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Sitapur News: अंत्येष्टि स्थल निर्माण में गड़बड़ी, सचिव और प्रशासक पर एफआईआर
Wed, 23 Sep 2026 12:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:40 AM IST
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गोंदलामऊ। ब्लॉक की ग्राम पंचायत नटवलग्रंट में अंत्येष्टि स्थल निर्माण के नाम पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत और जिला विकास अधिकारी संतोष नारायण गुप्ता की जांच आख्या के आधार पर जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने ग्राम विकास अधिकारी हरिमोहन मौर्य और प्रशासक बालकराम को प्रथम दृष्ट्या दोषी मानते हुए एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इस पर सहायक विकास अधिकारी पंचायत हंसराज ने संदना थाने में तहरीर दी। पुलिस दोनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
डीडीओ की जांच आख्या के अनुसार नटवलग्रंट में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण पंचायत राज विभाग के तहत कराया जाना था। इसके लिए जिला पंचायत राज अधिकारी ने दो किस्तों में कुल 24 लाख 11 हजार 640 रुपये ग्राम पंचायत के बैंक खाते में अंतरित किए थे। वहीं कंसल्टिंग इंजीनियर रवि सिंह ने 24 लाख 36 हजार रुपये का प्राक्कलन तैयार किया था। जांच में 21 सितंबर तक मौके पर केवल नींव की खोदी मिली। सहायक विकास अधिकारी हंसराज ने बताया कि डीएम के आदेश पर दोनों के खिलाफ एफआईआर कराई गई है। सीओ मिश्रिख विशाल गुप्ता ने बताया कि तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मेजरमेंट बुक के बिना 7.18 लाख का भुगतान
इस जांच में भुगतान और मौके पर सामग्री की स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया। आख्या के अनुसार बिना मेजरमेंट बुक के 14 सितंबर तक सीमेंट, सरिया, मौरंग और ईंट आदि के नाम पर मेसर्स भोलानाथ शुक्ला, संदना को 7 लाख 18 हजार 812 रुपये का भुगतान कर दिया गया। जबकि मौके पर केवल एक ट्रॉली मौरंग और एक ट्रॉली ईंट के टुकड़े मिले। जांच में प्रशासक बालकराम और ग्राम विकास अधिकारी हरिमोहन मौर्य को वित्तीय अनियमितता और लापरवाही के लिए दोषी माना गया।
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डीडीओ की जांच आख्या के अनुसार नटवलग्रंट में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण पंचायत राज विभाग के तहत कराया जाना था। इसके लिए जिला पंचायत राज अधिकारी ने दो किस्तों में कुल 24 लाख 11 हजार 640 रुपये ग्राम पंचायत के बैंक खाते में अंतरित किए थे। वहीं कंसल्टिंग इंजीनियर रवि सिंह ने 24 लाख 36 हजार रुपये का प्राक्कलन तैयार किया था। जांच में 21 सितंबर तक मौके पर केवल नींव की खोदी मिली। सहायक विकास अधिकारी हंसराज ने बताया कि डीएम के आदेश पर दोनों के खिलाफ एफआईआर कराई गई है। सीओ मिश्रिख विशाल गुप्ता ने बताया कि तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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मेजरमेंट बुक के बिना 7.18 लाख का भुगतान
इस जांच में भुगतान और मौके पर सामग्री की स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया। आख्या के अनुसार बिना मेजरमेंट बुक के 14 सितंबर तक सीमेंट, सरिया, मौरंग और ईंट आदि के नाम पर मेसर्स भोलानाथ शुक्ला, संदना को 7 लाख 18 हजार 812 रुपये का भुगतान कर दिया गया। जबकि मौके पर केवल एक ट्रॉली मौरंग और एक ट्रॉली ईंट के टुकड़े मिले। जांच में प्रशासक बालकराम और ग्राम विकास अधिकारी हरिमोहन मौर्य को वित्तीय अनियमितता और लापरवाही के लिए दोषी माना गया।
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