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बिना मान्यता के जिले में चल रहे सैकड़ों स्कूल

Fri, 14 Jul 2017 01:47 AM IST
Updated Fri, 14 Jul 2017 01:47 AM IST
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बिना मान्यता के जिले में चल रहे सैकड़ों स्कूल
बिना मान्यता के जिले में चल रहे सैकड़ों स्कूल
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बीईओ इनको चलवाने में निभाते महत्ती भूमिका
विभाग के पास ऐसे स्कूलों की नहीं सूचना
सीतापुर। जनपद में बिना मान्यता के सैकड़ों स्कूल चल रहे है। इन स्कूलों पर बेसिक शिक्षा विभाग बेअसर है। हालांकि जनपद में इनकी संख्या के बारे में विभाग के पास कोई आंकड़ा नहीं है। यह इसलिए है कि बीएसए ने कई बार बीईओ से बगैर मान्यता चलने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सूची तलब की थी। लेकिन बीईओ ने विभाग को इसकी सूचना नहीं दी। ऐसे में इन स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद है। वह मनमाने तरीके से अभिभावकों का शोषण कर रहे है। जनपद में बिना मान्यता के सैकड़ों स्कूल चल रहे है। इनके पास न तो अपना भवन है न ही मान्यता। इसकी हकीकत कई बार निरीक्षण में सामने आ चुकी है। शासन द्वारा ऐसे स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिए गया था। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इन निर्देशों की कोई परवाह नहीं की। बीएसए ने करीब तीन माह पहले सभी बीईओ से ऐसे स्कूल चिह्नित करते हुए सूची तलब की थी। उसके बाद इनके खिलाफ कार्रवाई होनी थी। लेकिन बीईओ ने आज तक इनकी सूची विभाग को नहीं सौंपी है। ऐसे में यह स्कूल मनमाने तरीके से चल रहे है। विभाग के पास इनकी कोई सूचना नहीं है।
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दो बरस में दो पर हुई कार्रवाई
अगर पिछले दो बरस में बिना मान्यता वाले स्कूलों पर कार्रवाई की बात की जाए तो विभाग के पास बताने को कुछ भी नहीं है। इस बरस ही तपस्या एकेडमी बिसवां व बाल मुकुंद मेमोरियल स्कूल लहरपुर के खिलाफ बीएसए पन्नाराम द्वारा एफआईआर कराई गई है। यह स्कूल बिना मान्यता के चल रहे थे। यह कार्रवाई इसलिए हुई क्योंकि जिलाधिकारी से शिकायत हुई थी। शिकायत के आधार पर जांच पड़ताल में कार्रवाई हो सकी।
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क्या होती है कार्रवाई
बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक नियमानुसार अगर कोई स्कूल बिना मान्यता के चलते मिलता है तो उसके खिलाफ फौरी तौर पर एक लाख का जुर्माना लगाया जाता है। स्कूल का संचालन बंद करा दिया जाता है। इसके बावजूद अगर स्कूल खुलता है तो रोजाना दस हजार रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाया जाता है। लेकिन ऐसी कार्रवाई अब तक किसी स्कूल के खिलाफ नहीं हो सकी है।
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मान्यता की लटकी रहती है फाइलें
बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक पिछले बरस ही कुछ विद्यालयों को मान्यता मिली थी। इस समय करीब 150 फाइलें मान्यता के लिए लटकी पड़ी है। इस बरस मान्यता की कार्रवाई न होने से फाइलों की संख्या बढ़ती जा रही है। जब मान्यता की कार्रवाई होती है तो तमाम फाइलें इस वजह से रिजेक्ट हो जाती है कि उनमें मानक पूरे नहीं होते है। संचालकों का कहना है मान्यता लेने के लिए मानक पूरा करना कोई आसान तरीका नहीं है।
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क्यों नहीं होती है कार्रवाई
एक संचालक ने बताया बिना खंड शिक्षाधिकारी के अनुमति के कोई स्कूल उस इलाके में नहीं चल सकता है। बीईओ को इसकी जानकारी होती है। इसके बदले बीईओ प्रतिमाह हर्जाना वसूलते है। साथ ही सलाह देते है आप मान्यता की फाइल जमा कर दो। अगर कोई दिक्कत होती है तो बता देना मान्यता की कार्रवाई चल रही है। अगर कार्रवाई कर देेंगे तो उनको हर्जाना मिलना बंद हो जाएगा। इसी वजह से इन पर लगाम नहीं लग पाती है।
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डीएम भी जता चुकी है नाराजगी
हाल ही में जिलाधिकारी डॉ. सारिका मोहन को तहसील दिवस में शिकायत मिली थी कि लहरपुर में बिना मान्यता के जर्जर भवन में स्कूल चल रहा था। इस निर्देश पर बीएसए ने छापा मारा तो शिकायत सही निकली। जिस पर डीएम ने टिप्पणी की थी कि यह स्कूल लंबे समय से चल रहा था। अगर शिकायत न मिलती तो कार्रवाई नहीं होती है। इससे प्रतीत होता है कि विभागीय अधिकारियों की इसमें मिलीभगत है। इसलिए पूरे जनपद में अभियान चलाया जाए।

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बंद होगे ऐसे स्कूल
बिना मान्यता के जनपद में चल रहे स्कूलों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। इसको लेकर सभी बीईओ से कार्रवाई करते हुए स्कूलों की सूची तलब की गई है। किसी भी हालात में ऐसे स्कूल चलने नहीं दिए जाएंगे।
- पन्नाराम, बीएसए
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