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गांजर में हाहाकार, 105 गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
Updated Tue, 07 Aug 2018 12:05 AM IST
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शारदा व घाघरा का कहर : क्षेत्र के कई संपर्क मार्ग पानी में डूबे, हजारों बीघा खेती जलमग्न
रेउसा/ सीतापुर। आखिर वही हुआ, जिसका भय गांजर के बाशिंदों को सता रहा था। उफान मारती घाघरा की लहरें रविवार की रात आबादी में घुस गई। बाढ़ का पानी आबादी में ऐसा वैसा नहीं घुसा, बल्कि कुछ ही पल में 105 गांव बाढ़ की जद में आ गए। खेत, खलिहान, सड़कें व घर हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था।
करीब छह हजार से अधिक परिवार बाढ़ के पानी में फंस गए हैं। 36,000 से अधिक की आबादी बाढ़ का दंश झेल रही है। बाढ़ आते ही प्रशासन के दावों की पोल खुल गई है। जो परिवार बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं, उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रशासन के सारे दावे झूठे साबित हो रहे हैं।
लोग जान जोखिम में डालकर खुद ही बाढ़ के पानी से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में हाहाकार मच गया। यहां बता दें कि बीते दो सप्ताह से रेउसा क्षेत्र के गांजरी इलाके में घाघरा के तटीय क्षेत्र के बाशिंदे बाढ़ आने के संदेह में दहशतजदा थे। वे लगातार बढ़ रहे घाघरा के पानी को देखकर भयभीत थे और संदेह जता रहे थे कि किसी भी वक्त बाढ़ आ सकती है।
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लेकिन प्रशासन ऐसे कयासों को यह कहकर विराम लगा रहा था कि अभी ऐसे हालात नहीं हैं। रविवार की रात घाघरा इस कदर उफनाई की रातोंरात रेउसा क्षेत्र के कोनी, दुर्गा पुरवा, सुकई पुरवा, जैतहिया, मरेली, कटैला पुरवा, परमेश्वर पुरवा, रामलाल पुरवा, लोध पुरवा, दर्जिन रेती, फौजदार पुरवा, सोमवारी पुरवा, चौकी, ठेकेदार पुरवा समेत करीब 105 गांव बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए।
नदी इस कदर उफनाई कि बाढ़ का पानी आबादी में तो घुसा ही, वहीं घरों में घुटनों तक पानी भर गया। क्या रसोई, क्या शयनकक्ष हर जगह पानी ही पानी नजर आ रहा है। बाढ़ का सबसे जबरदस्त कहर कोनी गांव पर टूट रहा है। जहां के बाशिंदे किराये की नावों से सुरक्षित ठिकानों को पलायन कर रहे हैं।
जिनके पास रुपये नहीं हैं, वे जान जोखिम में डालकर बाढ़ के पानी से निकलने का प्रयास कर रहे हैं। कोई बच्चों को कंधों पर ढो रहा है, तो कोई घर के अनाज को सिर पर रखकर बचाने के प्रयास में जुटा हुआ है। कुल मिलाकर हर तरफ त्राहि-त्राहि मची हुई है और प्रशासन के मदद के दावे पूरी तरह से फेल नजर आ रहे हैं।
हालत यह है कि पीड़ितों को बाढ़ के पानी से निकालना तो दूर की बात है। उन्हें सुरक्षित ठिकाना देने का भी इंतजाम नहीं किया गया है। बाढ़ पीड़ित जैसे तैसे जान जोखिम में डालकर निकल भी आएं, तो भी उन्हें सिर ढकने के लिए छत मयस्सर नहीं होगी। कुल मिलाकर बाढ़ पीड़ित भगवान भरोसे ही हैं।
पूरे क्षेत्र के संपर्क मार्ग भी बाढ़ के पानी में समा गए हैं, इससे इस क्षेत्र में बाशिंदे अब नावों के सहारे ही रह गए हैं। दूसरी तरफ हजारों बीघा खेती भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई है। एक अनुमान के मुताबिक रेउसा क्षेत्र में 25 हजार बीघे से अधिक की खेती जलमग्न है, वहीं बाढ़ का पानी जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उससे दायरा और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।
जहां गांजरी इलाके का यह हाल है, वहीं सोमवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 243470 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। लोगों का कहना है कि यह पानी जलस्तर में और इजाफा करेगा। नतीजा साफ है कि आने वाले दिनों में भी गांजरी क्षेत्र के हालात और खराब होने वाले हैं।
कोनी गांव में पलायन तेज
इस बार नदी का कहर प्रमुख रूप से कोनी गांव पर बरप रहा है। यही वजह है कि इस गांव के बाशिंदे बड़ी ही तेजी से पलायन कर रहे हैं। इस गांव में करीब 65 परिवारों के घर मौजूद हैं। सबसे डराने वाली बात यह है कि नदी यहां पर बाढ़ के साथ कटान भी कर रही है।
यही वजह रही कि गांव के साधू, मुन्नी लाल, कमलेश, बाल ज्योती, संतोष कु मार, लेखराज, राजू, ननकन्ने, झब्बर, ओमप्रकाश, रामसागर, भगौती, सियाराम, रामलाल, लोटन, जोद्धी, किशोरी, मुरली, श्रीकेशन, छैलू आदि 35 परिवारों ने कटान के भय से पलायन शुरू कर दिया है। ये सभी परिवार किराए की नावों पर सामान ढो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि 35 परिवारों के घर कटान के मुहाने पर हैं। यही वजह है कि सबसे पहले इन्हीं परिवारों ने घर छोड़ा है। ये परिवार घरों से तो निकल गए हैं, लेकिन बाढ़ के पानी से बाहर आने के लिए जद्दोजहद कर हैं। कुल मिलाकर बाढ़ पीड़ित फंसकर रह गए हैं, जो खुद ही मुसीबत का सामना कर रहे हैं।
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रेउसा/ सीतापुर। आखिर वही हुआ, जिसका भय गांजर के बाशिंदों को सता रहा था। उफान मारती घाघरा की लहरें रविवार की रात आबादी में घुस गई। बाढ़ का पानी आबादी में ऐसा वैसा नहीं घुसा, बल्कि कुछ ही पल में 105 गांव बाढ़ की जद में आ गए। खेत, खलिहान, सड़कें व घर हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था।
करीब छह हजार से अधिक परिवार बाढ़ के पानी में फंस गए हैं। 36,000 से अधिक की आबादी बाढ़ का दंश झेल रही है। बाढ़ आते ही प्रशासन के दावों की पोल खुल गई है। जो परिवार बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं, उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रशासन के सारे दावे झूठे साबित हो रहे हैं।
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लोग जान जोखिम में डालकर खुद ही बाढ़ के पानी से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में हाहाकार मच गया। यहां बता दें कि बीते दो सप्ताह से रेउसा क्षेत्र के गांजरी इलाके में घाघरा के तटीय क्षेत्र के बाशिंदे बाढ़ आने के संदेह में दहशतजदा थे। वे लगातार बढ़ रहे घाघरा के पानी को देखकर भयभीत थे और संदेह जता रहे थे कि किसी भी वक्त बाढ़ आ सकती है।
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लेकिन प्रशासन ऐसे कयासों को यह कहकर विराम लगा रहा था कि अभी ऐसे हालात नहीं हैं। रविवार की रात घाघरा इस कदर उफनाई की रातोंरात रेउसा क्षेत्र के कोनी, दुर्गा पुरवा, सुकई पुरवा, जैतहिया, मरेली, कटैला पुरवा, परमेश्वर पुरवा, रामलाल पुरवा, लोध पुरवा, दर्जिन रेती, फौजदार पुरवा, सोमवारी पुरवा, चौकी, ठेकेदार पुरवा समेत करीब 105 गांव बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए।
नदी इस कदर उफनाई कि बाढ़ का पानी आबादी में तो घुसा ही, वहीं घरों में घुटनों तक पानी भर गया। क्या रसोई, क्या शयनकक्ष हर जगह पानी ही पानी नजर आ रहा है। बाढ़ का सबसे जबरदस्त कहर कोनी गांव पर टूट रहा है। जहां के बाशिंदे किराये की नावों से सुरक्षित ठिकानों को पलायन कर रहे हैं।
जिनके पास रुपये नहीं हैं, वे जान जोखिम में डालकर बाढ़ के पानी से निकलने का प्रयास कर रहे हैं। कोई बच्चों को कंधों पर ढो रहा है, तो कोई घर के अनाज को सिर पर रखकर बचाने के प्रयास में जुटा हुआ है। कुल मिलाकर हर तरफ त्राहि-त्राहि मची हुई है और प्रशासन के मदद के दावे पूरी तरह से फेल नजर आ रहे हैं।
हालत यह है कि पीड़ितों को बाढ़ के पानी से निकालना तो दूर की बात है। उन्हें सुरक्षित ठिकाना देने का भी इंतजाम नहीं किया गया है। बाढ़ पीड़ित जैसे तैसे जान जोखिम में डालकर निकल भी आएं, तो भी उन्हें सिर ढकने के लिए छत मयस्सर नहीं होगी। कुल मिलाकर बाढ़ पीड़ित भगवान भरोसे ही हैं।
पूरे क्षेत्र के संपर्क मार्ग भी बाढ़ के पानी में समा गए हैं, इससे इस क्षेत्र में बाशिंदे अब नावों के सहारे ही रह गए हैं। दूसरी तरफ हजारों बीघा खेती भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई है। एक अनुमान के मुताबिक रेउसा क्षेत्र में 25 हजार बीघे से अधिक की खेती जलमग्न है, वहीं बाढ़ का पानी जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उससे दायरा और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।
जहां गांजरी इलाके का यह हाल है, वहीं सोमवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 243470 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। लोगों का कहना है कि यह पानी जलस्तर में और इजाफा करेगा। नतीजा साफ है कि आने वाले दिनों में भी गांजरी क्षेत्र के हालात और खराब होने वाले हैं।
कोनी गांव में पलायन तेज
इस बार नदी का कहर प्रमुख रूप से कोनी गांव पर बरप रहा है। यही वजह है कि इस गांव के बाशिंदे बड़ी ही तेजी से पलायन कर रहे हैं। इस गांव में करीब 65 परिवारों के घर मौजूद हैं। सबसे डराने वाली बात यह है कि नदी यहां पर बाढ़ के साथ कटान भी कर रही है।
यही वजह रही कि गांव के साधू, मुन्नी लाल, कमलेश, बाल ज्योती, संतोष कु मार, लेखराज, राजू, ननकन्ने, झब्बर, ओमप्रकाश, रामसागर, भगौती, सियाराम, रामलाल, लोटन, जोद्धी, किशोरी, मुरली, श्रीकेशन, छैलू आदि 35 परिवारों ने कटान के भय से पलायन शुरू कर दिया है। ये सभी परिवार किराए की नावों पर सामान ढो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि 35 परिवारों के घर कटान के मुहाने पर हैं। यही वजह है कि सबसे पहले इन्हीं परिवारों ने घर छोड़ा है। ये परिवार घरों से तो निकल गए हैं, लेकिन बाढ़ के पानी से बाहर आने के लिए जद्दोजहद कर हैं। कुल मिलाकर बाढ़ पीड़ित फंसकर रह गए हैं, जो खुद ही मुसीबत का सामना कर रहे हैं।