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इस बार 175 एकड़ में होगी काले गेहूं की पैदावार

Mon, 14 Dec 2020 11:02 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Dec 2020 11:02 PM IST
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Black wheat will be produced in 175 acres
सीतापुर। कृषि वैज्ञानिक की देखरेख में तैयार नई प्रजाति का काला गेहूं बोने में इस बार किसानों ने रुचि दिखाई है। करीब दो सौ से अधिक किसानों ने इसे 175 एकड़ में बोया है। यह उनके खेतों में लहलहा रहा है। काला गेहूं लोगों की सेहत की लिए लाभदायक है। शुगर फ्री होने के कारण यह डायबिटीज के मरीजों के लिए उपयोगी है। काले गेहूं का बीज राष्ट्रीय कृषि खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान मोहाली (पंजाब) ने विकसित किया है। वर्ष 2010 में इस पर शोध हुआ और सात वर्षों के बाद इसेे तैयार किया गया। इसका नाम नाबी-एमजी रखा गया है।
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यह काले रंग के अलावा नीले व जामुनी रंग में भी मौजूद है। इसमें सामान्य गेहूं के मुकाबले एंथोसायनिन की मात्रा अधिक होती है। इसलिए इसका रंग काला होता है। काले गेहूं में प्रोटीन, स्टार्च तो सामान्य होते हैं। लेकिन जिंक एवं आयरन की मात्रा सामान्य की तुलना में अधिक होती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. डीएस श्रीवास्तव की देखरेख में जिले में इसका बीज बीते साल तैयार किया गया। जिन प्रगतिशील किसानों ने बीज तैयार किया था, उनसे जिले के अन्य किसानों ने खरीदकर इसकी बुआई की है।
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इससे प्रगतिशील किसानों को आर्थिक फायदा भी हुआ है। अधिक बुआई होने से अगले साल बीज की कमी नहीं रहेगी। किसानों की आय में बढ़ोत्तरी के साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद रहेगा।
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कई बीमारियों में है मददगार
काल गेहूं कैंसर, शुगर, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल, तनाव, दिल की बीमारी सहित 12 बीमारियों में मददगार साबित होगा। इसकी खेती दोमट मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन काली दोमट में अधिक उत्पादन मिलता है। यह 110 से 120 दिन में पककर तैयार हो जाता है।
बीते साल 10 एकड़ में हुई थी खेती
बीते साल काले गेहूं की खेती लगभग 10 एकड़ से शुरू हुई थी। इस बार यह करीब 175 एकड़ तक पहुंच गई है। ब्लाक मिश्रिख के ग्राम दशरथपुर निवासी प्रगतिशील किसान कमलेश सिंह ने एक एकड़ काला गेहूं बोया है। वह बताते हैं कि फसल बहुत अच्छी है। इससे अधिक उपज की उम्मीद है। पिसांवा ब्लाक के ग्राम रमुवापुर निवासी सुरेन्द्र सिंह एवं अनंतापुर निवासी गुड्डू ने बताया कि लगभग डेढ़ एकड़ में बुआई की है फसल की ग्रोथ अच्छी है।
ग्राम भिठौरा निवासी शिवसागर सिंह ने एक एकड़ में बोया है। वह बताते हैं कि फसल का जमाव अच्छा हुआ है। पौधों में शाखाएं भी पर्याप्त निकली हैं। मुस्तफाबाद के कल्लू सिंह एवं पहला के मोहम्मदपुर कला निवासी प्रगतिशील किसान उमेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि फसल में अभी तक कोई रोग नहीं लगा है। ठीकठाक उपज होने की उम्मीद है। बीहट बीरम निवासी राहुल सिंह ने तीन बीघा बुआई की है। दशरथपुर निवासी राकेश सिंह, कौशल सिंह, रमुवापुर निवासी सुधाकर सिंह, बीरेन्द्र सिंह, भिठौरा के शत्रोहन सिंह, सियाराम, नीशू सिंह आदि किसानों ने काला गेहूं बोया है।

साधारण गेहूं की अपेक्षा काला गेहूं में एंथोसायनिन अधिक पीपीएम में पाया जाता है। इसलिए इसका रंग काला होता है। एंथोसायनिन एक नेचुरल एंटी आक्सीडेंट है। इसलिए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। यह गेहूं पौष्टिक एवं स्वास्थ्यप्रद है। मूल्य संवर्धित उत्पाद बढ़ाने में कारगर है। इस बार इसे बोने में अधिक किसानों ने रुचि दिखाई है। यह किसानों की आमदनी बढ़ाने में सार्थक कदम होगा।
- डॉ. डीएस श्रीवास्तव, वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र कटिया
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