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घायल के इलाज के लिए चिकित्सक और पुलिसकर्मियों में बहस
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महमूदाबाद/सीतापुर। महमूदाबाद थानाक्षेत्र में मार्ग दुर्घटना में घायल एक युवक को इलाज के लिए सीएचसी में भर्ती कराने के लिए पुलिस को नाकों चने चबाने पड़े। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक की घायल को लाने वाले पुलिसकर्मियों से करीब आधा घंटा बहस हुई। उसके बाद ही इलाज शुरू हो सका।
महमूदाबाद कोतवाली क्षेत्र के सलाउद्दीन निवासी सुशील कुमार बाइक से आ रहे थे। इस दौरान रात में शारदा नहर पुल के पास बाइक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में सुशील गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर पहुंचे हल्का इंचार्ज एजाज अहमद व एचसीपी रंजीत यादव घायल को निजी वाहन से सीएचसी महमूदाबाद लाए।
जब घायल को भर्ती कराने के लिए पुलिसकर्मी उसे स्ट्रेचर पर लादकर इमरजेंसी वार्ड ले जाने लगे तो वहां तैनात चिकित्सक ने बिना परिजनों की मौजूदगी के भर्ती से इंकार कर दिया। पुलिसकर्मी उसकी गंभीर हालत का हवाला देते हुए भर्ती कर इलाज शुरू कराने को कहते रहे पर डॉ. रोहित खरे लगातार भिड़े रहे। आधे घंटे की बहस के बाद घायल का इलाज शुरू हुआ।
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चिकित्सक के इस गैर जिम्मेदाराना रवैए से एक घायल घंटों जिंदगी मौत के बीच जूझता रहा। सीएससी अधीक्षक डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने कहा मामले की जांच की जा रही है।
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महमूदाबाद कोतवाली क्षेत्र के सलाउद्दीन निवासी सुशील कुमार बाइक से आ रहे थे। इस दौरान रात में शारदा नहर पुल के पास बाइक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में सुशील गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर पहुंचे हल्का इंचार्ज एजाज अहमद व एचसीपी रंजीत यादव घायल को निजी वाहन से सीएचसी महमूदाबाद लाए।
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जब घायल को भर्ती कराने के लिए पुलिसकर्मी उसे स्ट्रेचर पर लादकर इमरजेंसी वार्ड ले जाने लगे तो वहां तैनात चिकित्सक ने बिना परिजनों की मौजूदगी के भर्ती से इंकार कर दिया। पुलिसकर्मी उसकी गंभीर हालत का हवाला देते हुए भर्ती कर इलाज शुरू कराने को कहते रहे पर डॉ. रोहित खरे लगातार भिड़े रहे। आधे घंटे की बहस के बाद घायल का इलाज शुरू हुआ।
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चिकित्सक के इस गैर जिम्मेदाराना रवैए से एक घायल घंटों जिंदगी मौत के बीच जूझता रहा। सीएससी अधीक्षक डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने कहा मामले की जांच की जा रही है।