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दलित का घर फूंकने पर तीन को उम्रकैद
Updated Sat, 05 May 2018 11:49 PM IST
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महोली थानाक्षेत्र के बरातपुर में वर्ष 2008 में अंजाम दी गई थी वारदात
सीतापुर। अपर सत्र न्यायाधीश परमानंद शुक्ला ने दलित के घर में आग लगाने के आरोप में तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उन पर 12-12 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी संयुक्त निदेशक अभियोजन हरपाल सिंह ने की।
मालूम हो, कि महोली व थानाक्षेत्र के बरातपुर निवासी प्रमोद कुमार ने इस आशय की प्राथमिकी थाने में दर्ज कराई थी। प्रमोद के मुताबिक खेत की गन्ने की फसल जबरदस्ती चराने से मना करने पर उसी के गांव के जयकरन सिंह, अनिल सिंह, सुनील सिंह व रामऔतार उससे नाराज थे।
इसी नाराजगी के चलते 13 अगस्त 2008 की देर शाम जब वह अपने कच्चे मकान में अपनी पत्नी नीलम के साथ लेटा था। तभी उक्त चारों लोग नाजायज देशी असलहा, बांका व चाकू लेकर घर आ गए। विरोध करने पर चारों आरोपियों ने प्रमोद के घर में आग लगा दी।
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घटना की सूचना थाने पर दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। सुनाई के दौरान रामऔतार की मृत्यु हो जाने के चलते शेष तीन आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य आमंत्रित किए गए। पत्रावली पर आए साक्ष्य को समुचित पाते हुए न्यायालय ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास व 12-12 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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सीतापुर। अपर सत्र न्यायाधीश परमानंद शुक्ला ने दलित के घर में आग लगाने के आरोप में तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उन पर 12-12 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी संयुक्त निदेशक अभियोजन हरपाल सिंह ने की।
मालूम हो, कि महोली व थानाक्षेत्र के बरातपुर निवासी प्रमोद कुमार ने इस आशय की प्राथमिकी थाने में दर्ज कराई थी। प्रमोद के मुताबिक खेत की गन्ने की फसल जबरदस्ती चराने से मना करने पर उसी के गांव के जयकरन सिंह, अनिल सिंह, सुनील सिंह व रामऔतार उससे नाराज थे।
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इसी नाराजगी के चलते 13 अगस्त 2008 की देर शाम जब वह अपने कच्चे मकान में अपनी पत्नी नीलम के साथ लेटा था। तभी उक्त चारों लोग नाजायज देशी असलहा, बांका व चाकू लेकर घर आ गए। विरोध करने पर चारों आरोपियों ने प्रमोद के घर में आग लगा दी।
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घटना की सूचना थाने पर दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। सुनाई के दौरान रामऔतार की मृत्यु हो जाने के चलते शेष तीन आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य आमंत्रित किए गए। पत्रावली पर आए साक्ष्य को समुचित पाते हुए न्यायालय ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास व 12-12 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।