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पंच कोसी परिक्रमा में उमड़े श्रद्धालु
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सीतापुर। 84 कोसी परिक्रमा के बाद रविवार को परिक्रमार्थी पंच कोसी परिक्रमा के पथ पर रवाना हो गए। आस्था व उल्लास में डूबे परिक्रमार्थियों ने जय श्रीराम के नारों के बीच परिक्रमा पूरी की। उसके बाद मिश्रिख में अपने टीकासान पर पहुंचकर भजन कीर्तन में लीन रहे। 84 कोसी परिक्रमा शनिवार को अंतिम पड़ाव मिश्रिख पहुंच गई थी। अब यहां पर पांच दिवसीय पंच कोसी परिक्रमा शुरू हुई। रविवार भोर को परिक्रमार्थी अपनी दिनचर्या निपटाने के बाद पंच कोसी परिक्रमा के पथ पर रवाना हो गए।
कोई अकेले चल रहा था तो कोई परिवार को साथ लेकर चल रहा था। परिक्रमा पथ पर भी कई अद्भुत नजारे दिखाई दिए। बुजुर्ग कहीं लाठी के सहारे चल रहे थे तो कई युवा जल्द परिक्रमा पूरी करने के चक्कर में तेजी से दौड़ते चले जा रहे थे। करीब तीन घंटे परिक्रमा पूरी करके अपने टिकासन स्थान पर पहुंच गए। उसके बाद भजन कीर्तन में लीन रहे।
परिक्रमार्थियों के स्वागत के लिए जगह-जगह पर भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे में उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया। शाम के समय साधु संत अपने विभिन्न रूपों में पूजा अर्चना की तो इन साधु संतों को देखने के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ लगी रही। मिश्रिख में हर तरफ परिक्रमार्थियों का ही रेला दिखाई दे रहा है। इससे पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
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मेले में शुरू हुई खरीदारी
पंच कोसी परिक्रमा के साथ ही परिक्रमा मेला प्रारंभ हो गया है। अभी मेले का उद्घाटन नहीं हो सका है। शनिवार को मेले का उद्घाटन होना था, लेकिन उद्घाटन स्थगित कर दिया गया था। मेले में दुकानें पूरी तरह से सज गई है। जनपद सहित दूरदराज इलाके के तमाम व्यापारी यहां पर आकर अपनी दुकानें सजा ली है। इन दुकानों पर लोग खरीदारी करते हुए दिखाई दिए। यहां पर देर शाम तक खरीदारी होती रही।
दो साल बाद मेले का आयोजन
मिश्रिख परिक्रमा मेला दो वर्षों से नहीं हो रहा था। कोविड के कारण परिक्रमा तो हो रही थी लेकिन मेले स्थगित था। इससे यहां पर आने वाले परिक्रमार्थी परिक्रमा पूरी करके अपने घर को चले जाते थे। इस बार वह मेले में खरीदारी भी कर रहे है। मिश्रिख के मेला मैदान पर अब हर तरफ दुकानें ही दुकानें दिखाई दे रही है।
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कोई अकेले चल रहा था तो कोई परिवार को साथ लेकर चल रहा था। परिक्रमा पथ पर भी कई अद्भुत नजारे दिखाई दिए। बुजुर्ग कहीं लाठी के सहारे चल रहे थे तो कई युवा जल्द परिक्रमा पूरी करने के चक्कर में तेजी से दौड़ते चले जा रहे थे। करीब तीन घंटे परिक्रमा पूरी करके अपने टिकासन स्थान पर पहुंच गए। उसके बाद भजन कीर्तन में लीन रहे।
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परिक्रमार्थियों के स्वागत के लिए जगह-जगह पर भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे में उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया। शाम के समय साधु संत अपने विभिन्न रूपों में पूजा अर्चना की तो इन साधु संतों को देखने के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ लगी रही। मिश्रिख में हर तरफ परिक्रमार्थियों का ही रेला दिखाई दे रहा है। इससे पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
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मेले में शुरू हुई खरीदारी
पंच कोसी परिक्रमा के साथ ही परिक्रमा मेला प्रारंभ हो गया है। अभी मेले का उद्घाटन नहीं हो सका है। शनिवार को मेले का उद्घाटन होना था, लेकिन उद्घाटन स्थगित कर दिया गया था। मेले में दुकानें पूरी तरह से सज गई है। जनपद सहित दूरदराज इलाके के तमाम व्यापारी यहां पर आकर अपनी दुकानें सजा ली है। इन दुकानों पर लोग खरीदारी करते हुए दिखाई दिए। यहां पर देर शाम तक खरीदारी होती रही।
दो साल बाद मेले का आयोजन
मिश्रिख परिक्रमा मेला दो वर्षों से नहीं हो रहा था। कोविड के कारण परिक्रमा तो हो रही थी लेकिन मेले स्थगित था। इससे यहां पर आने वाले परिक्रमार्थी परिक्रमा पूरी करके अपने घर को चले जाते थे। इस बार वह मेले में खरीदारी भी कर रहे है। मिश्रिख के मेला मैदान पर अब हर तरफ दुकानें ही दुकानें दिखाई दे रही है।