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Sitapur News: मांगी गई रकम न देने पर लाभार्थी को आवास की नहीं मिली मजदूरी
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सीतापुर। पीएम आवास व मनरेगा योजना में जिम्मेदार लाभार्थियों को परेशान कर रहे हैं। उनसे पैसे की मांग करते हैं। अन्यथा लाभ से वंचित किया जाता है। एक मामले में रोजगार सेवक और प्रधान प्रतिनिधि की ओर से मांगी गई धनराशि न मिलने पर लाभार्थी को मजदूरी की धनराशि नहीं दी गई।
दूसरे जॉब कार्ड के खाते में यह धनराशि भेज दी गई। शिकायत होने पर लोकपाल मनरेगा की जांच में इसका खुलासा होने पर उन्होंने वसूली सहित अन्य कार्रवाई की संस्तुति की है।
प्रकरण सकरन ब्लॉक की ग्राम पंचायत पखनियापुर का है। यहां की रहने वाली सुलोचना देवी ने मनरेगा लोकपाल से शिकायत किया। इसमें आरोप लगाया कि साल 2020-21में पीएम आवास मिला था, जिसकी पहली किश्त से प्रधान और पंचायत मित्र की ओर से 10 हजार रुपये लिए गए। दूसरी किश्त से भी 10 हजार की मांग की गई।
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इसे न देने पर मजदूरी की धनराशि दूसरे जॉब कार्ड पर भेजी गई। इसकी जांच लोकपाल मनरेगा डा. अरविंद प्रताप सिंह यादव ने मौके पर तकनीकी सहायक सुनील कुमार शुक्ला के साथ की।
इसमें रोजगार सेवक और प्रधान प्रतिनिधि की ओर से पांच-पांच हजार लिए जाने और मजदूरी न मिलने की बात संबंधित के बयानों के आधार पाई गई। बयान पर रोजगार सेवक ने भी हस्ताक्षर किए।
इसके बाद दोनों का जवाब तलब किया गया लेकिन उनकी ओर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। लोकपाल ने बताया प्रकरण में शिकायत सही पाए जाने पर रोजगार सेवक और प्रधान प्रतिनिधि पर दोष सिद्ध होता है। नियमानुसार वसूली और विभागीय कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी गई है।
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दूसरे जॉब कार्ड के खाते में यह धनराशि भेज दी गई। शिकायत होने पर लोकपाल मनरेगा की जांच में इसका खुलासा होने पर उन्होंने वसूली सहित अन्य कार्रवाई की संस्तुति की है।
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प्रकरण सकरन ब्लॉक की ग्राम पंचायत पखनियापुर का है। यहां की रहने वाली सुलोचना देवी ने मनरेगा लोकपाल से शिकायत किया। इसमें आरोप लगाया कि साल 2020-21में पीएम आवास मिला था, जिसकी पहली किश्त से प्रधान और पंचायत मित्र की ओर से 10 हजार रुपये लिए गए। दूसरी किश्त से भी 10 हजार की मांग की गई।
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इसे न देने पर मजदूरी की धनराशि दूसरे जॉब कार्ड पर भेजी गई। इसकी जांच लोकपाल मनरेगा डा. अरविंद प्रताप सिंह यादव ने मौके पर तकनीकी सहायक सुनील कुमार शुक्ला के साथ की।
इसमें रोजगार सेवक और प्रधान प्रतिनिधि की ओर से पांच-पांच हजार लिए जाने और मजदूरी न मिलने की बात संबंधित के बयानों के आधार पाई गई। बयान पर रोजगार सेवक ने भी हस्ताक्षर किए।
इसके बाद दोनों का जवाब तलब किया गया लेकिन उनकी ओर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। लोकपाल ने बताया प्रकरण में शिकायत सही पाए जाने पर रोजगार सेवक और प्रधान प्रतिनिधि पर दोष सिद्ध होता है। नियमानुसार वसूली और विभागीय कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी गई है।