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रडार बताएगा जिले के मौसम का हाल
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रडार बताएगा जिले के मौसम का हाल
मौसम वैज्ञानिकों को मिलेगी पल-पल की सूचना
वर्षा वाले बादल से पहले आएगा अलर्ट
-कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना में बन रहा ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन, पुणे से उपकरण पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में वर्षा और तापमान में गिरावट से अत्यधिक सर्दी के आने से पहले से अलर्ट आएगा। अब रडार के सेंसर से जिले में मौसम की जानकारी पहले की अपेक्षा ज्यादा सटीक मिलेगी। कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना में अब कृषि विज्ञान केंद्र में स्वाचालित मौसम वेधशाला (आटोमैटिक वेदर स्टेशन) स्थापित किया जा रहा है। रडार सेट कर दिया गया है, सेंसर लगाते ही 24 घंटे पल पल की डिजिटल रिपोर्ट मिलती रहेगी। इससे लोगों को सुविधा मिलेगी और किसानों को समय से पहले सतर्क होने का अवसर मिलेगा।
स्वचालित मौसम वेधशाला के लिए पुणे से उपकरण की पहली खेप पहुंच चुकी है। जबकि उपकरण के शेष भाग को लाने के लिए एक और खेप आनी है। इसके बाद संयंत्र लगाने का काम शुरू होगा, जबकि मौसम वैज्ञानिक व मौसम पर्यवेक्षक इस केंद्र में पदस्थ हो गए हैं। नेपाल के तराई क्षेत्र सिद्धार्थनगर में वर्षा अधिक होती है। पहाड़ियों से मानसूनी हवाएं टकराती हैं तो ठहरे हुए बादल यहां ज्यादा बरसते हैं। ज्यादा बारिश और चार नदियों के कारण जिले में बाढ़ से क्षति होती है। इस कारण मौसम की सटीक जानकारी ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। अब जिला से लेकर प्रखंड तक विस्तार पूर्वक मौसम पूर्वानुमान संबंधी का आंकड़ा मिलेगा।
जैसे जैसे मौसम बदलेगा, वैसे ही मिलेगी रिपोर्ट
मौसम विशेषज्ञ सूर्य प्रकाश सिंह ने बताया कि स्वचालित मौसम वेधशाला में जहां दैनिक तापमान, वर्षा, सूर्य का प्रकाश, आर्द्रता, वायु वेग, मृदा तापमान, वाष्प आदि दर्ज किये जाते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग नई दिल्ली के सानिध्य में इसका निर्माण हो रहा है। मौसम विभाग के ही कर्मचारी वेधशाला की देखरेख और संचालन करेंगे। इस संयंत्र के शुरू होने के बाद पांच दिन पहले ही मौसम के पूर्वानुमान की सटीक जानकारी मिल सकेगी, जबकि जैसे जैसे मौसम बदलेगा, वैसे ही रिपोर्ट मिलेती रहेगी। किसान बेहतर तरीके से कृषि कार्य कर सकेंगे। इससे प्राकृतिक आपदा के समय फसल की सुरक्षा हो पाएगी। इससे पशुधन प्रबंधन व अन्य कृषि क्रियाकलापों में सहूलियत होगी।
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कोरोना काल में हुई देर
स्वचालित मौसम वेधशाला में रडार सेट कर दिया गया है। सेंसर के उपकरण लगाए जाने के बाद रिपोर्ट मिलने लगेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण दिल्ली से उपकरणों को नहीं मंगाया जा सका। जिले को कोरोना मुक्त होने के बाद मौसम वेधशाला शुरू हो जाएगी।
स्वचालित मौसम वेधशाला जिले के लिए बड़ा उपयोगी साबित होगा। यह जिला बाढ़ग्रस्त है और ज्यादातर लोगों की आजीविका खेती किसानी पर निर्भर है। सेंसर के उपकरण आने के बाद इस केंद्र की शुरूआत हो जाएगी। जल्द ही मौसम वेधशाला शुरू हो जाएगी।
डॉ. एलसी वर्मा, केंद्र प्रभारी/ वरिष्ठ वैज्ञानिक
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मौसम वैज्ञानिकों को मिलेगी पल-पल की सूचना
वर्षा वाले बादल से पहले आएगा अलर्ट
-कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना में बन रहा ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन, पुणे से उपकरण पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में वर्षा और तापमान में गिरावट से अत्यधिक सर्दी के आने से पहले से अलर्ट आएगा। अब रडार के सेंसर से जिले में मौसम की जानकारी पहले की अपेक्षा ज्यादा सटीक मिलेगी। कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना में अब कृषि विज्ञान केंद्र में स्वाचालित मौसम वेधशाला (आटोमैटिक वेदर स्टेशन) स्थापित किया जा रहा है। रडार सेट कर दिया गया है, सेंसर लगाते ही 24 घंटे पल पल की डिजिटल रिपोर्ट मिलती रहेगी। इससे लोगों को सुविधा मिलेगी और किसानों को समय से पहले सतर्क होने का अवसर मिलेगा।
स्वचालित मौसम वेधशाला के लिए पुणे से उपकरण की पहली खेप पहुंच चुकी है। जबकि उपकरण के शेष भाग को लाने के लिए एक और खेप आनी है। इसके बाद संयंत्र लगाने का काम शुरू होगा, जबकि मौसम वैज्ञानिक व मौसम पर्यवेक्षक इस केंद्र में पदस्थ हो गए हैं। नेपाल के तराई क्षेत्र सिद्धार्थनगर में वर्षा अधिक होती है। पहाड़ियों से मानसूनी हवाएं टकराती हैं तो ठहरे हुए बादल यहां ज्यादा बरसते हैं। ज्यादा बारिश और चार नदियों के कारण जिले में बाढ़ से क्षति होती है। इस कारण मौसम की सटीक जानकारी ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। अब जिला से लेकर प्रखंड तक विस्तार पूर्वक मौसम पूर्वानुमान संबंधी का आंकड़ा मिलेगा।
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जैसे जैसे मौसम बदलेगा, वैसे ही मिलेगी रिपोर्ट
मौसम विशेषज्ञ सूर्य प्रकाश सिंह ने बताया कि स्वचालित मौसम वेधशाला में जहां दैनिक तापमान, वर्षा, सूर्य का प्रकाश, आर्द्रता, वायु वेग, मृदा तापमान, वाष्प आदि दर्ज किये जाते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग नई दिल्ली के सानिध्य में इसका निर्माण हो रहा है। मौसम विभाग के ही कर्मचारी वेधशाला की देखरेख और संचालन करेंगे। इस संयंत्र के शुरू होने के बाद पांच दिन पहले ही मौसम के पूर्वानुमान की सटीक जानकारी मिल सकेगी, जबकि जैसे जैसे मौसम बदलेगा, वैसे ही रिपोर्ट मिलेती रहेगी। किसान बेहतर तरीके से कृषि कार्य कर सकेंगे। इससे प्राकृतिक आपदा के समय फसल की सुरक्षा हो पाएगी। इससे पशुधन प्रबंधन व अन्य कृषि क्रियाकलापों में सहूलियत होगी।
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कोरोना काल में हुई देर
स्वचालित मौसम वेधशाला में रडार सेट कर दिया गया है। सेंसर के उपकरण लगाए जाने के बाद रिपोर्ट मिलने लगेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण दिल्ली से उपकरणों को नहीं मंगाया जा सका। जिले को कोरोना मुक्त होने के बाद मौसम वेधशाला शुरू हो जाएगी।
स्वचालित मौसम वेधशाला जिले के लिए बड़ा उपयोगी साबित होगा। यह जिला बाढ़ग्रस्त है और ज्यादातर लोगों की आजीविका खेती किसानी पर निर्भर है। सेंसर के उपकरण आने के बाद इस केंद्र की शुरूआत हो जाएगी। जल्द ही मौसम वेधशाला शुरू हो जाएगी।
डॉ. एलसी वर्मा, केंद्र प्रभारी/ वरिष्ठ वैज्ञानिक
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