का काम मिल रहा है और न ही बंटाई पर खेत। तटबंध पर अखरी, कनरखी, अंगरौरा, बाबाकुटी, शंकरपुरवा आदि गांवों को मिलाकर 10 हजार की आबादी निवास कर रही है। एसडीएम महमूदाबाद मिथिलेश त्रिपाठी ने बताया कि आसपास के गांवों में ग्राम पंचायत की जमीन न होने के कारण ही दूर बसाने की व्यवस्था की गई है।
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